दिवाली का त्यौहार नजदीक आते ही देश भर में स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत मिले प्रोत्साहन के कारण, गाय के गोबर से बने दीये और सजावटी सामान इस साल बाज़ारों में धूम मचा रहे हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में, इन उत्पादों की मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है।
महिलाओं का नवाचार: सुगंध और डिज़ाइन
उत्तर प्रदेश के महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाएं इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रात-दिन जुटी हुई हैं। ये महिलाएं न सिर्फ पारंपरिक दीये बना रही हैं, बल्कि नए-नए डिज़ाइन के साथ सजावटी झालर, बंधनवार (डोर हैंगिंग) और मोर जैसी कलाकृतियाँ भी तैयार कर रही हैं।
इस साल का सबसे बड़ा नवाचार यह है कि महिलाओं ने इन दीयों में कपूर, तुलसी और लोबान जैसी प्राकृतिक खुशबूदार चीज़ों को मिलाना शुरू कर दिया है। इससे दीये जलने पर वातावरण में सकारात्मक और खुशनुमा महक फैलती है। बाज़ारों में ये इको-फ्रेंडली उत्पाद, डिज़ाइनर मोमबत्तियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
‘पृथ्विरूह’ की पहल और ग्राहकों का रुझान
देसी गाय के गोबर से बने इन अनोखे और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों ने ग्राहकों का ध्यान तेज़ी से आकर्षित किया है। ‘पृथ्विरूह’ कंपनी की संस्थापक अंशिका शर्मा ने बताया कि ग्राहकों के बीच दीयों के साथ-साथ भगवान गणेश, लक्ष्मी और कुबेर की गोबर से बनी मूर्तियों की मांग अभूतपूर्व है।
स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद ऑर्डर करने के लिए संपर्क करें – 6395218665, 8368216963
अंशिका शर्मा ने साझा किया कि बहुत से लोग गाय के गोबर के औषधीय गुणों और पर्यावरण-हितैषी फायदों के बारे में जागरूक नहीं थे। लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से नोएडा की प्रसिद्ध सोसाइटी एटीएस हैमलेट में लगाए गए दिवाली मेले के स्टॉल पर उन्हें शानदार प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर इन डिज़ाइनर दीयों और सजावटी सामानों को दिखाने के बाद उन्हें पूरे राज्य से सराहना मिली है।
स्थानीय रोज़गार और शुद्धता का वादा
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि डिज़ाइनर दीये बनाने की प्रक्रिया में मेहनत और समय लगता है। गोबर को पहले सुखाया जाता है, फिर पीसकर पाउडर बनाया जाता है, जिसे मिट्टी के साथ मिलाया जाता है। इसके बाद सांचों में ढालकर सुखाया जाता है और सुंदरता बढ़ाने के लिए उन्हें रंगा जाता है।
अंशिका शर्मा ने ज़ोर दिया कि ये उत्पाद न केवल पर्यावरण के लिए उत्तम हैं, बल्कि ये स्थानीय महिलाओं को स्थायी रोज़गार भी प्रदान कर रहे हैं। त्यौहारों के मौके पर ग्राहक कुछ नया और हानिकारक रसायन-मुक्त खरीदना चाहते हैं, और गोबर से बने ये दीये उनकी मांग को पूरी तरह से पूरा करते हैं। यह एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक बाज़ार की मांग मिलकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है।
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