उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को तकनीक से जोड़ने की कोशिशें अब ज़मीन पर रंग लाने लगी हैं। डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड यानी ‘ई-केसीसी’ (e-KCC) के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने पूरे देश को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। महज़ आठ महीने के छोटे से समय में प्रदेश के एक लाख से अधिक किसान ई-केसीसी पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से कृषि ऋण के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। यह उपलब्धि हासिल करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने साबित कर दिया है कि जब सरकारी नीतियां और तकनीक एक साथ आते हैं, तो अंतिम पंक्ति में खड़े सीमांत किसान का जीवन कैसे बदल सकता है।
कर्नाटक और हरियाणा जैसे राज्यों को छोड़ा काफी पीछे
डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार में उत्तर प्रदेश ने जो रफ्तार पकड़ी है, उसके सामने देश के अन्य विकसित राज्य भी पीछे छूट गए हैं। राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों पर नज़र डालें तो डिजिटल केसीसी आवेदनों के मामले में लगभग 95 हजार आवेदनों के साथ कर्नाटक दूसरे पायदान पर है, जबकि करीब 42 हजार आवेदनों के साथ हरियाणा तीसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश ने एक लाख का आंकड़ा पार करके यह दर्शा दिया है कि यहाँ के छोटे और सीमांत किसान अब डिजिटल क्रांति को अपनाने में किसी से पीछे नहीं हैं।
इस पूरी व्यवस्था की शुरुआत इस साल फरवरी में हुई थी, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाबार्ड द्वारा संचालित इस डिजिटल केसीसी सुविधा का औपचारिक शुभारंभ किया था। शुरुआत के बाद से ही सहकारिता विभाग और बैंक तंत्र ने मिलकर इसे गांव-गांव तक पहुंचाने का काम किया, जिसके नतीजे आज सबके सामने हैं।
दलालों से मुक्ति और बैंक के चक्कर काटने से मिला छुटकारा
परंपरागत व्यवस्था में किसी भी साधारण किसान के लिए बैंक से कृषि ऋण यानी केसीसी बनवाना किसी चुनौती से कम नहीं होता था। किसानों को जमीन के कागजात, खसरा-खतौनी, पहचान पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की फाइलें बनाकर बार-बार बैंक की शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पूरी प्रक्रिया में हफ्तों का समय लग जाता था और कई बार दलालों के चक्कर में पड़कर किसानों का श्रम और पैसा दोनों बर्बाद होता था।
डिजिटल केसीसी ने इस पूरी पुरानी और जटिल व्यवस्था को बदल कर रख दिया है। अब किसानों को लोन की अर्जी देने के लिए किसी बैंक शाखा में जाने की मजबूरी नहीं है। किसान अपने मोबाइल ऐप या जन सेवा केंद्र के माध्यम से ई-केसीसी पोर्टल पर जाकर सीधा आवेदन कर रहे हैं। ज़मीन के रिकॉर्ड से लेकर पहचान के सत्यापन तक सब कुछ डिजिटल माध्यम से स्वतः पूरा हो जाता है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है और लोन स्वीकृत होने का समय भी घटकर बहुत कम रह गया है।
लघु और सीमांत किसानों के लिए बनी बड़ी संजीवनी
उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी करने वाली आबादी का बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों का है, जिनके पास एक या दो एकड़ से भी कम जोत की ज़मीन है। ऐसे किसानों के लिए बुवाई के समय खाद, बीज, सिंचाई और कीटनाशक खरीदने के लिए समय पर पैसे की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। अगर सही समय पर सस्ता संस्थागत ऋण न मिले, तो छोटे किसानों को गांव के साहूकारों और महाजनों के पास जाना पड़ता था, जहाँ उन्हें भारी ब्याज दरें चुकानी पड़ती थीं।
ई-केसीसी सुविधा ने इन छोटे किसानों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से सीधे जोड़ दिया है। समय पर और पारदर्शी तरीके से कम ब्याज दर वाला सरकारी कृषि ऋण मिलने से किसानों की खेती की लागत घटी है और साहूकारों के शोषण से मुक्ति मिली है। घर बैठे लोन आवेदन की सुविधा मिलने से किसानों के बहुमूल्य समय की बचत हो रही है, जिसे वे अपने खेतों की देखरेख में लगा रहे हैं।
डबल इंजन सरकार का डिजिटल कृषि विज़न
सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर का कहना है कि डिजिटल केसीसी का मूल उद्देश्य प्रदेश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाना और तकनीक के माध्यम से किसान के वित्तीय समावेशन को आसान बनाना है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार की नीतियां पूरी तरह से किसान-केंद्रित हैं। आठ महीनों के भीतर एक लाख से अधिक किसानों का ई-केसीसी के लिए आवेदन करना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्रदेश का ग्रामीण समाज डिजिटल बदलाव को खुले दिल से स्वीकार कर रहा है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आने वाले दिनों में इस व्यवस्था को और अधिक सुलभ और सरल बनाया जाएगा ताकि प्रदेश के दूर-दराज़ के गाँवों में बैठा किसान भी बिना किसी झंझट के अपनी खेती की ज़रूरतों के लिए लोन प्राप्त कर सके। कृषि क्षेत्र में आया यह डिजिटल बदलाव न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा, बल्कि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को भी मजबूती प्रदान करेगा।
भविष्य की राह और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
उत्तर प्रदेश में ई-केसीसी की यह सफलता सिर्फ एक योजना की सफलता नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में आ रहे उस बड़े आर्थिक बदलाव का संकेत है जहाँ तकनीक अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रही। आने वाले समय में जब यह मॉडल पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में और व्यापक रूप से फैलेगा, तो इससे एग्री-टेक स्टार्टअप्स, एग्रो-प्रोसेसिंग और ग्रामीण क्रेडिट फ्लो को अभूतपूर्व गति मिलेगी। बैंकों के लिए भी एनपीए (NPA) का जोखिम कम होगा क्योंकि डिजिटल सत्यापन के कारण गलत आवंटन की गुंजाइश खत्म हो जाती है। डिजिटल केसीसी के इस सफल मॉडल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाला समय डिजिटल खेती और सशक्त किसान का है।




