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बीकानेर के वैज्ञानिकों ने ऊंट के खून से बनाया सांप के जहर का ‘अचूक’ तोड़!

रेगिस्तानी सांप 'बांडी' का जहर अब होगा बेअसर

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
December 28, 2025
in लेटेस्ट न्यूज, विज्ञान और तकनीक
Reading Time: 1 min
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राजस्थान के बीकानेर जिले से विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐसी क्रांतिकारी खबर आई है, जो आने वाले समय में हजारों लोगों की जान बचाने का आधार बनेगी। बीकानेर स्थित सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) और राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NRCC) के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से ऊंट के खून का उपयोग करके ‘एंटी-स्नेक वेनम’ (Anti-Snake Venom) विकसित किया है। यह दवा विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के सबसे घातक सांप ‘बांडी’ (Saw-scaled Viper) के जहर के खिलाफ प्रभावी पाई गई है। यह शोध न केवल स्वदेशी चिकित्सा तकनीक को मजबूती देगा, बल्कि सर्पदंश से होने वाली मृत्यु दर को भी न्यूनतम स्तर पर लाने में सहायक होगा।

15 वर्षों की कड़ी तपस्या और वैज्ञानिक शोध

इस एंटी-वेनम को तैयार करने का सफर आसान नहीं था। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज और एनआरसीसी की टीम पिछले करीब 15 वर्षों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान शोध की गति कुछ वर्षों के लिए थम गई थी, लेकिन 2023 से इस यूनिट ने फिर से सक्रिय होकर अपने लक्ष्य को हासिल किया।

मौजूदा समय में दुनियाभर में सांप के जहर की काट के लिए घोड़ों के खून का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक साल 1895 से चली आ रही है। लेकिन बीकानेर के वैज्ञानिकों ने ऊंट के खून में मौजूद विशेष एंटीबॉडीज (Antibodies) की क्षमता को पहचानते हुए यह नया प्रयोग किया है, जो घोड़ों के मुकाबले अधिक शक्तिशाली और स्थिर माना जा रहा है।

कैसे काम करती है यह ‘ऊंट वाली वैक्सीन’?

शोध के नोडल अधिकारी डॉ. संजय कोचर और विशेषज्ञ डॉ. पीडी तंवर के अनुसार, इस प्रक्रिया में सांप के जहर की एक नियंत्रित मात्रा ऊंट के शरीर में प्रविष्ट (Inject) कराई जाती है। इसके जवाब में ऊंट का प्रतिरोधी तंत्र (Immune System) बहुत ही शक्तिशाली एंटीबॉडीज का निर्माण करता है। इसके बाद ऊंट के शरीर से रक्त का नमूना लेकर उससे सीरम तैयार किया जाता है।

वैज्ञानिकों ने इस सीरम का परीक्षण चूहों पर किया, जिसके परिणाम उम्मीद से कहीं अधिक उत्साहजनक रहे। जहर के प्रभाव को खत्म करने में ऊंट का यह एंटी-वेनम पूरी तरह सफल रहा। अब इस शोध को अगले चरण यानी ‘ह्यूमन ट्रायल’ (इंसानों पर परीक्षण) के लिए ले जाने की तैयारी है। इसके लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), आईसीएमआर (ICMR) और ड्रग कंट्रोल विभाग जैसी राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

‘बांडी’ सांप: रेगिस्तान का सबसे बड़ा डर

पश्चिमी राजस्थान और भारत-पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में ‘बांडी’ सांप का बहुत अधिक आतंक है। यह सांप आकार में छोटा होता है लेकिन इसका जहर बहुत घातक होता है, जो सीधे इंसान के रक्त संचार तंत्र पर हमला करता है। एनआरसीसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एस.के. घोरेई ने बताया कि बांडी के काटने से ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली मौतें एक गंभीर चिंता का विषय रही हैं। नया एंटी-वेनम इसी प्रजाति के जहर को बेअसर करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिकों ने शोध के लिए बांडी सांपों को पकड़ने की विशेष अनुमति भी ली है, जिन्हें शोध के बाद सुरक्षित वापस जंगलों में छोड़ दिया जाता है।

भारत में सर्पदंश: एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के आंकड़े डराने वाले हैं। भारत में हर साल लगभग 50,000 लोग सांप के काटने की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। इनमें से अधिकांश मौतें ग्रामीण भारत में होती हैं, जहाँ किसान खेतों में काम करते समय अनजाने में सांपों का शिकार हो जाते हैं। जो लोग बच जाते हैं, उनमें से भी कई लोग जहर के प्रभाव के कारण शारीरिक रूप से अक्षम हो जाते हैं। बीकानेर के वैज्ञानिकों का यह आविष्कार उन हजारों किसानों और ग्रामीणों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा, जिन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता था।

बीकानेर का यह शोध केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहेगा। यदि ह्यूमन ट्रायल सफल रहता है, तो भारत सांप के जहर की दवा बनाने के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा। ऊंटों की विशिष्ट जैविक संरचना का उपयोग करके मानव जीवन को बचाना प्रकृति और विज्ञान के अद्भुत संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी कानूनी और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया जाएगा और यह ‘ऊंट आधारित एंटी–वेनम‘ देश के अस्पतालों में उपलब्ध होगा, ताकि भविष्य में कोई भी घर सर्पदंश के कारण अपना चिराग न खोए।

Tags: Anti-Snake VenomBandi SnakebikanerCamel BloodNRCCrajasthanSnake Venom
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