देश की राजधानी दिल्ली में गरीबों और गैर-राशन कार्ड धारकों के लिए आवंटित होने वाले खाद्यान्न की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली की सत्ताधारी सरकार और उसके खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के चावल आवंटन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली की योजना बनाने का सीधा आरोप जड़ा है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से बेहद सस्ते दामों पर मिलने वाले चावल को खुले बाजार में प्राइवेट फर्मों को दोगुनी कीमत पर बेचकर लगभग ₹11,000 करोड़ की दलाली और कुल ₹22,000 करोड़ के वित्तीय हेरफेर की रूपरेखा तैयार की गई थी। दूसरी ओर, दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विपक्षी नेताओं को कानूनी कार्रवाई और मानहानि के मुकदमे की सख्त चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला? ‘आप’ का ₹22,000 करोड़ के कथित घोटाले का दावा
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विभागीय कागजात और पत्राचार सार्वजनिक करते हुए गंभीर सवाल उठाए।
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया का ढांचा इस प्रकार तैयार किया गया था:
- FCI से सस्ती खरीद: केंद्र सरकार की एक विशेष जन-कल्याणकारी योजना के तहत राज्यों को गरीबों के लिए प्रति किग्रा मात्र ₹23 की दर से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत दिल्ली सरकार को प्रति सप्ताह 31,000 मीट्रिक टन चावल अगले तीन वर्षों तक खरीदना था।
- गरीबों के बजाय कमर्शियल रूट: आरोपों के मुताबिक, इस भारी-भरकम खाद्यान्न कोटा को दिल्ली के जरूरतमंदों में बांटने के बजाय एक सोची-समझी रणनीति के तहत अन्य राज्यों की संस्थाओं के माध्यम से डाइवर्ट करने का ताना-बाना बुना गया।
- दोगुनी कीमत पर खुले बाजार में बिक्री: आरोप है कि इस सब्सिडी वाले चावल को हरियाणा की एक निजी व्यापारिक इकाई को ₹46 प्रति किग्रा के हिसाब से बेचने की योजना थी। इस पूरी प्रक्रिया में ₹23 प्रति किग्रा के अंतर के हिसाब से 3 वर्षों में लगभग ₹11,000 करोड़ की अवैध दलाली अर्जित की जानी थी।
असम कॉरपोरेशन की एंट्री और विभागीय पत्राचार का सच
विपक्ष द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, इस विवादित आवंटन की कड़ियां असम के एक सरकारी निकाय (कॉरपोरेशन) से जुड़ती हैं।
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि 7 जनवरी 2026 को असम के उक्त कॉरपोरेशन ने दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को एक पत्र प्रेषित किया था। पत्र में उल्लेख किया गया था कि केंद्र सरकार की सब्सिडी वाली खाद्यान्न योजना के तहत उपलब्ध चावल को वह कॉरपोरेशन प्राप्त करेगा और उसे बिना राशन कार्ड वाले गरीब नागरिकों के बीच वितरित करेगा। इसके लगभग चार महीने बाद, 8 अप्रैल 2026 को यह पत्राचार विचारार्थ खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उच्च अधिकारियों को प्रेषित किया गया।
इसके बाद विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय खाद्य निगम (FCI) को पत्र लिखकर असम के कॉरपोरेशन के पक्ष में खाद्यान्न जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। ‘आप’ नेताओं का आरोप है कि इस असम कॉरपोरेशन के पीछे वास्तव में हरियाणा की एक निजी व्यावसायिक फर्म थी, जिसे यह चावल दोगुने दाम में बेचा जाना तय हुआ था।
CVC की एंट्री और अधिकारी पर गाज: ‘आप’ की बड़ी मांग
जब इस संदिग्ध लेन-देन की शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) तक पहुंची, तो प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। CVC द्वारा प्राथमिक जांच के बाद मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार को पत्र भेजा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा को उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया।
हालांकि, आम आदमी पार्टी ने अधिकारी के निलंबन को महज ‘बलि का बकरा’ बनाने की कार्रवाई करार दिया है। सौरभ भारद्वाज और संजीव झा ने स्पष्ट किया कि इतने बड़े स्तर के खाद्यान्न आवंटन और अंतर-राज्यीय सौदों का फैसला किसी अकेले प्रशासनिक अधिकारी का नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण में संबंधित मंत्रालय और शीर्ष राजनीतिक लीडरशिप की भूमिका की निष्पक्ष एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का तीखा पलटवार: ‘आरोप बेबुनियाद, मांगें माफी’
विपक्ष के इन हमलों और तीखे आरोपों के बाद दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेताओं के दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत, भ्रामक और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
- छवि धूमिल करने का प्रयास: विपक्षी दल जनता का ध्यान भटकाने के लिए लगातार बेबुनियाद आरोप लगा रहा है और उनकी व्यक्तिगत व राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचाने का सुनियोजित अभियान चला रहा है।
- 24 घंटे का अल्टीमेटम: उन्होंने सौरभ भारद्वाज और संजीव झा को अपने आरोप वापस लेने और सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने के लिए 24 घंटे का समय दिया है।
- कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: सिरसा ने स्पष्ट किया कि यदि निश्चित समय सीमा के भीतर लिखित माफी नहीं मांगी गई, तो वे दोनों नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) और अन्य कानूनी धाराओं के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
दिल्ली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और एफसीआई के खाद्यान्न आवंटन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब महज एक राजनीतिक बयानबाजी न रहकर प्रशासनिक जांच का बड़ा विषय बन चुका है। एक तरफ जहां सतर्कता आयोग की जांच के बाद गाज अधिकारियों पर गिर चुकी है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने राजधानी की सियासत को गरमा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले की गहराई से जांच होती है या यह विवाद अदालती चौखट तक सिमट कर रह जाता है।




