भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बार फिर देश के बड़े हिस्से के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है। जहां एक ओर लोग बढ़ती तपिश की तैयारी कर रहे थे, वहीं अब 23 मार्च से 26 मार्च के बीच प्रकृति का एक अलग ही रूप देखने को मिलने वाला है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक, लगभग 15 प्रदेशों में तेज गर्जना के साथ बारिश, ओलावृष्टि और धूल भरी आंधी का साया मंडरा रहा है। यह मौसमी बदलाव ऐसे समय में आया है जब खेतों में रबी की फसलें पककर तैयार हैं, जो किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रहा है।
क्यों बदल रहा है मौसम? वैज्ञानिकों का विश्लेषण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अचानक आए बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी एशिया और उत्तरी क्षेत्रों में सक्रिय एक शक्तिशाली ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) है। इस सिस्टम के प्रभाव से मैदानी इलाकों में हवा का दबाव कम हुआ है, जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है। इसका परिणाम यह होगा कि आने वाले 3-4 दिनों में पारा 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क सकता है। हालांकि ठंडक राहत देगी, लेकिन 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं तबाही का सबब बन सकती हैं।
उत्तर भारत: पहाड़ों से लेकर मैदानों तक अलर्ट
- उत्तर प्रदेश (यूपी): अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर और नोएडा समेत पश्चिमी यूपी के जिलों में 23 मार्च से ही तेज हवाओं का दौर शुरू हो जाएगा। असली असर 27 मार्च के आसपास दिखने की उम्मीद है, जब गरज-चमक के साथ छींटे पड़ सकते हैं।
- राजस्थान: मरुधरा में मौसम सबसे पहले पलटी मारेगा। जयपुर, बीकानेर और जैसलमेर जैसे रेतीले इलाकों में 30 से 40 किमी की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। यहां तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
- दिल्ली-NCR: देश की राजधानी में 23 मार्च को बादल छाए रहेंगे और तेज हवाएं चलेंगी। हालांकि भारी बारिश की उम्मीद कम है, लेकिन 25 मार्च के बाद उमस और गर्मी फिर से वापसी करेगी।
पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और ओलावृष्टि
- हिमाचल और उत्तराखंड: देवभूमि और हिमाचल के ऊंचे इलाकों में 23 से 26 मार्च के बीच भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में ओले गिरने की आशंका है। मनाली जैसे पर्यटन स्थलों पर न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे (-7 डिग्री) जा सकता है। चमोली और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
पूर्वी भारत: बिहार और बंगाल में तूफान का खतरा
बिहार में 24 मार्च से मौसम का मिजाज बिगड़ना शुरू होगा। पटना, गया और सिवान जैसे जिलों में आंधी के साथ बारिश का अलर्ट है। पूर्वोत्तर के राज्यों (असम, मेघालय) में बिजली गिरने की घटनाओं की चेतावनी दी गई है, जिससे जान-माल के नुकसान का खतरा बना रहता है।
दक्षिण और पश्चिम भारत की स्थिति
दक्षिण भारत के तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। वहीं महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और मध्य क्षेत्र में बेमौसम बारिश अंगूर और आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। इसके विपरीत, केरल और गोवा में उमस भरी गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा।
किसानों के लिए ‘खबर किसान की’ विशेष सलाह
यह मौसम फसलों के लिए ‘धीमा जहर’ साबित हो सकता है।
- कटाई में सावधानी: यदि आपकी फसल कट चुकी है, तो उसे सुरक्षित स्थानों या तिरपाल से ढककर रखें।
- कीटनाशकों का प्रयोग टालें: बारिश और तेज हवा के दौरान स्प्रे न करें, क्योंकि यह निष्प्रभावी रहेगा।
- मंडी की तैयारी: यदि फसल बेचने की योजना है, तो मौसम साफ होने का इंतज़ार करें।
- बागवानी: आम के बागों में बोर (फूल) को ओलावृष्टि से बचाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह लें।
मार्च का अंत अक्सर इस तरह के मौसमी उतार–चढ़ाव लेकर आता है। हालांकि यह सिस्टम कुछ दिनों में कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन इस दौरान बरती गई लापरवाही भारी पड़ सकती है। “खबर किसान की” सभी पाठकों और किसान भाइयों से अपील करता है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और सुरक्षित रहें।




