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हरियाणा में इन किसानों को हर साल मिलेंगे ₹10,000! सीएम नायब सैनी का बड़ा ऐलान

देसी गाय खरीदने पर ₹30,000 की सब्सिडी

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
June 8, 2026
in खेती-किसानी
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भारत के खाद्यान्न भंडार को भरने वाले अग्रणी राज्य हरियाणा ने अब कृषि क्षेत्र में एक नए और ऐतिहासिक युग की शुरुआत कर दी है। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बेजान हो रही मिट्टी को बचाने और आम जनता को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए हरियाणा सरकार एक बेहद महत्वाकांक्षी ‘प्राकृतिक खेती नीति’ लागू करने जा रही है। कुरुक्षेत्र में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस नीति के मुख्य खाके को देश के सामने रखा। इस योजना के तहत न केवल ग्राम पंचायतों की खाली जमीनों का उपयोग प्राकृतिक खेती के लिए किया जाएगा, बल्कि किसानों को सीधे तौर पर बड़ी आर्थिक मदद, उन्नत प्रशिक्षण और उनकी उपज को बेचने के लिए मंडियों में विशेष बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा।

पंचायत और सरकारी भूमि पर प्राकृतिक खेती का नया खाका

हरियाणा सरकार का विजन इस बार केवल निजी खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामूहिक भूमिका का उपयोग करके एक बड़ा उदाहरण पेश करना है।

  • पंचायत भूमि का इस्तेमाल: मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि आगामी वर्ष से गांवों की पंचायती जमीनों पर प्राकृतिक और जैविक कृषि पद्धतियों को अनिवार्य और प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष कानूनी ढांचा या नीति बनाई जाएगी।
  • 800 एकड़ का सरकारी पट्टा: इसके अतिरिक्त, प्रदेश के कृषि विभाग के पास उपलब्ध करीब 800 एकड़ की सरकारी भूमि को एक विशेष लीज (पट्टे) मॉडल पर दिया जाएगा। यह जमीन केवल उन्हीं प्रगतिशील किसानों को आवंटित की जाएगी जो न्यूनतम 10 वर्षों तक बिना किसी रासायनिक खाद के, पूर्णतः प्राकृतिक या जैविक तरीके से खेती करने का लिखित संकल्प लेंगे।

प्रति एकड़ ₹10,000 की वित्तीय सहायता और प्रमाणीकरण

परंपरागत खेती से हटकर जब कोई किसान प्राकृतिक खेती की शुरुआत करता है, तो शुरुआती वर्षों में उसे वित्तीय संबल की आवश्यकता होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने सीधे नकद सहायता की व्यवस्था की है।

  • पांच साल तक लगातार मदद: एपीडा (APEDA) से प्रमाणित होने वाले प्राकृतिक और जैविक किसानों को सरकार की ओर से अगले 5 वर्षों तक प्रति एकड़ ₹10,000 की वार्षिक आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
  • आसान सर्टिफिकेशन: जैविक उत्पादों के सर्टिफिकेशन (प्रमाणीकरण) की जटिल प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए ‘हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी’ को इस पूरे अभियान की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कुरुक्षेत्र में ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर’ और मोरनी का ‘मॉडल क्षेत्र’

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सरकार दो बड़े क्षेत्रों को विशेष रूप से विकसित कर रही है:

  1. 2,000 एकड़ पर स्मार्ट फार्मिंग: हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के तकनीकी सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले के 2,000 एकड़ क्षेत्र में एक विशेष “स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना” की नींव रखी जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि इस तकनीकी बदलाव के कारण किसी किसान को फसल में कोई नुकसान होता है, तो उसकी शत-प्रतिशत वित्तीय भरपाई हरियाणा सरकार खुद करेगी।
  2. मोरनी ब्लॉक का कायाकल्प: पंचकूला के पहाड़ी क्षेत्र ‘मोरनी ब्लॉक’ को पूरी तरह से रासायनिक खादों से मुक्त करके राज्य का पहला संपूर्ण प्राकृतिक और जैविक खेती मॉडल क्षेत्र घोषित किया जाएगा।

बाज़ार का संकट खत्म: प्रदेश की प्रमुख मंडियों में मिलेंगे विशेष काउंटर

पशुपालकों और किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि वे मेहनत करके शुद्ध उत्पाद तो तैयार कर लेते हैं, लेकिन बाजार में उसे सामान्य अनाज के भाव ही बेचना पड़ता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए सूबे की 10 प्रमुख मंडियों (जिनमें पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल शामिल हैं) में प्राकृतिक उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष स्थान या ‘एक्सक्लूसिव आउटलेट्स’ आरक्षित किए जाएंगे। साथ ही, मिलावट रोकने और शुद्धता की जांच के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और प्रमाणन केंद्र भी इन्हीं मंडियों के आसपास स्थापित होंगे।

देसी गाय के संरक्षण के लिए ₹30,000 की बड़ी सब्सिडी

चूंकि प्राकृतिक खेती का पूरा आधार ही गोवंश पर निर्भर है, इसलिए सरकार ने देसी गायों के पालन को बढ़ावा देने के लिए अपनी वित्तीय सहायता में भारी बढ़ोतरी की है। वर्ष 2025 से इस सहायता राशि को बढ़ाकर सीधे ₹30,000 कर दिया गया है। यह लाभ उन सभी किसानों को मिलेगा जिनके पास न्यूनतम एक एकड़ की कृषि योग्य भूमि है। इसके साथ ही, जीवामृत, बीजामृत और अन्य प्राकृतिक खाद व कीटनाशक बनाने के लिए आवश्यक कच्चे माल के भंडारण हेतु ड्रम खरीदने के लिए भी सरकार अलग से आर्थिक अनुदान दे रही है।

प्रशिक्षण से लेकर अब तक के शानदार आंकड़े

हरियाणा में इस समय प्राकृतिक खेती का कारवां बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है:

  • पोर्टल पर पंजीकरण: राज्य सरकार द्वारा साल 2022 में शुरू किए गए विशेष पोर्टल पर अब तक लगभग 2 लाख किसानों ने अपनी 3 लाख एकड़ से अधिक भूमि का पंजीकरण कराया है।
  • सत्यापन: कृषि विभाग द्वारा 23,930 किसानों का ऑन-ग्राउंड वेरिफिकेशन पूरा किया जा चुका है, जो वर्तमान में 44,000 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल पर सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
  • प्रशिक्षण केंद्र: कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में स्थापित विशेष प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से अब तक 12,000 से अधिक किसानों, महिलाओं, युवाओं और सरकारी अधिकारियों को व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इसके अलावा, ग्रामीण स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए हजारों सरपंचों को ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है।

रासायनिक खेती का खौफनाक सच और प्राकृतिक खेती की आवश्यकता

इस कार्यशाला में मौजूद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर बेहद कड़े तथ्य रखे। उन्होंने सचेत किया कि रासायनिक उर्वरकों और जहरीले कीटनाशकों के अनियंत्रित उपयोग से हमारी उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर मरुस्थल में तब्दील हो रही है। यही जहर हमारे जल स्रोतों के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर रहा है, जिसके कारण आज समाज में कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियां महामारी का रूप ले चुकी हैं।

प्राकृतिक खेती इसका एकमात्र और अचूक समाधान है। यह पूरी तरह से देसी गाय के गोबर और गोमूत्र पर आधारित है, जिसमें गुड़, बेसन और स्थानीय मिट्टी को मिलाकर अत्यंत प्रभावशाली ‘जीवामृत’ तैयार किया जाता है। यह पद्धति मिट्टी में केंचुओं और सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर उसकी प्राकृतिक उर्वरता को वापस लाती है।

हरियाणा सरकार के ये ऐतिहासिक और साहसिक कदम यह साफ दर्शाते हैं कि राज्य अब केवल खाद्यान्न के उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि भोजन की ‘शुद्धता’ पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत 21 फसलों को सुरक्षा कवच देने वाला हरियाणा अब देश के सामने प्राकृतिक खेती का भी सबसे बड़ा रोल मॉडल बनने की राह पर अग्रसर है। यदि आज हमारे किसान भाई अपनी जमीन के एक छोटे से हिस्से से भी इस प्राकृतिक बदलाव की शुरुआत करते हैं, तो यह हमारी आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ जमीन, शुद्ध पेयजल और एक रोगमुक्त स्वस्थ जीवन देने की दिशा में सबसे बड़ा योगदान होगा।

Tags: Acharya DevvratCM Nayab Sainidesi cowFarmersharyanaNatural Farming
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