Tuesday, September 22, 2026
खबर किसान की
  • होम
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • लेटेस्ट न्यूज
No Result
View All Result
  • होम
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • लेटेस्ट न्यूज
No Result
View All Result
खबर किसान की
No Result
View All Result
Home सरकारी योजनाएं

UP की गोशालाओं में बजेंगी शहनाइयां! योगी सरकार का मास्टर प्लान

यूपी में शुरू होगा 'गो-पर्यटन' मॉडल

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
September 22, 2026
in सरकारी योजनाएं
Reading Time: 2 min
0 0
0
0
SHARES
12
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterwhatsappQR CodeWechatTelegram

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की गोशालाएं अब सिर्फ बेसहारा गोवंश के रखरखाव या चारा-पानी के ठिकाने तक सीमित नहीं रहेंगी। योगी आदित्यनाथ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए एक अनूठा खाका तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में प्रदेश की चयनित गोशालाएं, कान्हा हाउस और वृहद गो-संरक्षण केंद्र न केवल सामाजिक व मांगलिक कार्यक्रमों के गवाह बनेंगे, बल्कि इन्हें ‘गो-पर्यटन’ (Gau Tourism) के प्रमुख केंद्र के रूप में भी निधारा जाएगा।

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप गोशालाओं को गांवों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की व्यापक रणनीति बनाई गई है। इस पहल से एक तरफ जहां गोशालाओं की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों, हस्तशिल्पियों और छोटे कारोबारियों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।

गोशाला परिसरों में आयोजित होंगे मांगलिक कार्यक्रम

इस नई योजना का सबसे दिलचस्प और सामाजिक पहलू यह है कि गोशालाओं के विशाल प्रांगण का उपयोग शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए किया जाएगा।

  • पारंपरिक माहौल में आयोजन: ग्रामीण इलाकों या आसपास के कस्बों के लोग अब मांगलिक कार्यक्रम जैसे—मुंडन संस्कार, नामकरण, जन्मदिन उत्सव, श्रीमद्भागवत कथा और विवाह समारोह जैसे आयोजन गोशाला परिसर के प्राकृतिक वातावरण में कर सकेंगे।
  • संस्कृति से जुड़ाव: इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य समाज को अपनी मिट्टी, गो-सेवा और पारंपरिक ग्रामीण जीवनशैली के करीब लाना है।
  • गोशालाओं की आय में बढ़ोतरी: इन आयोजनों से होने वाली आय का सीधा इस्तेमाल गोशाला के रख-रखाव, चारे की व्यवस्था और गोवंश की चिकित्सा में किया जा सकेगा, जिससे सरकार पर निर्भरता कम होगी।

हर जिले की विशेषता के आधार पर तय होगा ‘गो-पर्यटन’ का मॉडल

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने स्पष्ट किया कि गो-पर्यटन का यह ढांचा पूरे राज्य में एक जैसा (Uniform) नहीं थोपा जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की भौगोलिक परिस्थितियों और वहां की स्थानीय विशेषताओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग मॉडल तैयार किए जा रहे हैं:

  1. लोक कला व सांस्कृतिक केंद्र: ब्रज, पूर्वांचल, बुंदेलखंड या अवध के क्षेत्रों में वहां के लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य और लोक कथाओं को गोशालाओं के मंच से जोड़ा जाएगा।
  2. खान-पान और ग्रामीण हस्तशिल्प: जिस क्षेत्र का जो खान-पान या हस्तशिल्प मशहूर होगा, पर्यटकों के लिए गोशाला के आसपास वही चीजें उपलब्ध कराई जाएंगी। उदाहरण के लिए—देसी घी से बनी मिठाइयां, मिट्टी के बर्तन और जैविक उत्पाद।
  3. एग्री व डेयरी टूरिज्म: शहरों से आने वाले पर्यटकों और बच्चों को यह देखने का मौका मिलेगा कि ग्रामीण परिवेश में गो-पालन कैसे होता है, गोबर से खाद और बायोगैस कैसे बनती है, और आर्गेनिक खेती कैसे की जाती है।

ग्रामीणों और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वार

गो-पर्यटन का दायरा केवल गोशाला के चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा आसपास की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों को मिलने वाला है:

  • महिला स्वयं सहायता समूहों को काम: गोशाला में आने वाले पर्यटकों के लिए खान-पान (कंटीन/ढाबा), गोबर से बने दीपक, मूर्तियां, कंडे (उपले) और जैविक खाद बेचने का काम महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जाएगा।
  • स्थानीय कारीगरों को बाजार: गांव के कुम्हार, लोहार, बड़ाई और हस्तशिल्पियों द्वारा बनाए गए सामानों की बिक्री के लिए गोशाला परिसर के पास छोटे-छोटे स्टॉल या ग्रामीण हाट बनाए जा सकते हैं।
  • गाइड और लॉजिस्टिक्स: बाहर से आने वाले पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय युवाओं को गाइड, वाहन चालक और होम-स्टे जैसे क्षेत्रों में नया रोजगार मिलेगा।

कान्हा हाउस और वृहद संरक्षण केंद्रों का भी कायाकल्प

योगी सरकार की इस दूरगामी रणनीति में नगर निकायों द्वारा संचालित कान्हा उपवन (कान्हा हाउस) और जिलों में बने बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इन बड़े केंद्रों पर पर्याप्त जगह और इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है। इसलिए पहले चरण में ऐसे बड़े स्थलों को चुना जाएगा जहाँ हर दिन सैकड़ों पर्यटक बिना किसी अव्यवस्था के आ-जा सकें। शहर का कोई भी नागरिक अगर सपरिवार कुछ घंटे प्राकृतिक वातावरण में बिताना चाहता है, तो ये केंद्र उनके लिए पिकनिक और धार्मिक पर्यटन का बेहतरीन विकल्प साबित होंगे।

गो-पर्यटन मॉडल का संभावित ढांचा (एक नज़र में)

आयाम

मुख्य गतिविधि

मुख्य लाभार्थी

सामाजिक आयोजन

शादी–विवाह, मुंडन, भागवत कथा, जन्मोत्सव

स्थानीय नागरिक एवं गोशाला प्रबंधन

सांस्कृतिक जुड़ाव

लोक कला, पारंपरिक संगीत, ग्रामीण जीवन का अनुभव

स्थानीय कलाकार व बाहर से आने वाले पर्यटक

आर्थिक गतिविधियां

ऑर्गेनिक उत्पाद, गोबर के दीपक, हस्तशिल्प बिक्री

महिला स्वयं सहायता समूह व स्थानीय कारीगर

जागरूकता व शिक्षा

गो–आधारित प्राकृतिक खेती, बायोगैस की जानकारी

किसान, विद्यार्थी व शोधकर्ता

गांव की असली पहचान बनेगी गोशाला

किसी भी गांव का असली आकर्षण उसकी पुरानी परंपराओं, प्राकृतिक शांति और सीधे-सादे जीवन में छिपा होता है। यदि गोशालाओं को इसी ग्रामीण जीवनशैली के केंद्र के रूप में उभारा जाता है, तो ये केंद्र ‘रूरल टूरिज्म’ (Rural Tourism) के सबसे बड़े पड़ाव बन सकते हैं।

आने वाले समय में जब कोई पर्यटक किसी गांव का रुख करेगा, तो वह केवल घूमकर वापस नहीं जाएगा, बल्कि वहां की गोशाला में गो-सेवा करेगा, वहां के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखेगा और गांव की संस्कृति को करीब से समझेगा।

योगी आदित्यनाथ सरकार का गोशालाओं को ‘गो–पर्यटन‘ और मांगलिक आयोजनों से जोड़ने का यह कदम गो–संरक्षण के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है। यह योजना केवल पशुओं की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को एक साथ जोड़ने वाली एक अनूठी कड़ी है। यदि इसे सही ढंग से धरातल पर लागू किया जाता है, तो उत्तर प्रदेश की गोशालाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ–साथ राज्य की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति का नया चेहरा बनेंगी।

Tags: CM YogiEventsGau TourismSelf Helping GroupUP gaushalaUttar Pradesh News
Previous Post

रसोई की हल्दी बनी ‘धीमा जहर’! पटना की मसाला मंडी में 80% सैंपल फेल

अंकित शर्मा

अंकित शर्मा

Related Posts

सरकारी योजनाएं

गोबरधन योजना का बड़ा ऐलान! CBG प्लांट लगाने पर सरकार देगी 30 करोड़ रुपये की मदद

September 21, 2026
खेती-किसानी

छाता चीनी मिल में लगेगा इथेनॉल प्लांट, किसानों को 6% ब्याज पर मिलेगा 6 लाख का लोन

September 16, 2026
सरकारी योजनाएं

लखपति से ‘करोड़पति दीदी’ बनाने का विज़न, शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान

September 12, 2026
सरकारी योजनाएं

PM Kisan 24th Installment: किस दिन आएंगे 2,000 रुपये?

September 1, 2026
खबर किसान की

© 2025 khabarkisanki.com

Navigate Site

  • About
  • Team
  • Privacy & Policy
  • Contact
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • वीडियो
  • सरकारी योजनाएं

Follow Us

No Result
View All Result
  • होम
  • खाद-बीज
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • लेटेस्ट न्यूज
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत

© 2025 khabarkisanki.com

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist