सतना (मध्य प्रदेश): कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के समावेश और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक बेहद खास और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली है। ‘किसानी ऊर्जा’ (Kisani Urjaa) कंपनी द्वारा सतना के ग्राम सितपूरा और बरेठिया में ‘किसान संगोष्ठी समृद्धि’ का भव्य आयोजन किया गया।
इस पूरे कार्यक्रम का मूल मंत्र “खेती वही, तरीके नए, कमाई बेहतर” रहा। संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को पराली (फसल अवशेष) जलाने से रोकने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करने और आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से खेती की लागत कम करके शुद्ध मुनाफा बढ़ाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
1. पराली प्रबंधन पर विशेष कार्यशाला: पराली अब समस्या नहीं, समृद्ध संसाधन
इस कार्यक्रम का एक मुख्य और सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु पराली प्रबंधन था। आमतौर पर रबी और खरीफ फसलों के कटाई सत्र के दौरान पराली जलाना एक गंभीर चुनौती बन जाता है, जिससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है बल्कि मिट्टी के जैविक मित्र कीट और पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं।
‘किसानी ऊर्जा’ के एग्रोनॉमिस्ट्स (कृषि वैज्ञानिकों) और विषय विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि पराली को जलाने के बजाय इसे एक ‘उपयोगी संसाधन’ में कैसे बदला जाए।
पराली प्रबंधन के प्रमुख लाभ:
- जैविक खाद में परिवर्तन: आधुनिक तकनीकों और डीकंपोजर की मदद से पराली को खेत में ही सड़ाकर जैविक खाद का रूप दिया जा सकता है।
- मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार: खेत में पराली मिलाने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों (Organic Matter) की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी की जल धारण क्षमता में इजाफा होता है।
- उर्वरक लागत में कमी: लगातार पराली प्रबंधन करने से रसायनों (डीएपी और यूरिया) पर होने वाला खर्च काफी हद तक घट जाता है।
2. ‘किसानी समृद्धि मॉडल फार्म’: खेत पर ही मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
इवेंट के दौरान केवल कागजी बातें या भाषण नहीं हुए, बल्कि किसानों को ‘किसानी समृद्धि मॉडल फार्म’ पर ले जाया गया। यहाँ कंपनी की एग्रोनॉमी टीम ने प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शन (Live Demonstration) करके दिखाया कि कैसे पारंपरिक खेती में थोड़ा सा तकनीकी बदलाव लाकर उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
मॉडल फार्म विजिट के दौरान किसानों को मुख्य रूप से तीन बातों पर प्रशिक्षित किया गया:
- कम लागत में बेहतर उत्पादन: सही बीज दर, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और सही समय पर रोग नियंत्रण से लागत में 15 से 20% तक की कमी लाई जा सकती है।
- आधुनिक कृषि उपकरण: पराली प्रबंधन और बुवाई के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का सही इस्तेमाल कैसे करें।
- मृदा स्वास्थ्य की देखभाल: मिट्टी की जांच और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग।
3. ‘मॉडल पुरुष किसान’ और ‘किसान दीदी’ की अनूठी मुहिम
गाँव-गाँव तक इस विचार और आधुनिक कृषि तकनीकों को पहुँचाने के लिए ‘किसानी ऊर्जा‘ ने इस क्षेत्र में एक ज़मीनी ढाँचा तैयार किया है। इसके तहत क्षेत्र में ‘मॉडल पुरुष किसान’ और ‘किसानी दीदी’ बनाए गए हैं।
ये ‘किसान दीदी’ और ‘मॉडल किसान’ घर-घर जाकर और खेतों पर व्यक्तिगत रूप से पहुँचकर स्थानीय किसानों को इस बदलाव से जोड़ रहे हैं।
आय में 20 से 25% तक की सीधी बढ़ोतरी:
कार्यशाला और आदर्श किसान खेत (Model Farm) कार्यक्रम से जुड़े स्थानीय किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ‘किसानी ऊर्जा’ द्वारा सुझाई गई तकनीकों और पराली प्रबंधन के तरीकों को अपनाने के बाद उनकी खेती की लागत में कमी आई है और शुद्ध आय में 20 से 25% तक की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
4. मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सुनहरा मौका: आज ही ‘किसानी ऊर्जा’ से जुड़ें
अगर आप मध्य प्रदेश के निवासी हैं या सतना जिले के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों (जैसे सितपूरा, बरेठिया या पड़ोसी गाँवों) में रहते हैं, तो यह पहल आपके लिए अपनी खेती की दिशा और दशा बदलने का एक बेहतरीन अवसर है।
आप भी ‘किसानी ऊर्जा’ की इस मुहिम का हिस्सा बनकर अपने साधारण खेत को एक ‘किसानी समृद्धि मॉडल फार्म’ में तब्दील कर सकते हैं।

‘किसानी ऊर्जा’ से जुड़ने के मुख्य फायदे:
- विशेषज्ञों द्वारा आपके खेत पर आकर तकनीकी मार्गदर्शन।
- पराली प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती का निःशुल्क व्यावहारिक प्रशिक्षण।
- खेती की लागत में कमी और फसल की गुणवत्ता में सुधार।
- ‘किसान दीदी’ और स्थानीय मॉडल किसानों का निरंतर सहयोग।
विशेषज्ञों का संदेश:
“उचित प्रबंधन और सही तकनीकी प्रशिक्षण से पर्यावरण की सुरक्षा भी होगी और किसान भाइयों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। खेती में नए तरीकों को अपनाकर ही हम समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।“
सतना के ग्राम सितपूरा और बरेठिया में आयोजित ‘किसान संगोष्ठी समृद्धि’ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब सही तकनीक, ज़मीनी प्रयास (‘किसान दीदी’) और सही नीयत एक साथ मिलती है, तो परिणाम सकारात्मक आते हैं। किसानी ऊर्जा का यह कदम न केवल पराली जलाने जैसे गंभीर मुद्दे का स्थायी समाधान दे रहा है, बल्कि किसानों की जेब में ज्यादा पैसा भी पहुँचा रहा है।
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