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सीएम योगी का बड़ा ऐलान, 102 गांवों के बाढ़ पीड़ितों को मिलेगी राहत राशि

UP Flood Relief Funds

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
September 3, 2026
in खेती-किसानी
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उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और उफान पर बहती नदियों के पानी ने ग्रामीण जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के विभिन्न जनपदों में प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे 150 से अधिक गांव सीधे तौर पर बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों और अन्नदाता किसानों के लिए बड़े राहत पैकेज की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा है कि आपदा की इस स्थिति में हर प्रभावित नागरिक की सुरक्षा, भोजन और पुनर्वास सुनिश्चित करना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। फर्रुखाबाद जिले के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों का धरातल पर उतरकर निरीक्षण करते हुए उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को खाद्यान्न सामग्री, भूमि आवंटन प्रमाण पत्र और वित्तीय मदद का वितरण किया। इसके साथ ही, जलभराव से तबाह हुई किसानों की फसलों का त्वरित सर्वे करवाकर सीधे बैंक खातों में मुआवजा भेजने के आदेश जारी किए हैं।

फर्रुखाबाद में सीएम योगी की दोटूक: “आपदा में अकेला नहीं है कोई नागरिक”

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले की तीन प्रमुख तहसीलों—सदर, कायमगंज और अमृतपुर—में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने तबाही मचा रखी है। स्थिति का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित 102 गांवों के ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में डबल इंजन की सरकार पूरी मजबूती के साथ जनता के साथ खड़ी है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लालफीताशाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • 1,000 से ज्यादा परिवारों को तात्कालिक राहत: बाढ़ से घिरे परिवारों को सूखा राशन, तिरपाल, दवाइयां और आवश्यक सामग्री बांटी गई।
  • बेघर हुए परिवारों को भू-आवंटन पत्र: बाढ़ के तेज़ बहाव में जिन लोगों के आशियाने बह गए या कटान में समा गए, उन्हें राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से आर्थिक मदद के साथ-साथ तुरंत भूमि आवंटन के प्रमाण पत्र सौंपे गए।
  • 24 घंटे एक्टिव रहेंगे कंट्रोल रूम: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे चालू रहने वाले नियंत्रण कक्ष, बाढ़ चौकियां और राहत शिविर स्थापित कर दिए गए हैं, ताकि बेघर हुए लोगों को भोजन और सुरक्षित आश्रय मिलता रहे।

किसानों के लिए बड़ा कदम: सर्वे पूरा होते ही सीधे खाते में आएगा फसल मुआवजे का पैसा

मानसून की भारी बारिश और नदियों के ओवरफ्लो होने से हज़ारों एकड़ में खड़ी गन्ने, धान, तिलहन और हरी सब्जियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। इससे अन्नदाताओं को भारी आर्थिक झटका लगा है। किसानों की इस बदहाली पर संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी बाढ़ प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का पारदर्शी और त्वरित सर्वे कराने का फरमान सुनाया है।

1. धरातल पर जाकर सर्वे करेंगी टीमें

राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीमें खेतों में जाकर जलमग्न हुई फसलों का नुकसान आंकेगी। सर्वे प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जीपीएस और आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि कोई भी वास्तविक पीड़ित किसान मुआवजे से वंचित न रह जाए।

2. Direct Benefit Transfer (DBT) से भुगतान

फसल नुकसान का सर्वे पूरा होते ही मुआवजे की निर्धारित राशि बिना किसी मध्यस्थ या सरकारी दफ्तर के चक्कर काटे directly किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगली फसल की बुवाई से पहले किसानों के हाथ में मुआवजा राशि पहुंच जाए।

सर्पदंश से बचाव के लिए स्वास्थ्य महकमा अलर्ट, अस्पतालों में एंटी-वेनम की तैनाती

बाढ़ और जलभराव के दौरान गांवों में जहरीले जीवों, विशेषकर सांप और बिच्छू के निकलने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

  • एंटी-वेनम दवाओं की उपलब्धता: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में सर्पदंश-रोधी (Anti-Snake Venom) इंजेक्शंस की पर्याप्त खेप पहुंचा दी गई है।
  • मोबाइल मेडिकल टीमें तैनात: पानी से घिरे गांवों में संक्रामक बीमारियों और महामारी को रोकने के लिए डॉक्टरों की मोबाइल टीमें नावों के जरिए घर-घर जाकर दवाइयां बांट रही हैं।
  • पेयजल की स्वच्छता पर जोर: बाढ़ के दौरान दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए क्लोरीन की गोलियां और जलस्रोतों को सैनिटाइज करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का बड़े पैमाने पर छिड़काव किया जा रहा है।

कटान रोकने और नदियों के प्रवाह को सुचारू बनाने की दीर्घकालिक योजना

बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल तात्कालिक राहत देना ही सरकार का उद्देश्य नहीं है, बल्कि भविष्य में गांवों को डूबने से बचाने के लिए पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में आ रही रुकावटों को दूर करें और कटान वाली जगहों पर मजबूत स्टड व तटबंधों का निर्माण कराएं।

तटबंधों की सुरक्षा के लिए लगातार गश्त की जा रही है और संवेदनशील इलाकों पर ड्रोन कैमरों के जरिए निगरानी रखी जा रही है। जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अफसर पिछले दो हफ्तों से लगातार धरातल पर डटे हुए हैं ताकि राहत सामग्री का वितरण पारदर्शी तरीके से हो सके।

उत्तर प्रदेश में कुदरत के इस कहर से हुए जान–माल और खेती के नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। 102 गांवों के बाढ़ पीड़ितों को भूमि, राशन और वित्तीय मदद देने के साथ–साथ अन्नदाताओं की डूब चुकी फसलों का पाई–पाई मुआवजा देने की घोषणा से ग्रामीण इलाकों में बड़ी राहत पहुंची है। प्रभावित किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के राजस्व लेखपाल या कृषि विकास अधिकारी से तुरंत संपर्क कर अपनी जलमग्न फसल का विवरण दर्ज कराएं ताकि डीबीटी के माध्यम से मिलने वाले मुआवजे में कोई देरी न हो।

Tags: CM YogiCrop CompensationDBTFarmersFloodUP Flood Relief FundsUP NewsUttar Pradesh
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अंकित शर्मा

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