पटना / दानापुर। हर भारतीय रसोई में हल्दी का इस्तेमाल सिर्फ स्वाद और रंग के लिए नहीं, बल्कि इसके औषधीय गुणों की वजह से भी किया जाता है। चोट लगने पर दूध में हल्दी मिलाकर पीना हो या सब्जी में रोजाना तड़का लगाना, हल्दी को सेहत के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। लेकिन बिहार की राजधानी पटना से सटे दानापुर बाजार से एक ऐसी हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जो आपकी और आपके परिवार की सेहत पर सीधे हमला कर रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) की विशेष जांच टीम ने दानापुर की प्रसिद्ध मसाला मंडी में जब हल्दी के नमूनों की अत्याधुनिक मशीनों से जांच की, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। मंडी में बेची जा रही खुले ब्रांड और लोकल पिसी हल्दी के 80 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल पूरी तरह फेल पाए गए हैं। हल्दी को पीला और आकर्षक चमकीला बनाने के लिए उसमें लेड क्रोमेट (Lead Chromate यानी सीसा) नाम का अत्यंत जहरीला केमिकल मिलाया जा रहा है, जो शरीर में जाकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।
पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से खुली मिलावटखोरों की पोल
खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी पर लगाम लगाने और आम जनता को जागरूक करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दानापुर के मुख्य बाजार में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान अधिकारियों के पास अत्याधुनिक पोर्टेबल एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF) मशीन मौजूद थी, जिससे मौके पर ही कुछ ही मिनटों में केमिकल्स की मौजूदगी का पता लग जाता है।
- 12 दुकानों पर छापेमारी: जांच टीम ने मंडी की लगभग एक दर्जन (12) प्रमुख मसाला दुकानों से हल्दी के 35 अलग-अलग सैंपल एकत्र किए।
- 28 नमूनों में मिला खतरनाक सीसा: जब इन नमूनों की डिजिटल जांच की गई, तो 35 में से 28 सैंपलों में लेड क्रोमेट यानी सीसे की मात्रा सुरक्षित मानक (Standard Limit) से कई गुना अधिक पाई गई।
- मात्र 7 सैंपल ही निकले सुरक्षित: कुल नमूनों में से सिर्फ 7 सैंपल्स (लगभग 20%) ही ऐसे थे जिनमें लेड क्रोमेट की मात्रा शून्य (Zero PPM) पाई गई, यानी वही हल्दी खाने योग्य थी।
इस रिपोर्ट के सामने आते ही दानापुर मसाला मंडी के व्यापारियों में हड़कंप मच गया और खरीदारी करने आए आम लोग खौफ में आ गए।
क्या होता है लेड क्रोमेट और हल्दी में क्यों मिलाया जाता है?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लेड क्रोमेट (Lead Chromate) एक अकार्बनिक रासायनिक यौगिक (Chemical Compound) है, जिसका उपयोग औद्योगिक स्तर पर पेंट्स, प्लास्टिक, प्रिंटिंग इंक और रंग-रोगन के कामों में किया जाता है। इसका रंग बहुत ही गहरा पीला और चमकदार होता है।
मिलावटखोरों का काला खेल:
- चमक बढ़ाने का लालच: घटिया और कीड़े लगी हल्दी को पीसकर जब बाजार में लाया जाता है, तो उसका रंग फीका होता है। ग्राहक गहरे पीले रंग की हल्दी देखकर उसे शुद्ध मान लेते हैं। इसी मानसिकता का फायदा उठाकर मिलावटखोर उस पर लेड क्रोमेट की पॉलिश (लैपिंग) चढ़ा देते हैं।
- वजन बढ़ाना: लेड (सीसा) एक भारी धातु है। इसे हल्दी में मिलाने से हल्दी का वजन भी बढ़ जाता है, जिससे कम माल में ज्यादा मुनाफा कमाया जाता है।
सेहत पर कितना घातक है यह ‘धीमा जहर’? (कैंसर का खतरा)
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, लेड क्रोमेटयुक्त हल्दी का रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल करना शरीर में सीधे तौर पर जहर घोलने जैसा है। यदि लंबे समय तक ऐसा भोजन पेट में जाता है, तो इसके निम्नलिखित गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
- कैंसर जैसी भयानक बीमारी: लेड क्रोमेट को कार्सिनोजेनिक (Carcinogenic) माना गया है, जो शरीर की कोशिकाओं में म्यूटेशन करके पेट, आंत और लिवर कैंसर का कारण बन सकता है।
- किडनी और लिवर डैमेज: भारी धातु (Heavy Metal) होने के कारण सीसा हमारे शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलता। यह धीरे-धीरे लिवर और किडनी में जमा होकर उन्हें पूरी तरह से फेल कर सकता है।
- बच्चों के दिमाग पर असर: अगर गर्भवती महिलाएं या छोटे बच्चे इस सीसा-युक्त हल्दी का सेवन करते हैं, तो बच्चों का मानसिक विकास रुक सकता है और उनका आईक्यू (IQ) लेवल घट सकता है।
- एनीमिया और नसों की बीमारी: शरीर में हीमोग्लोबिन बनने की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे लगातार खून की कमी और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की कमजोरी होने लगती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्त चेतावनी और दुकानदारों को निर्देश
जांच के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दानापुर मंडी के सभी थोक व खुदरा विक्रेताओं को कड़ा अल्टीमेटम दिया है:
- सर्टिफाइड सोर्स से ही खरीदें माल: दुकानदारों और फुटकर विक्रेताओं से अपील की गई है कि वे केवल FSSAI रजिस्टर्ड और प्रामाणिक (Certified) कंपनियों से ही पिसी हल्दी या साबुत हल्दी खरीदें।
- खुले में बिकने वाली रंगीन हल्दी पर रोक: मंडी में खुलेआम बिकने वाली उस हल्दी की बिक्री पर रोक लगाने को कहा गया है, जिस पर केमिकल की कोटिंग की आशंका हो।
- लाइसेंस रद्द और कानूनी कार्रवाई: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली जांच में किसी भी व्यापारी के पास लेड क्रोमेट या अन्य केमिकल से लैस मिलावटी हल्दी पाई गई, तो उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून (FSSAI Act) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी और दुकान का लाइसेंस रद्द होगा।
आम उपभोक्ता असली और मिलावटी हल्दी की पहचान कैसे करें?
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम ग्राहकों को बाजार से हल्दी खरीदते और घर पर उसका इस्तेमाल करते समय कुछ आसान सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
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जांच का तरीका |
असली हल्दी की पहचान |
मिलावटी (लेड क्रोमेट) हल्दी |
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पानी में घोलकर जांच |
एक गिलास हल्के गुनगुने पानी में 1 चम्मच हल्दी डालें। असली हल्दी नीचे बैठ जाएगी और पानी का रंग हल्का पीला होगा। |
मिलावटी हल्दी पानी में डालते ही गहरा चमकीला पीला रंग छोड़ेगी और पानी धुंधला हो जाएगा। |
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रंग और चमक |
असली हल्दी का रंग प्राकृतिक हल्का पीला या हल्का भूरापन लिए होता है। |
यह बहुत अधिक चमकीली, गहरा पीला या गाढ़ी नारंगी दिखाई देती है। |
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हाथ पर रगड़ना |
हथेली पर हल्दी का पाउडर लेकर रगड़ने पर यह आसानी से छूट जाती है। |
हाथ पर रगड़ने पर यह गहरा पीला दाग छोड़ती है जो साबुन से भी आसानी से नहीं छूटता। |
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हाइड्रोक्लोरिक एसिड टेस्ट |
टेस्ट ट्यूब में हल्दी और थोड़ा एसिड डालने पर रंग नहीं बदलता। |
अगर हल्दी में लेड क्रोमेट है, तो एसिड डालते ही रंग गुलाबी या बैंगनी हो जाता है। |
दानपुर मसाला मंडी से आई यह रिपोर्ट सिर्फ पटना या बिहार के लोगों के लिए नहीं, बल्कि देश भर के उपभोक्ताओं के लिए एक आंखें खोल देने वाली चेतावनी है। जब तक आप बाजार से हल्दी खरीद रहे हैं, तब तक केवल आकर्षक रंग देखकर सामान न खरीदें।
कोशिश करें कि विश्वसनीय और ब्रांडेड पैकेज्ड हल्दी ही इस्तेमाल करें या फिर खड़ी (साबुत) हल्दी की गांठें खरीदकर खुद घर पर पिसवाएं। आपकी थोड़ी सी सतर्कता आपके पूरे परिवार को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है।




