भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन आज भी एक बड़ा तबका ऐसा है जो बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जी रहा है। खुले आसमान के नीचे या जर्जर मिट्टी की दीवारों के बीच मौसम की मार सहना लाखों परिवारों की नियति बन चुकी है। बारिश में भीगता सामान और सर्दी में ठिठुरते बच्चों की समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के 2026 के नए चरण का आगाज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक ग्रामीण क्षेत्र का एक भी गरीब परिवार बिना पक्के घर के न रहे।
नया सर्वे: पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर
योजना के तहत जनवरी 2025 से एक व्यापक ग्रामीण सर्वे की शुरुआत की गई है, जिसे मई 2025 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है। इस बार सरकार का ध्यान विशेष रूप से उन लोगों पर है जो पिछली सूचियों में तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में छूट गए थे। नए सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभ केवल उन्हीं को मिले जो वास्तव में असुरक्षित और कच्चे मकानों में रहने को विवश हैं।
आर्थिक सहायता: 2.20 लाख रुपये तक की मिल सकती है मदद
पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत घर बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 1,20,000 रुपये की बुनियादी सहायता दी जाती है। हालांकि, कई राज्य सरकारें अपनी क्षेत्रीय योजनाओं (जैसे मनरेगा के तहत मजदूरी और शौचालय निर्माण के लिए अलग फंड) को इसमें शामिल कर रही हैं, जिससे लाभार्थियों को मिलने वाली कुल राशि 2.20 लाख रुपये तक पहुँच रही है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के जरिए भेजी जाती है, ताकि भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश न रहे।
इन लाभार्थियों को दी जाएगी प्राथमिकता
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चयन प्रक्रिया में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को ऊपर रखा जाए। प्राथमिकता की सूची में निम्न वर्ग शामिल हैं:
- जिनके पास रहने के लिए अपना पक्का घर नहीं है।
- गरीबी रेखा (BPL) के नीचे जीवन यापन करने वाले।
- दिव्यांग व्यक्ति, बुजुर्ग और विधवा महिलाएं।
- अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक समुदाय के पात्र परिवार।
डिजिटल इंडिया का असर: ‘आवास प्लस’ ऐप से आवेदन
प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ‘आवास प्लस’ (AwaasPlus) मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। सर्वे टीमें गांव-गांव जाकर इसी ऐप के माध्यम से कच्चे मकानों की फोटो और परिवार का विवरण अपलोड कर रही हैं। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है; ग्राम सचिव और पंचायत प्रतिनिधि ऑफलाइन माध्यम से भी डेटा जुटा रहे हैं।
सर्वे के दौरान क्या-क्या है जरूरी?
यदि सर्वे टीम आपके घर आती है, तो आपको अपनी आर्थिक स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, आधार कार्ड और बैंक खाते की सटीक जानकारी देनी होगी। आपके वर्तमान कच्चे घर की फोटो भी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। गलत जानकारी देने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है, इसलिए पारदर्शिता बरतें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
पक्का घर केवल सिर पर छत नहीं देता, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। मकान निर्माण के दौरान स्थानीय राजमिस्त्री, मजदूरों और निर्माण सामग्री विक्रेताओं को रोजगार मिलता है। साथ ही, सुरक्षित घर मिलने से परिवारों के स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा में सुधार देखा गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) 2026 के लिए शुरू हुआ यह अभियान लाखों उम्मीदों को उड़ान देने वाला है। यदि आप पात्र हैं, तो अपने पंचायत कार्यालय से संपर्क करें और सुनिश्चित करें कि आपका नाम सर्वे सूची में शामिल हो। पक्का घर न केवल आपकी सुरक्षा है, बल्कि यह आपके स्वाभिमान और उज्ज्वल भविष्य की नींव भी है।





