बरेली (उत्तर प्रदेश)। देश के अग्रणी एफएमसीजी (FMCG) समूहों में से एक, बीएल एग्रो (BL Agro Group) ने भारत के डेयरी और पशुधन क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए एक ऐतिहासिक योजना की घोषणा की है। कंपनी अपनी बायोटेक सहायक इकाई ‘लीड्स जेनेटिक्स’ (Leads Genetics) में 1,500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पूंजी का निवेश करने जा रही है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य उन्नत आनुवंशिकी (Advanced Genetics) और आधुनिक प्रजनन तकनीकों को एकीकृत करके एक 360-डिग्री सर्कुलर डेयरी इकोसिस्टम का निर्माण करना है। उत्तर प्रदेश के बरेली में आयोजित दो दिवसीय ‘कैटल जीनोमिक्स समिट 2026’ के दौरान यह घोषणा की गई।
कंपनी द्वारा विकसित की जा रही जेनेटिकली चयनित गायों की नई नस्ल से प्रति गाय प्रतिदिन 40 से 60 लीटर तक उच्च गुणवत्ता वाला दूध मिलने की उम्मीद है। बीएल एग्रो मॉडल को उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में भी लागू करने के लिए राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रहा है।
बरेली एक्सीलेंस सेंटर में 2027 तक प्रति माह बनेंगे 15,000 एम्ब्रियो
लीड्स जेनेटिक्स के बरेली स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Centre of Excellence) में पशु आनुवंशिकी के विकास के लिए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इस निवेश के माध्यम से एक इन-हाउस ब्रीड इम्प्रूवमेंट फार्म, आईवीएफ-ईटी (IVF-ET) लैब, मल्टीपल ओवुलेशन एम्ब्रियो ट्रांसफर (MOET) सुविधा, पैथोलॉजी और जीनोमिक्स प्रयोगशालाओं की स्थापना की जाएगी।
कंपनी का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 के अंत तक प्रति माह 15,000 उच्च नस्ल के एम्ब्रियो (भ्रूण) का उत्पादन शुरू कर दिया जाए। इससे न केवल देशी गायों की आनुवंशिक क्षमता में सुधार होगा, बल्कि पूरे देश में उच्च उत्पादकता वाली गायों की उपलब्धता तेजी से बढ़ सकेगी।
कैटल जीनोमिक्स समिट 2026: दिग्गजों का लगा जमावड़ा
बरेली में आयोजित यह दो दिवसीय शिखर सम्मेलन किसी कॉरपोरेट संस्थान द्वारा अपनी तरह का पहला वैश्विक आयोजन था। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिकों, पशु वैज्ञानिकों, जीनोमिक्स विशेषज्ञों, ब्रीडर्स और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह तथा उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र द्वारा आधुनिक जेनेटिक्स और रिसर्च में इतना बड़ा निवेश भारत के पशुधन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश होने के बावजूद प्रति पशु दूध उत्पादकता के मामले में पीछे रहा है। उन्होंने कहा कि लीड्स जेनेटिक्स द्वारा स्वदेशी स्तर पर एलीट बुल (सर्वश्रेष्ठ सांड), भ्रूण और सेक्स-सॉर्टेड सीमन (Sexed Semen) का निर्माण करने से विदेशों से जर्मप्लाज्म आयात करने की निर्भरता समाप्त होगी।
ब्राजील-भारत साझेदारी: देश की पहली ‘जेबू जीनोमिक चिप’ और न्यू-जेन सीक्वेंसिंग
ब्रासीलिया में हुए ऐतिहासिक भारत-ब्राजील मवेशी आनुवंशिकी समझौते के बाद, इस समिट के दौरान देश की पहली ‘Zebu-optimised bovine SNP Chip’ का अनावरण किया गया। इसके साथ ही ‘Illumina NovaSeq X’ प्लेटफॉर्म पर नेक्स्ट-जनरेशन जीनोम सीक्वेंसिंग का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।
जीनोमिक चिप तकनीक के माध्यम से किसी भी पशु के डीएनए (DNA) का हजारों जेनेटिक मार्कर्स पर विश्लेषण किया जा सकता है। पारंपरिक प्रजनन विधियों में जहां एक नस्ल को सुधारने में दशकों लग जाते थे, वहीं इस तकनीक से बछड़े या बछड़ी के जन्म लेते ही उसके दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और गर्मी सहन करने की क्षमता का सटीक आंकलन किया जा सकता है।

360-डिग्री मॉडल से पशुपालकों की बदलेगी किस्मत
बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने जोर देकर कहा कि इस पूरे 360-डिग्री मॉडल के केंद्र में देश का किसान और पशुपालक है। उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली गायों के माध्यम से किसानों की दैनिक दूध बिक्री से होने वाली आय में कई गुना बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग तकनीकों और विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
लीड्स जेनेटिक्स के सह-संस्थापक डॉ. आशीष दुबे और ऑपरेशंस के उपाध्यक्ष डॉ. एस.के. अग्रवाल ने बताया कि समिट के दौरान आनुवंशिक रूप से चुनी गई एलीट गीर (Gir) गायों के बछड़ों के लाइव जन्म का प्रदर्शन किया गया, जो भारतीय स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
पर्यावरण संरक्षण और मीथेन उत्सर्जन में कमी
आधुनिक जेनेटिक रिसर्च का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के अनुकूल डेयरी फार्मिंग के रूप में सामने आएगा। यूपी के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार, जब प्रति पशु दूध उत्पादकता (Per-animal productivity) में सुधार होगा, तो प्रति लीटर दूध उत्पादन पर होने वाले मीथेन गैस (Methane Emission) के उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। यह कदम भारत के नेट-जीरो और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पूरा करने में भी मददगार साबित होगा।
बीएल एग्रो और लीड्स जेनेटिक्स की यह 1,500 करोड़ रुपये की पहल न केवल भारत को विदेशी जर्मप्लाज्म और सीमन आयात से मुक्ति दिलाएगी, बल्कि गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी स्वदेशी भारतीय नस्लों को दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी और उच्च उत्पादकता वाली नस्लों में बदलेगी। 2027 तक प्रति माह 15,000 भ्रूण उत्पादन और जीनोमिक चयन की यह तकनीक भारतीय डेयरी उद्योग के लिए एक गेम–चेंजर साबित होने जा रही है।





