आज के इस आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में जहां महानगरों की डाइनिंग टेबल पर सजा खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया और अनजानी बीमारियों का घर बनता जा रहा है, वहीं देश के ग्रामीण अंचलों को पुनर्जीवित करने और शुद्ध भोजन की अलख जगाने के लिए एक बड़ी वैचारिक क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के सलोन क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध ‘शुद्धग्राम ऑर्गेनिक फार्म’ पर रविवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “वाइब्रेंट विलेज 2026” का भव्य और अत्यंत सफल आयोजन किया गया। ‘श्री शुद्ध देसी’ और ‘शुद्धग्राम ऑर्गेनिक’ संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम का नजारा बेहद भावुक और आंखें खोलने वाला था। एक तरफ जहां चमचमाती गाड़ियों से उतरे दिल्ली-एनसीआर के बड़े-बड़े परिवारों के लोग थे, वहीं दूसरी तरफ पसीने से तरबतर मिट्टी से जुड़े हमारे असली हीरो यानी किसान भाई। दोनों जब एक ही चौपाल पर बैठे, तो शहरों और गांवों के बीच की दूरी पल भर में मिट गई। इस मिलन का सिर्फ एक ही मकसद था— भोजन में दोबारा वही पुरानापन, शुद्धता और ईमानदारी लौटाना जो रसायनों की वजह से कहीं खो चुकी है।
कृषि क्षेत्र के दिग्गजों और ‘ख़बर किसान की’ का मिला मजबूत साथ
इस पूरे अभियान को जमीन पर उतारने और इसका खाका तैयार करने का बीड़ा शुद्धग्राम ऑर्गेनिक के दूरदर्शी संस्थापक गौरव एम. त्यागी, श्री शुद्ध देसी की संस्थापिका ज्योति त्यागी और सह-संस्थापक विवेक त्यागी ने उठाया था। इस मुहिम को राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाने के लिए देश के कई जाने-माने युवा कृषि उद्यमी, स्टार्टअप्स और सोशल मीडिया पर किसानों की आवाज बुलंद करने वाले चेहरे भी आयोजक के रूप में साथ आए।
इनमें मुख्य रूप से ‘रवि ज़ोन फार्मिंग लीडर’ के प्रणेता रवि त्यागी व रमन त्यागी, ‘सात्विक फूड्स’ के शांतनु अत्रिश, ‘वाक्षी ऑर्गेनिक्स’ के वरुण सिंगला, ‘पृथ्वी रूह’ संस्था से अंशिका शर्मा, ‘सौंधी सुगंध’ की टीम और ‘वनव्य कंसल्टिंग’ के रणनीतिकार स्वप्निल पांडे शामिल रहे। विशेष बात यह रही कि देश के कोने-कोने तक किसानों के हक की बात पहुंचाने वाले लोकप्रिय कृषि मीडिया मंच ‘ख़बर किसान की’ (Khabar Kisan Ki) के संस्थापक अंकित शर्मा भी इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में विशेष रूप से मौजूद रहे। अंकित शर्मा ने वहां लगे छोटे-छोटे स्टॉल्स पर जाकर ग्रामीण महिलाओं, युवा कृषि-स्टार्टअप्स के संचालकों और किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया और उनके जमीनी अनुभवों व हौसले को सराहा।
लाइव फार्म टूर: जब बच्चों ने पहली बार मोबाइल छोड़कर मिट्टी को छुआ
“वाइब्रेंट विलेज 2026” की सबसे अनूठी और व्यावहारिक विशेषता इसका ‘लाइव फार्म विज़िट’ सत्र रहा। नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद और गुड़गांव की कंक्रीट की दुनिया और फ्लैटों में रहने वाले बच्चों और उनके माता-पिता ने जब पहली बार इस हरे-भरे खेत में कदम रखा, तो मिट्टी की सोंधी महक ने उनका दिल जीत लिया। यहाँ आए परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से दिखाया गया कि कैसे बिना किसी रासायनिक खाद (जैसे यूरिया या डीएपी) और हानिकारक कीटनाशकों के, पूर्णतः प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित ‘जीवामृत’ और ‘घनजीवामृत’ के सहारे जैविक फसल प्रबंधन किया जाता है और फसलें लहलहा सकती हैं।
खेत में बीज बोने से लेकर, फसल की कटाई, उसे ओखली-मशीन में पारंपरिक तरीके से कूटने-पीसने (प्रोसेसिंग), कड़े गुणवत्ता नियंत्रण और अंततः रसोई की थाली तक पहुँचने की पूरी पारदर्शी प्रक्रिया को देखकर कई उपभोक्ता भावुक हो गए। नोएडा से आए एक परिवार ने कहा, “हम बाजार से जो ‘ऑर्गेनिक‘ का ठप्पा लगा डिब्बा खरीदते हैं, उसका सच आज यहाँ समझ आया। असली ऑर्गेनिक कोई स्टिकर नहीं, बल्कि इस किसान की ईमानदारी और उसके माथे का पसीना है।“
चौपाल पर खुली ‘फूड लेबल’ के धोखे की पोल, बिचौलियों से मिली मुक्ति
दोपहर के वक्त जब पेड़ की छांव में पारंपरिक चौपाल सजी, तो चर्चा का विषय बेहद गंभीर और जागरूक करने वाला था। इस उच्चस्तरीय संगोष्ठी में प्राकृतिक खेती के अर्थशास्त्र, शुद्ध भोजन की समाज में अनिवार्यता और बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद सामानों के पीछे लिखे भ्रामक ‘फूड लेबल’ की तकनीकी समझ पर खुलकर बात हुई। विशेषज्ञों ने लाइव उदाहरण देकर बताया कि किस तरह ‘नेचुरल’ और ‘100% प्योर’ लिखकर बड़ी कंपनियां ग्राहकों की आंखों में धूल झोंक रही हैं और एक जागरूक उपभोक्ता बनकर ही इससे बचा जा सकता है।
इस अवसर पर सबसे खास बात यह रही कि यहाँ कोई बिचौलिया, दलाल या बड़ा व्यापारी नहीं था। बुंदेलखंड, पश्चिमी यूपी और विभिन्न ग्रामीण इलाकों से आए किसान खुद अपनी फसलों से तैयार शुद्ध सरसों का तेल, हाथ से कुटा अनाज, ए-2 बिलोना घी, खड़े मसाले और कबीलाई उत्पाद बेच रहे थे। शहरों से आए लोगों ने भी बिना कोई मोल-भाव किए सीधे उत्पादकों से दिल खोलकर शुद्ध सामग्री की खरीदारी की।
आयोजकों के बोल, जो सीधे दिलों को छू गए
मंच से जब मुख्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी, तो उनकी बातें वहां मौजूद हर एक व्यक्ति के दिल में उतर गईं:
- गौरव एम. त्यागी (संस्थापक, शुद्धग्राम ऑर्गेनिक) ने कहा: “जब तक शहर की रसोई और गांव का खेत आपस में सीधे नहीं जुड़ेंगे, तब तक देश की सेहत नहीं सुधरेगी। यह कोई मंडी या बाजार नहीं है, यह शहर और गांव के बीच टूट चुके भरोसे और पारदर्शिता को दोबारा जोड़ने का एक पारिवारिक पुल है।“
- ज्योति त्यागी (संस्थापिका, श्री शुद्ध देसी) ने सचेत करते हुए कहा: “हॉस्पिटलों में लगी लंबी कतारें और आज की जीवनशैली जनित बीमारियां इस बात का सुबूत हैं कि हमारा खान–पान कितना जहरीला हो चुका है। अगर अपनी अगली पीढ़ी को बचाना है, तो हमें पैकेट के धोखे को छोड़कर वापस इन सीधे–साधे किसानों और अपनी मिट्टी की तरफ लौटना ही होगा।“
- विवेक त्यागी (सह-संस्थापक) ने अपना विजन साझा किया: “हम गांवों को सिर्फ अनाज उगाने वाली कोई फैक्ट्री या मशीन नहीं बनाना चाहते। हमारा सपना है कि हमारे गांव इतने जीवंत और आत्मनिर्भर हों कि वहां के नौजवानों को पेट भरने के लिए शहरों की तरफ न भागना पड़े। जब किसान, उपभोक्ता और स्टार्टअप एक साथ आएंगे, तभी आत्मनिर्भर गाँव का सपना सच होगा।“
भविष्य की रणनीति: अब पूरे देश में गूंजेगी ‘वाइब्रेंट विलेज’ की गूंज
शाम होते-होते इस अनूठे उत्सव का समापन तो हुआ, लेकिन वहां मौजूद सैकड़ों गणमान्य नागरिकों, डॉक्टरों, पर्यावरणप्रेमियों और आम उपभोक्ताओं के चेहरे पर एक संतुष्टि की चमक और नई सोच थी। प्रतिभागियों का स्पष्ट मत था कि इस प्रकार के आयोजन शहरों और गांवों के बीच के फासले को पाटते हैं।
कार्यक्रम की इस अपार और अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए आयोजक मंडल ने भविष्य की रूपरेखा साझा करते हुए एलान किया कि “वाइब्रेंट विलेज” का यह कारवां यहीं नहीं रुकेगा। आने वाले समय में हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे विभिन्न राज्यों के गांवों में भी चरणबद्ध तरीके से ऐसे ही किसान-उपभोक्ता मिलन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि शुद्ध भोजन, आत्मनिर्भर किसान और समृद्ध भारत के इस महा-अभियान को एक अखिल भारतीय जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके।




