नई दिल्ली। देश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों व एग्री-उद्यमियों की कमाई बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘गोबरधन योजना’ (GOBARdhan Scheme) के तहत क्रांतिकारी फैसले लिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के तहत सरकार ने इस योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ नए नियमों का ढांचा लागू कर दिया है।
यह नई नीति वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 (अगले 10 सालों) तक के लिए लागू की गई है। इसके तहत अगर कोई उद्यमी, किसान संगठन (FPO) या कंपनी कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का नया प्लांट लगाती है, तो सरकार उसे 30 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत आर्थिक सहायता (Capital Support) प्रदान करेगी। इसके साथ ही उत्पादित बायोगैस की 100% शत-प्रतिशत खरीद और कम से कम 10 साल तक के लिए तय कीमत (Administered Price) की कानूनी गारंटी दी जाएगी।
💡 क्या है गोबरधन योजना और सरकार का मुख्य लक्ष्य?
गोबरधन (Galvanising Organic Bio-Agro Resources Dhan) केंद्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों और शहरों से निकलने वाले जैविक कचरे को ऊर्जा में बदलना है:
- कचरे से कंचन: पशुओं के गोबर, फसल अवशेष (पराली), सड़ी-गली सब्जियां, खाद्य अपशिष्ट और जैविक कचरे का उपयोग करके बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करना।
- निजी निवेश को बढ़ावा: देश में बायोगैस इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए निजी कंपनियों और युवाओं को इस सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित करना।
- पर्यावरण और पराली सुरक्षा: खेतों में पराली जलाने की समस्या को खत्म करना और बायो-फर्टिलाइजर (FOM) के जरिए खेतों की उर्वरक क्षमता को सुधारना।
💰 CBG प्लांट लगाने पर कितनी मिलेगी सरकारी मदद (सब्सिडी का गणित)?
पेट्रोलियम मंत्रालय की नई गाइडलाइन्स के मुताबिक, नए बायोगैस प्लांट लगाने से लेकर पुराने प्लांट्स के जीर्णोद्धार (Upgradation) के लिए अलग-अलग पैमाने तय किए गए हैं:
- 30 करोड़ रुपये की अधिकतम मदद: किसी भी पात्र CBG प्रोजेक्ट को अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता सरकार की तरफ से मिलेगी।
- नए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स (Greenfield Projects): नए CBG प्लांट स्थापित करने पर प्रतिदिन प्रति टन (TPD) उत्पादन क्षमता के हिसाब से 1.25 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।
- पुराने बायोगैस प्लांट का अपग्रेडेशन: यदि आपके पास पहले से कोई साधारण बायोगैस प्लांट मौजूद है और आप उसे आधुनिक CBG प्लांट में अपग्रेड करते हैं, तो प्रति TPD 0.60 करोड़ रुपये की मदद मिलेगी।
- प्लांट विस्तार (Brownfield Projects): पहले से चल रहे CBG प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने पर नए प्लांट की दर का 50 प्रतिशत तक फंड मिलेगा।
- मशीनरी व कचरा कलेक्शन के लिए मदद: गोबर और कृषि अवशेष एकत्र करने वाली मशीनों तथा जैविक खाद तैयार करने वाले उपकरणों पर आने वाले कुल पात्र खर्च का 50% (अधिकतम सीमा 0.75 करोड़ रुपये प्रति TPD) दिया जाएगा।
📈 98 रुपये प्रति किलो का तय भाव, 100% गैस खरीदेगी सरकार
अक्सर बायोगैस प्लांट लगाने वाले उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पादित गैस को बेचने की होती थी। सरकार ने नए नियमों में इस चिंता को पूरी तरह खत्म कर दिया है:
- 100% गैस खरीद का विकल्प: प्लांट ऑपरेटर बिक्री के लिए उपलब्ध अपनी कुल CBG का 100% हिस्सा सरकारी या सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को बेचने का विकल्प चुन सकते हैं।
- प्रशासित मूल्य (Administered Price): सरकार ने 95% मीथेन कंटेंट वाली CBG गैस के लिए 2110 रुपये प्रति यूनिट (MMBTU) का न्यूनतम मूल्य तय किया है। यदि इसे प्रति किलोग्राम में समझें तो यह लगभग 98 रुपये प्रति किलोग्राम बैठता है।
- 2036 तक लागू रहेगी रेट गारंटी: यह 98 रुपये/किलो का रेट कम से कम 31 मार्च 2036 तक लागू रहेगा। हालांकि, भविष्य में महंगाई और उत्पादन लागत बढ़ने पर इसमें बढ़ोतरी भी की जा सकती है।
🚛 सीएनजी और पीएनजी में मिलाई जाएगी कंप्रेस्ड बायोगैस
सरकार इस बायोगैस को सीधे आम उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए शहर गैस वितरण नेटवर्क (City Gas Distribution) का सहारा लेगी:
- पाइपलाइन से कनेक्टिविटी: बायो-गैस प्लांट्स को आसपास की मुख्य गैस पाइपलाइन और सीएनजी स्टेशनों से जोड़ा जाएगा।
- अनिवार्य सम्मिश्रण (Compulsory Blending): सीएनजी (वाहनों के लिए) और पीएनजी (घरेलू रसोई गैस) बेचने वाली कंपनियों के लिए बायोगैस खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है।
- लक्ष्य की समयसीमा:
- 2026-27: कुल गैस सप्लाई में कम से कम 3% CBG मिलाना अनिवार्य।
- 2027-28: यह दायित्व बढ़ाकर 4% किया जाएगा।
- 2028-29 से आगे: कंपनियों को कुल सप्लाई का कम से कम 5% CBG खरीदना ही होगा।
🛡️ इंफ्रास्ट्रक्चर, क्रेडिट गारंटी और इकोसिस्टम फंड
गोबरधन योजना को जमीन पर शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए सरकार ने 6 मुख्य स्तंभों पर बजट का आवंटन किया है:
- पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर: प्लांट्स को मुख्य नेटवर्क से जोड़ने का खर्च।
- क्रेडिट गारंटी सपोर्ट (Loan Guarantee): बैंकों से बायोगैस प्रोजेक्ट्स के लिए आसानी से लोन दिलाने की व्यवस्था।
- CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड: बायोगैस क्षेत्र में नई तकनीकों और स्टार्टअप्स को वित्तीय प्रोत्साहन देना।
- जैविक खाद (Bio-Fertilizer) का बाजार: CBG उत्पादन के दौरान निकलने वाले सॉलिड और लिक्विड वेस्ट को जैविक खाद के रूप में किसानों तक पहुँचाना।
🎯 किसानों, डेयरी ऑपरेटरों और नए एग्री-उद्यमियों को क्या होगा फायदा?
- गोबर से अतिरिक्त कमाई: पशुपालकों और डेयरी फार्मरों के पास गोबर को अच्छे दामों पर बायो-गैस प्लांट्स को बेचने का नया ज़रिया बनेगा।
- पराली की समस्या का समाधान: किसान अपने खेतों की पराली और अवशेष को बायोगैस प्लांट्स में बेचकर कमाई कर सकेंगे।
- सस्ती और ऑर्गेनिक खाद: बायोगैस प्लांट्स से निकलने वाली फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) से किसानों को रासायनिक डीएपी और यूरिया पर निर्भरता कम करनी होगी, जिससे ज़मीन की सेहत सुधरेगी।
- रोजगार के नए अवसर: हर गाँव और तहसील स्तर पर CBG प्लांट्स लगने से स्थानीय युवाओं को तकनीकी और लॉजिस्टिक क्षेत्र में रोजगार मिलेगा।
सरकार द्वारा लागू की गई नई गोबरधन नीति (2026-2036) देश के ऊर्जा क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। 30 करोड़ रुपये तक की सरकारी मदद, 98 रुपये/किलो का पक्का रेट और 100% खरीद की गारंटी से अब निजी निवेशक बिना किसी वित्तीय जोखिम के इस सेक्टर में कदम रख सकते हैं। आने वाले वर्षों में यह योजना न केवल भारत की विदेशी गैस आयात पर निर्भरता घटाएगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और समृद्ध किसान का सपना भी साकार करेगी।





