विकास और विरासत का संगम पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गुवाहाटी में शनिवार का दिन ऐतिहासिक रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने असम दौरे के दौरान लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (LGBIA) के नए टर्मिनल-2 का भव्य उद्घाटन किया। यह केवल एक कंक्रीट की इमारत नहीं है, बल्कि यह असम की जैव-विविधता और पारंपरिक शिल्प कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। लगभग 15,600 करोड़ रुपये की कुल विकास परियोजनाओं के अनावरण के बीच, यह ₹4,000 करोड़ का एयरपोर्ट टर्मिनल सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
बांस की नक्काशी और स्थानीय शिल्प का जादू इस नए टर्मिनल की सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण और डिजाइन है। इसे भारत का पहला ‘नेचर थीम’ आधारित एयरपोर्ट टर्मिनल कहा जा रहा है। इस भव्य ढांचे को तैयार करने के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों से प्राप्त लगभग 140 मीट्रिक टन स्थानीय बांस का उपयोग किया गया है। टर्मिनल का पूरा स्वरूप ‘बैम्बू ऑर्किड्स’ की थीम पर आधारित है। यहाँ आने वाले यात्रियों को असम के प्रसिद्ध ‘कोपौ फूल’ (फॉक्सटेल ऑर्किड) की आकृति वाले 57 खंभे दिखाई देंगे, जो स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना पेश करते हैं।
डिजाईन में असम की पहचान कहे जाने वाले ‘जापी’ (पारंपरिक टोपी) के मोटिफ, काजीरंगा के जंगलों से प्रेरित लैंडस्केप और प्रसिद्ध एक सींग वाले गैंडे के प्रतीकों का बेहद खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। यह टर्मिनल आधुनिकता और स्थानीय संस्कृति के बीच एक सेतु का काम करता है।
‘स्काई फॉरेस्ट’: हवाई अड्डे के भीतर जंगल का अनुभव गुवाहाटी के इस नए टर्मिनल में एक अनोखा प्रयोग किया गया है, जिसे ‘स्काई फॉरेस्ट’ नाम दिया गया है। यह एक ऐसा इनडोर फॉरेस्ट है जिसमें स्थानीय प्रजातियों के लगभग एक लाख पौधे लगाए गए हैं। जैसे ही कोई यात्री हवाई अड्डे से बाहर निकलेगा या प्रवेश करेगा, उसे एक घने जंगल के बीच से गुजरने का अहसास होगा। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि यात्रियों के यात्रा अनुभव को सुकूनदेह और यादगार भी बनाती है।
आधुनिक सुविधाएं और विशाल क्षमता तकनीकी और बुनियादी ढांचे की बात करें तो यह टर्मिनल लगभग 1.4 लाख वर्ग मीटर में फैला हुआ है। इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
- यात्री क्षमता: अब यह एयरपोर्ट सालाना 1.31 करोड़ (13.1 मिलियन) यात्रियों को संभालने में सक्षम है, जो पुराने टर्मिनल के मुकाबले कई गुना अधिक है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड: नए टर्मिनल के साथ ही रनवे, एयरफील्ड लाइटिंग सिस्टम, एप्रन और टैक्सीवे का भी विस्तार किया गया है।
- आर्थिक एकीकरण: यह टर्मिनल पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के बीच आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करेगा और व्यापार व पर्यटन के नए रास्ते खोलेगा।
नेतृत्व की प्रतिबद्धता और भविष्य का रोडमैप प्रधानमंत्री मोदी ने इस टर्मिनल की प्रशंसा करते हुए इसे पूर्वोत्तर के बुनियादी ढांचे के लिए एक ‘बड़ा बूस्ट’ बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी झलक साझा करते हुए लिखा कि बढ़ती क्षमता का सीधा अर्थ है—लोगों के लिए जीवन सुगम होना (Ease of Living) और कॉमर्स व टूरिज्म को नई गति मिलना।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस प्रोजेक्ट को ‘एडवांटेज असम 2.0’ की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में असम अब देश के प्रमुख ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में उभर रहा है। यह एयरपोर्ट टर्मिनल न केवल विमानों की आवाजाही का केंद्र होगा, बल्कि यह पूर्वोत्तर के विकास की नई उड़ान का प्रतीक बनेगा।
आपको बता दें कि, गुवाहाटी का यह नया टर्मिनल आने वाले समय में दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत के प्रवेश द्वार (Gateway) के रूप में कार्य करेगा। प्रकृति के सानिध्य और आधुनिक इंजीनियरिंग का यह मेल बताता है कि हम विकास की दौड़ में अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं। यह टर्मिनल असम की पहचान को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाएगा और यहाँ आने वाले पर्यटकों को असमिया संस्कृति की पहली झलक यहीं मिल जाएगी।





