Tuesday, August 18, 2026
खबर किसान की
  • होम
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • लेटेस्ट न्यूज
No Result
View All Result
  • होम
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • लेटेस्ट न्यूज
No Result
View All Result
खबर किसान की
No Result
View All Result
Home खेती-किसानी

इथेनॉल ब्लेंडिंग क्रांति से अन्नदाता बना ‘ऊर्जादाता’, गन्ने-मक्के के किसानों की बदली तकदीर

भारत में कृषि और ऊर्जा क्षेत्र का नया युग

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
August 18, 2026
in खेती-किसानी
Reading Time: 1 min
0 0
0
0
SHARES
8
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterwhatsappQR CodeWechatTelegram

जब भारत का किसान अपनी मेहनत के पसीने से फसल सींचता है, तो वह केवल देश की थाली में अनाज नहीं परोसता, बल्कि अब देश के आर्थिक पहियों को भी रफ्तार देता है। केंद्र सरकार का ‘इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम’ (Ethanol Blended Petrol – EBP) देश के कृषि परिदृश्य में एक ऐसा परिवर्तनकारी मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसने भारतीय किसान को ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ सही मायनों में ‘ऊर्जादाता’ का दर्जा दे दिया है। ‘ख़बर किसान की’ की टीम जब ज़मीनी हकीकत का जायजा लेने देश के ग्रामीण अंचलों और चीनी मिल क्षेत्रों में उतरी, तो किसानों के चेहरे पर एक नई खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। विदेशी कच्चे तेल (Crude Oil) पर भारत की निर्भरता घटाने से लेकर किसानों को उनकी उपज का सही और त्वरित मूल्य दिलाने तक, इथेनॉल कार्यक्रम ने देश की अर्थव्यवस्था को नई संजीवनी दी है।

किन-किन फसलों और जैविक कचरे से बनता है इथेनॉल?

अक्सर आम लोगों में यह धारणा रहती है कि इथेनॉल केवल गन्ने के रस से बनता है, लेकिन आधुनिक तकनीक ने इसमें क्रांति ला दी है। इथेनॉल मुख्य रूप से स्टार्च और शुगर (शर्करा) युक्त फसलों से तैयार होने वाला एक शुद्ध बायो-फ्यूल (Biofuel) है:

  1. गन्ना और इसके उप-उत्पाद: गन्ने का सीधा रस (Sugarcane Juice), बी-हैवी मोलासेस (B-Heavy Molasses) और सी-हैवी मोलासेस।
  2. मक्का (Maize): मक्के में स्टार्च की प्रचुर मात्रा होने के कारण यह इथेनॉल उत्पादन का एक बहुत बड़ा और मजबूत जरिया बन चुका है।
  3. खराब/टूटे हुए चावल (Damaged Food Grains / Broken Rice): एफसीआई (FCI) के गोदामों में बचा हुआ या मंडियों में बिकने से रह जाने वाला टूटा हुआ चावल, जो इंसानों के सीधे खाने योग्य नहीं रहता।
  4. अन्य अनाज: ज्वार, बाजरा और अन्य मोटे अनाज (Millets) का उपयोग भी एग्री-वेस्ट के रूप में इथेनॉल बनाने के लिए किया जा रहा है।

फसलों का यह बहुआयामी उपयोग (Diversification) किसानों को किसी एक मंडी या एक खरीददार पर निर्भर रहने से बचाता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: इथेनॉल से किसानों को कैसे हो रहा है सीधा आर्थिक लाभ?

1. गन्ने के बकाये भुगतान से हमेशा के लिए मुक्ति

अतीत में चीनी मिलों पर किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान महीनों और सालों तक अटका रहता था। चीनी का सरप्लस (अत्यधिक) उत्पादन होने से चीनी के दाम गिर जाते थे और मिलें घाटे में चली जाती थीं। अब चीनी मिलें अतिरिक्त गन्ने और मोलासेस को सीधे इथेनॉल में तब्दील कर रही हैं। तेल विपणन कंपनियां (OMCs जैसे IOCL, BPCL, HPCL) चीनी मिलों को इथेनॉल का तुरंत भुगतान कर देती हैं। नतीजतन, इतिहास में पहली बार गन्ने का 95 से 98 प्रतिशत भुगतान पेराई सत्र के दौरान ही सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंच रहा है।

2. मक्का उत्पादक किसानों के दिन बहुरे

पहले मक्का उगाने वाले किसानों को अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी मुश्किल से मिल पाता था। इथेनॉल डिस्टिलरीज द्वारा मक्के की भारी मांग के कारण अब खुले बाजार में मक्के का भाव एमएसपी से भी ऊपर चला गया है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मक्का किसानों की आय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

3. ‘डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विथ सोल्यूबल्स’ (DDGS) का दोहरा फायदा

अनाज से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया के बाद जो अवशेष बचता है, उसे DDGS कहा जाता है। यह मवेशियों और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) के लिए एक उच्च-प्रोटीन वाला उत्तम पशु आहार बनता है। यानी किसान की फसल का एक-एक कण इस्तेमाल हो रहा है और कुछ भी बेकार नहीं जाता।

विश्व और भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग का इतिहास: कब हुई शुरुआत?

  • वैश्विक परिदृश्य: इथेनॉल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने का विचार नया नहीं है। दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान गन्ने से इथेनॉल बनाकर गाड़ियों में मिलाना शुरू किया था। आज ब्राजील की गाड़ियों में 27% से लेकर 100% तक (फ्लेक्स फ्यूल) इथेनॉल का इस्तेमाल होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) भी मक्के से इथेनॉल बनाने में दुनिया में अग्रणी है।
  • भारत का सफर: भारत में औपचारिक रूप से इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की शुरुआत 2003 में हुई थी, लेकिन कई सालों तक इसमें ब्लेंडिंग प्रतिशत केवल 1.5% से 2% के आसपास ही अटका रहा। वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार ने इथेनॉल उत्पादन पर पारदर्शी नीतियां बनाईं, डिस्टिलरीज के लिए ब्याज सब्सिडी योजनाएं लागू कीं और इथेनॉल के खरीद मूल्य में इजाफा किया।
  • उपलब्धि: भारत ने तय समय सीमा से काफी पहले ही 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।

इथेनॉल को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें और उनका व्यावहारिक सच

इथेनॉल कार्यक्रम की सफलता के बीच कुछ भ्रामक अफवाहें भी सोशल मीडिया पर फैलाई जाती हैं। ‘ख़बर किसान की’ ने विशेषज्ञों से बातचीत कर इन अफवाहों का तकनीकी विश्लेषण किया है:

  • अफवाह 1: “इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों के इंजन खराब हो जाते हैं।”
    • सच: आधुनिक कारें और दोपहिया वाहन बीएस-VI (BS-VI) मानकों के तहत ई-20 (20% इथेनॉल) के लिए पूरी तरह अनुकूलित (Compatible) बनाए जा रहे हैं। पुरानी गाड़ियों में भी 10% से 12% इथेनॉल मिश्रण से कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इथेनॉल का ऑक्टेन नंबर अधिक होता है, जिससे इंजन की परफॉर्मेंस और नॉक-रेजिस्टेंस क्षमता बेहतर होती है।
  • अफवाह 2: “इथेनॉल बनाने से देश में खाद्यान्न संकट (Food vs Fuel) पैदा हो जाएगा।”
    • सच: सरकार की नीति पूरी तरह संतुलित है। इथेनॉल बनाने के लिए केवल सरप्लस (अतिरिक्त) अनाज या खराब हो चुके चावल का प्रयोग किया जाता है। देश के बफर स्टॉक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS/राशन) पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
  • अफवाह 3: “पानी की खपत अत्यधिक बढ़ जाएगी।”
    • सच: इथेनॉल उत्पादन के लिए 2G (दूसरी पीढ़ी) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें कृषि कचरे और पराली का उपयोग होता है, जिससे पानी की कोई बर्बादी नहीं होती।

देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट: विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण संरक्षण

इथेनॉल ब्लेंडिंग केवल कृषि का विषय नहीं है, यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता से जुड़ा मामला है:

  1. अरबों रुपये के तेल आयात बिल में कटौती: भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य से देश को हर साल 50,000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की सीधी बचत हो रही है।
  2. पैसा सीधे देश के भीतर: तेल कंपनियों का जो पैसा पहले अरब देशों और विदेशी तेल कंपनियों के पास जाता था, वह अब सीधे देश के किसान, चीनी मिलों और डिस्टिलरी में काम करने वाले स्थानीय युवाओं के हाथ में आ रहा है।
  3. कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी: इथेनॉल एक ऑक्सीजन युक्त ईंधन है, जो पेट्रोल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन 30% से 40% तक कम करता है। इससे शहरों का प्रदूषण घट रहा है।

‘ख़बर किसान की’ द्वारा धरातल पर किए गए विश्लेषण से यह साफ है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने भारत के कृषि परिदृश्य की तस्वीर बदल दी है। किसान अब केवल मौसम और बिचौलियों की कृपा पर निर्भर रहने वाला बेबस इंसान नहीं है, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों का मुख्य आधार बन चुका है। सरकार की स्पष्ट नीतियों, वैज्ञानिकों के नवाचार और किसानों की कड़ी मेहनत के बल पर भारत बायो-एनर्जी के क्षेत्र में विश्व का सिरमौर बनने की ओर अग्रसर है।

Tags: agricultureE20EthanolEthanol Blended PetrolIndian Economynitin gadkariPetrolSugarcane farmers
Previous Post

कृषि मंत्री ने शुरू किया NSP-DBT पोर्टल, 6,000 विद्यार्थियों के खातों में सीधे पहुंचे ₹21.35 करोड़

अंकित शर्मा

अंकित शर्मा

Related Posts

खेती-किसानी

दिल्ली में ₹22,000 करोड़ का कथित राशन चावल घोटाला!

August 10, 2026
खेती-किसानी

शुद्धग्राम’ में किसान और उपभोक्ताओं का हुआ सीधा संवाद, खुली पैकेटबंद खाने की पोल

July 6, 2026
खेती-किसानी

4 राज्यों में MSP पर दाल,तिलहन की बंपर खरीद को मंजूरी – शिवराज सिंह चौहान का बड़ा फैसला

June 19, 2026
खेती-किसानी

PM Kisan Yojana Update: जून 2026 की इस तारीख को जारी होगी पीएम किसान की किस्त

June 18, 2026
खबर किसान की

© 2025 khabarkisanki.com

Navigate Site

  • About
  • Team
  • Privacy & Policy
  • Contact
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • वीडियो
  • सरकारी योजनाएं

Follow Us

No Result
View All Result
  • होम
  • खाद-बीज
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • लेटेस्ट न्यूज
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत

© 2025 khabarkisanki.com

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist