दिसंबर का महीना क्रिसमस और नए साल की खुशियों से भरा होता है। लोग घरों में पार्टियों की तैयारी करते हैं, मॉल से खरीदारी करते हैं और ई-कॉमर्स साइट्स से खाने-पीने का सामान मंगवाते हैं। इसी उत्सव के माहौल का फायदा उठाकर दिल्ली में एक बेहद खतरनाक ‘फूड माफिया’ सक्रिय था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गैंग को पकड़ा है, जो विदेशों से आने वाले एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) फूड प्रोडक्ट्स को नए लेबल लगाकर बाजार में खपा रहा था। यह मामला केवल धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जान जोखिम में डालने का है।
रेड और बरामदगी: सदर बाजार का ‘जहरीला’ गोदाम
क्राइम ब्रांच के डीआईजी मंगेश कश्यप ने बताया कि एसीपी अनिल शर्मा को एक पुख्ता जानकारी मिली थी कि दिल्ली के सदर बाजार इलाके में कुछ लोग अवैध रूप से खाने-पीने की चीजों की री-पैकेजिंग कर रहे हैं। जब पुलिस की टीम ने बताए गए ठिकाने पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
गोदाम में हजारों लीटर कोल्ड ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक के डिब्बे और बोतलें रखी हुई थीं, जिनकी एक्सपायरी डेट कई महीने पहले निकल चुकी थी। अपराधी बड़ी सफाई से केमिकल के जरिए पुरानी तारीखों को मिटा रहे थे और मशीनों के जरिए उन पर भविष्य की तारीखें (New Expiry Dates), नए रेट और जाली बार कोड (Bar Code) छाप रहे थे।
बेबी फूड और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
इस पूरे रैकेट में सबसे विचलित करने वाली बात यह थी कि आरोपियों ने बच्चों के आहार (Baby Food) को भी नहीं छोड़ा। पुलिस ने मौके से हजारों किलो बच्चों के खाने का सामान, महंगे चॉकलेट, बिस्किट, जीरो शुगर ड्रिंक, केचप, वेफर्स और चिप्स बरामद किए हैं।
चूंकि इन प्रोडक्ट्स की पैकिंग और ब्रांडिंग बिल्कुल असली की तरह की जाती थी, इसलिए किसी भी आम ग्राहक या दुकानदार के लिए यह पहचानना असंभव था कि वे जो सामान खरीद रहे हैं, वह सेहत के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यह सामान केवल छोटी दुकानों पर ही नहीं, बल्कि नामी ई-कॉमर्स वेबसाइटों के जरिए देशभर में सप्लाई किया जा रहा था।
कैसे काम करता था यह सिंडिकेट? (मुंबई कनेक्शन)
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि इस काले कारोबार की जड़ें मुंबई तक फैली हुई हैं। इस गैंग का मास्टरमाइंड मुंबई में बैठकर पूरे खेल को नियंत्रित कर रहा था। वह विदेश से ऐसे खाद्य पदार्थों को बेहद कम दामों पर इम्पोर्ट (आयात) करता था, जो या तो एक्सपायर हो चुके थे या जिनकी समय सीमा खत्म होने वाली थी।
वहाँ से इन सामानों को ट्रक के जरिए दिल्ली के सदर बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों के गोदामों में भेजा जाता था। यहाँ कम वेतन पर काम करने वाले मजदूरों को रखा गया था। पकड़े गए एक मजदूर ने पुलिस को बताया कि उसे इस काम के लिए मात्र 15 हजार रुपये महीना मिलते थे और उसका काम केवल पुराने लेबल्स को हटाकर नए स्टिकर चिपकाना था। पुलिस ने इस मामले में अब तक 7 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
सावधानी ही बचाव है: विशेषज्ञों की राय
त्योहारों के दौरान जब आप भारी छूट (Discount) देखते हैं, तो सचेत हो जाएं। पुलिस और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि:
- पैकेजिंग की जांच: यदि पैकिंग पर छपाई धुंधली है या बार कोड अलग से चिपकाया हुआ दिख रहा है, तो सामान न लें।
- विश्वसनीय आउटलेट: हमेशा प्रतिष्ठित दुकानों या सत्यापित ऑनलाइन सेलर्स से ही सामान खरीदें।
- कीमत का अंतर: यदि कोई महंगा ब्रांड असामान्य रूप से बहुत सस्ता मिल रहा है, तो इसकी पूरी संभावना है कि वह नकली या एक्सपायर्ड है।
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को टाल दिया है, लेकिन यह घटना हमारी खाद्य सुरक्षा प्रणाली पर सवाल भी खड़ा करती है। त्योहारों के मौसम में जहां बाजार में मांग बढ़ती है, वहीं ऐसे अपराधियों को अवसर मिल जाता है। पकड़े गए 7 आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब उन ई–कॉमर्स वेंडर्स और रिटेलर्स की पहचान कर रही है, जिन्होंने जानते–बूझते हुए इन जहरीले प्रोडक्ट्स को जनता तक पहुँचाया। आपकी सतर्कता ही आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है।





