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महिंद्रा ने उतारी पराली जलाए बिना बुवाई करने वाली क्रांतिकारी मशीन, जानिए खूबियां

Mahindra MaxSeeder पराली की समस्या से देगा छुटकारा!

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
October 13, 2026
in खेती-किसानी
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भारत और दुनिया की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने देश के कृषि क्षेत्र में तकनीक और पर्यावरण संरक्षण का एक नया अध्याय शुरू किया है। कंपनी ने कनाडाई कंपनी ‘क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज’ से लाइसेंस प्राप्त कर विकसित की गई अपनी बहुप्रतीक्षित प्रिसीजन ‘जीरो-टिल’ मल्टी-क्रॉप सीडिंग मशीन ‘मैक्ससीडर’ (MaxSeeder) के कमर्शियल प्रोडक्शन और सप्लाई का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित महिंद्रा के अत्याधुनिक कृषि मशीनरी प्लांट में तैयार हो रही यह मशीन भारतीय किसानों को पराली जलाए बिना सीधे खेत में बुवाई करने का एक बेहद कारगर, वैज्ञानिक और सस्ता विकल्प प्रदान करती है।

पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में धान की कटाई के बाद पराली प्रबंधन एक विकट समस्या बन जाता है, जहाँ समय की कमी के कारण किसान खेत में आग लगाने पर मजबूर होते हैं। महिंद्रा की यह नई मैक्ससीडर मशीन बिना खेत जोते और बिना पराली हटाए या जलाए, अवशेषों के बीच सीधे धान, गेहूं, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलों की सटीक बुवाई करने में सक्षम है। यह तकनीक न केवल पर्यावरण को बचाएगी बल्कि किसानों की खेती की लागत घटाकर उनकी जेब को भी मजबूत करेगी।

कनाडा की पेटेंट तकनीक और महिंद्रा के विनिर्माण का अनूठा संगम

महिंद्रा और कनाडा की क्लीन सीड टेक्नोलॉजीज के बीच हुई यह रणनीतिक साझेदारी वैश्विक स्तर पर टिकाऊ कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। क्लीन सीड की विश्वप्रसिद्ध पेटेंटेड प्रिसीजन सीडिंग टेक्नोलॉजी को महिंद्रा ने अपनी वृहद निर्माण क्षमताओं के साथ मिलाकर भारतीय खेतों और मौसम के अनुकूल ढाला है।

कंपनी के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस के अध्यक्ष विजय नाकरा के अनुसार, मैक्ससीडर का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना किसानों की पैदावार और मुनाफा बढ़ाना है। पंजाब और हरियाणा के खेतों में किए गए कड़े मैदानी परीक्षणों (Field Trials) में इस मशीन ने भारी मात्रा में मौजूद धान के अवशेषों के बीच मिट्टी को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए बेहद सटीकता से बीज बोकर अपनी क्षमता साबित की है। प्रथम चरण में इसे पंजाब और हरियाणा के डीलरशिप नेटवर्क के जरिए बाजारों में उतारा जाएगा, जिसके बाद इसे देश के अन्य हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा।

35 HP के छोटे ट्रैक्टरों पर भी आसानी से चलेगी यह मशीन

अमूमन देखा जाता है कि ज़ीरो-टिलेज़ या पराली प्रबंधन से जुड़ी भारी मशीनरी को खींचने के लिए किसानों को 50 से 60 हॉर्सपावर या उससे अधिक क्षमता वाले महंगे और बड़े ट्रैक्टरों की जरूरत पड़ती है। छोटे और सीमांत किसानों के पास ऐसे भारी ट्रैक्टर न होने के कारण वे आधुनिक मशीनों का लाभ उठाने से वंचित रह जाते थे।

महिंद्रा मैक्ससीडर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बेहद स्मार्ट तरीके से डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह महज 35 हॉर्सपावर (HP) या उससे अधिक क्षमता वाले साधारण ट्रैक्टरों के साथ भी पूरी दक्षता से काम कर सकती है। इस वजह से किसानों को नया या बड़ा ट्रैक्टर खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और कम लागत में ही आधुनिक प्रिसीजन फार्मिंग की तकनीक हर छोटे-बड़े किसान तक आसानी से पहुंच सकेगी।

स्मार्ट ईसीयू (ECU) और मोबाइल ऐप से होगी खाद-बीज की सटीक आपूर्ति

तकनीकी रूप से मैक्ससीडर को बेहद अत्याधुनिक और डिजिटल फीचर्स से लैस किया गया है। मशीन में एक इंटेलिजेंट इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) दी गई है, जो सीधे ऑपरेटर के स्मार्टफोन में मौजूद एक मोबाइल ऐप से कनेक्ट हो जाती है। किसान अपने मोबाइल के माध्यम से खेत की जरूरत के अनुसार बीज, डीएपी और यूरिया की मात्रा को बिल्कुल सटीक रूप से नियंत्रित कर सकते हैं।

इसके अलावा, इसमें लगी विशेष मल्टीफंक्शनल टाइन यूरिया और अन्य उर्वरकों को बीज की लाइन से लगभग डेढ़ इंच गहराई में नीचे डालती है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि खाद सीधे पौधों की जड़ों की गहराई तक पहुंचती है और हवा या सतह पर बहकर बर्बाद नहीं होती। इससे पोषक तत्वों की बर्बादी रुकती है, फसल की शुरुआती ग्रोथ मजबूत होती है और किसान का खाद पर होने वाला फालतू खर्च काफी हद तक बच जाता है।

एक मशीन से कई फसलों की बुवाई, समय और ईंधन की भारी बचत

पारंपरिक खेती में किसानों को बुवाई से पहले खेत की जोताई, पाटा लगाने और समतल करने के लिए ट्रैक्टर को कई बार खेत में चलाना पड़ता है, जिससे डीजल, समय और श्रम की बहुत अधिक खपत होती है। मैक्ससीडर की ज़ीरो-टिल तकनीक के कारण खेत की बार-बार तैयारी करने की मजबूरी खत्म हो जाती है, जिससे बुवाई का काम बहुत तेजी से निपटता है।

इस मशीन में पांच स्वतंत्र प्लांटिंग रो यूनिट्स दी गई हैं, जिन्हें अलग-अलग फसलों के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है। किसान कतारों के बीच की दूरी और सीड मीटरिंग को अपनी आवश्यकतानुसार बदल सकते हैं। चाहे अनाज की फसलें हों, दलहन हो, मक्का हो या फिर कपास—यह एक ही मशीन अलग-अलग फसल चक्रों में पूरे साल इस्तेमाल की जा सकती है।

पर्यावरण संरक्षण और खेती की लागत में सुधार की दिशा में बड़ा कदम

क्लीन सीड कैपिटल ग्रुप के चेयरमैन एवं सीईओ ग्रेम लेम्प्रियर ने महिंद्रा के पीथमपुर प्लांट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह तकनीक दुनिया भर के किसानों को टिकाऊ बुवाई समाधान देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। भू-जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने में यह मशीन बेहद असरदार साबित होगी।

महिंद्रा की मैक्ससीडर केवल एक कृषि उपकरण नहीं है, बल्कि यह पराली संकट से जूझ रहे भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक स्थायी संजीवनी है। कम हॉर्सपावर के ट्रैक्टर पर चलने की सहूलियत, मोबाइल ऐप से खाद–बीज का सटीक नियंत्रण और समय–ईंधन की बचत के चलते यह मशीन आने वाले दिनों में देश के किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Tags: Agriculture MachineMahindraMahindra Max Seedersowing machineStubble burningstubble freezero till seeding
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