पटना/नई दिल्ली। उत्तर भारत में मानसूनी बारिश और नदियों के रिकॉर्ड उफान से बिहार के कई जनपद इस समय सदी की सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहे हैं। गंगा, गंडक और कोसी नदियों के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि से लाखों हेक्टेयर में खड़ी फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। इस कुदरती आपदा और किसानों के संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीधे निर्देश पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान एक उच्चस्तरीय केंद्रीय टीम के साथ ‘ग्राउंड जीरो’ पर पहुंचे।
बिहार के उपमुख्यमंत्री व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्य के मंत्रियों और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ केंद्रीय मंत्री ने हाजीपुर, वैशाली, मुंगेर और भागलपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का तूफानी दौरा किया। नाव, मोटरबोट, ट्रैक्टर और हवाई निरीक्षण के जरिए केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ प्रभावित गांवों में जाकर पीड़ितों का दर्द बांटा और आश्वस्त किया कि केंद्र की मोदी सरकार संकट की इस घड़ी में बिहार के हर नागरिक और किसान के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
2016 की ऐतिहासिक बाढ़ का रिकॉर्ड टूटा, केले और मक्के की फसलें जलमग्न
बाढ़ की भयावह स्थिति का जायजा लेने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष नदियों का जलस्तर 2016 में आई ऐतिहासिक विनाशकारी बाढ़ की तुलना में लगभग एक फीट अधिक दर्ज किया गया है।
- 50 लाख से अधिक की आबादी प्रभावित: गंगा और उसकी सहायक नदियों के रौद्र रूप से बिहार के एक दर्जन से अधिक जिलों के लगभग 50 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
- मक्का और केले के बागान तबाह: पिछले 10-12 दिनों से खेतों में 5 से 8 फीट तक पानी भरे रहने के कारण वैशाली, भागलपुर और मुंगेर क्षेत्रों में मक्के की खड़ी फसल और केले के विशाल बागान पूरी तरह सड़कर नष्ट हो चुके हैं।
- पशुधन और संपत्तियों की भारी क्षति: हजारों परिवारों को अपने पक्के आशियाने छोड़कर तटबंधों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है, जिससे मवेशियों के चारे और सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
नाव, बोट और ट्रैक्टर से जलमग्न गांवों में उतरे केंद्रीय मंत्री
सरकारी औपचारिकताओं को दरकिनार करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद जलमग्न इलाकों के बीच पहुंचे।
1. वैशाली और हाजीपुर में बोट से निरीक्षण
हाजीपुर के सबसे ज्यादा प्रभावित तेरसिया और सरायपुर इलाकों में केंद्रीय मंत्री देशी नाव और बोट में सवार होकर डूबे हुए मकानों और खेतों तक पहुंचे। इसके बाद राघोपुर सिक्स-लेन पुल से बाढ़ के फैलाव का तकनीकी अवलोकन किया गया।
2. मुंगेर के तटबंधों और राहत शिविरों की समीक्षा
मुंगेर में उन्होंने कोजीकरैया बांध और नवागढ़ी राहत शिविर का दौरा किया। वहां उन्होंने विस्थापित परिवारों से भोजन, पेयजल और दवाओं की उपलब्धता पर सीधा संवाद किया।
3. भागलपुर में शरणार्थियों से आत्मीय संवाद
भागलपुर के विभिन्न राहत केंद्रों में पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सूखा राशन, तिरपाल और गर्म भोजन के पैकेट बांटे और कहा कि “जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, सरकार भोजन और चिकित्सा का पूरा जिम्मा उठाएगी।”
राज्य सरकार का त्वरित एक्शन: प्रति परिवार ₹7,000 सीधे बैंक खाते में (DBT)
संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार के त्वरित राहत कार्यों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बिहार प्रशासन चौबीसों घंटे राहत अभियानों में जुटा हुआ है।
- तत्काल 7,000 रुपये की वित्तीय मदद: बिहार सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित प्रत्येक पंजीकृत परिवार के बैंक खाते में आपदा राहत राशि के रूप में 7,000 रुपये सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजे जा रहे हैं।
- नावों पर तैनात मेडिकल टीमें: पानी से घिरे इलाकों में जलजनित बीमारियों और सर्पदंश से बचाव के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की मोबाइल टीमें नावों के जरिए घर-घर भेजी जा रही हैं।
- मवेशियों के लिए चारे का प्रबंध: पशुधन को बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा सूखा चारा और टीकाकरण की सुविधा राहत शिविरों के पास उपलब्ध कराई जा रही है।
केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी दल (IMCT) करेगा फसल व इंफ्रास्ट्रक्चर नुकसान का विस्तृत आकलन
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि तात्कालिक राहत कार्यों के बाद पुनर्निर्माण और किसानों के स्थायी पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार बड़ा वित्तीय पैकेज जारी करेगी।
1. केंद्रीय स्टडी टीम का बिहार दौरा
कृषि, ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्रालयों के वरिष्ठ विशेषज्ञों का एक संयुक्त अंतर-मंत्रालयी दल जल्द ही बिहार के सभी प्रभावित जिलों का दौरा करेगा।
2. NDRF और SDRF फंड से शत-प्रतिशत भरपाई
केंद्रीय दल द्वारा खेतों में जाकर फसलों के नुकसान, क्षतिग्रस्त सड़कों, ध्वस्त पुलों, कटे हुए तटबंधों और बेघर हुए मकानों का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत भेजे जाने वाले ज्ञापन (Memorandum) के आधार पर केंद्र सरकार बिना किसी बजटीय विलंब के धनराशि स्वीकृत करेगी।
1 अणे मार्ग पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में तय हुआ रोडमैप
दिनभर के थकाऊ और सघन जमीनी दौरे के बाद शाम को पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की संयुक्त अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के सभी प्रमुख सचिवों, आपदा प्रबंधन अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया। बैठक में निर्देश दिए गए कि जैसे ही नदियों का जलस्तर घटता है, तुरंत ब्लीचिंग पाउडर और कीटनाशकों का छिड़काव किया जाए ताकि महामारी न फैले। साथ ही, रबी फसल की आगामी बुवाई के लिए किसानों को मुफ्त बीज और खाद किट उपलब्ध कराने का खाका भी तैयार किया गया।
केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन सरकार‘ का एक साथ धरातल पर उतरना बिहार के बाढ़ पीड़ितों और किसानों के लिए बड़े संबल का प्रतीक है। मक्के और केले की फसलों को हुए नुकसान का शत–प्रतिशत आकलन कराकर डीबीटी के माध्यम से मुआवजा देने और ढांचागत पुनर्निर्माण का संकल्प यह दर्शाता है कि कुदरत की इस मार से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों को उबारने के लिए सरकार पूरी तरह कटिबद्ध है।





