भारत भर में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों (Dairy Products) की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही बड़ी चुनौती इन उत्पादों को खराब होने से बचाने और उनकी शेल्फ लाइफ (Shelf Life) बढ़ाने की रही है। खासकर पारंपरिक भारतीय डेयरी उत्पाद ‘पनीर’ की गुणवत्ता और ताजगी को लंबे समय तक बनाए रखना छोटे और बड़े दोनों स्तर के डेयरी व्यवसायियों के लिए एक मुख्य सिरदर्द बना रहता था। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (ICAR-NDRI), करनाल के वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है। वैज्ञानिकों के इस नवाचार से न केवल पनीर की शेल्फ लाइफ में 10 दिनों से अधिक का इजाफा होगा, बल्कि इसका प्राकृतिक स्वाद, बनावट (टेक्सचर) और पौष्टिकता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।
क्या है AMCF तकनीक और यह कैसे करती है काम?
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा ईजाद की गई इस अनूठी तकनीक को ‘एंटीमाइक्रोबियल कोएगुलेंट फॉर्मूलेशन’ (Antimicrobial Coagulant Formulation – AMCF) का नाम दिया गया है।
साधारण शब्दों में कहें तो यह एक ‘डबल-एक्शन’ यानी दोहरे प्रभाव वाली तकनीक है:
- दूध का सम्मिश्रण (Coagulation): यह पारंपरिक सिट्रिक एसिड या खट्टे पानी की तरह दूध को फाड़कर पनीर तैयार करने का प्राथमिक कार्य करती है।
- जैविक सुरक्षा चक्र (Antimicrobial Agent): यह एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो पनीर के निर्माण के बाद उसमें सूक्ष्म जीवाणुओं और फफूंद (फंगस) को पनपने से पूर्णतः रोकती है।
पारंपरिक तरीकों से बनाए गए पनीर में 2 से 3 दिनों के भीतर खटास आने लगती है या सतह पर चिपचिपापन दिखने लगता है, लेकिन AMCF तकनीक से तैयार पनीर लगभग दो हफ्तों तक अपने मूल रूप और स्वाद में बना रहता है।
‘गुड बैक्टीरिया’ का इस्तेमाल: विज्ञान और प्रकृति का अद्भुत मेल
ICAR-NDRI के वैज्ञानिकों ने इस शोध में किसी भी हानिकारक रासायनिक तत्व या सिंथेटिक प्रिजर्वेटिव का प्रयोग नहीं किया है। इसके बजाय, प्रकृति में मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीवों का सहारा लिया गया है।
इस तकनीक में ‘लैक्टोबैसिलस प्लांटारम MTCC 25406’ (Lactobacillus plantarum MTCC 25406) नामक प्रोबायोटिक यानी मित्र बैक्टीरिया (Good Bacteria) का उपयोग किया गया है। यह वही बैक्टीरिया समूह है जो मानव पाचन तंत्र और प्राकृतिक फर्मेंटेशन प्रक्रियाओं में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। जब इस बैक्टीरिया से बने फॉर्मूलेशन को दूध में मिलाया जाता है, तो यह हानिकारक रोगाणुओं (Pathogens) और सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया की वृद्धि को प्राकृतिक रूप से रोक देता है, जिससे खाद्य सुरक्षा मानकों में भारी सुधार आता है।
पनीर की गुणवत्ता, स्वाद और टेक्सचर पर नहीं पड़ेगा कोई फर्क
आमतौर पर जब किसी खाद्य पदार्थ की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए रसायनों या अत्यधिक तापमान का इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका स्वाभाविक स्वाद या बनावट प्रभावित हो जाती है। कई बार पनीर सख्त हो जाता है या उसमें रबड़ जैसा अहसास होने लगता है।
हालांकि, ICAR-NDRI की इस शोध में प्रयोगशाला परीक्षणों (Lab Testing) के दौरान यह साबित हुआ है कि AMCF तकनीक का उपयोग करने से:
- पनीर का स्पंजी अहसास और कोमलता (Softness) बरकरार रहती है।
- इसमें प्राकृतिक मिठास और खुशबू बनी रहती है।
- नमी की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे पकाने के दौरान यह टूटता नहीं है।
छोटे डेयरी उद्यमियों और पशुपालकों के लिए ‘वरदान’
भारत में असंगठित डेयरी क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा है। गांव और कस्बों में चलने वाली छोटी डेयरियों या एग्री-स्टार्टअप्स के पास महंगे कोल्ड-चैन इंफ्रास्ट्रक्चर (Refrigerated Transport) और एडवांस पैकेजिंग सिस्टम की कमी होती है।
ऐसे में गर्मी या नमी के दिनों में पनीर का स्टॉक खराब होने से छोटे कारोबारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता था। NDRI की यह नई तकनीक विशेष रूप से ऐसे ही मध्यम व छोटे डेयरी उद्यमियों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। अब वे बिना किसी भारी-भरकम पूंजी निवेश के, सिर्फ इस नए फॉर्मूलेशन को अपनाकर अपने उत्पाद को दूर-दराज के बाजारों तक सुरक्षित पहुंचा सकेंगे।
भारतीय डेयरी अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए क्यों है यह खास?
भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय का लगातार यह प्रयास रहा है कि केवल कच्चे दूध की बिक्री पर निर्भर रहने के बजाय, मूल्य संवर्धन (Value Addition) यानी दूध से खोया, पनीर, मक्खन और छाछ जैसे उत्पाद बनाकर किसानों की आय दोगुनी की जाए।
इस तकनीक के दूरगामी आर्थिक और सामाजिक लाभ:
- उत्पाद अपव्यय में कमी: आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के दौरान हजारों टन पनीर के कचरे में बदलने की समस्या समाप्त होगी।
- लागत में बचत: बार-बार नया स्टॉक तैयार करने और जल्दी बेचने के दबाव से मुक्ति मिलेगी, जिससे परिवहन व भंडारण लागत घटेगी।
- किसानों की आय में बढ़ोतरी: जब डेयरी उद्यमियों का नुकसान कम होगा और मांग बढ़ेगी, तो पशुपालक किसानों को कच्चे दूध का बेहतर मूल्य (FAT/SNF रेट) मिल सकेगा।
- निर्यात (Export) की संभावनाएं: शेल्फ लाइफ 10-12 दिन बढ़ने से भारतीय पारंपरिक पनीर को निकटवर्ती देशों में निर्यात करना भी आसान हो जाएगा।
ICAR-NDRI करनाल द्वारा विकसित ‘AMCF तकनीक’ इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) का उपयोग करके हमारी दैनिक जीवन की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। यह तकनीक आने वाले दिनों में जब प्रयोगशालाओं से निकलकर व्यावसायिक स्तर पर डेयरी संयंत्रों और स्थानीय डेयरियों तक पहुंचेगी, तो निश्चित रूप से भारतीय डेयरी उद्योग को एक नई ऊंचाई और मजबूती प्रदान करेगी।




