6 फरवरी 2026 को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने वाला रोडमैप पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब ‘पारंपरिक खेती’ से निकलकर ‘स्मार्ट और डिजिटल खेती’ के दौर में कदम रख चुका है। सरकार का मुख्य लक्ष्य अब केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की जेब में ज्यादा पैसा पहुँचाना और देश की खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण की गुणवत्ता में सुधार करना है।
6-सूत्रीय रणनीति: आधुनिक खेती के छह स्तंभ
शिवराज सिंह ने सदन को बताया कि केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र के कायाकल्प के लिए एक विशेष छह-सूत्रीय योजना तैयार की है। इस रणनीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): खेत से लेकर मंडी तक की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): फसलों की बीमारियों का पता लगाने और सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए AI का सहारा लिया जाएगा।
- डेटा-आधारित प्रबंधन: मिट्टी की सेहत और उर्वरकों के उपयोग की जानकारी अब वैज्ञानिक डेटा पर आधारित होगी।
- नवाचार (Innovation): खेती के पुराने तरीकों की जगह अब नई और कम खर्चीली तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- युवा उद्यमिता: खेती को केवल मजबूरी का काम न रखकर उसे एक मुनाफे वाले बिजनेस (Startup) के रूप में विकसित किया जाएगा।
- पोषण सुरक्षा: केवल अनाज का भंडार भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता की थाली तक शुद्ध और पोषक आहार पहुँचाना भी प्राथमिकता है।
‘भारत विस्तार’: किसान की जेब में होगा विशेषज्ञ
कृषि मंत्री ने ‘भारत विस्तार’ (Bharat Vistar) प्लेटफॉर्म की चर्चा करते हुए इसे एक गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि अक्सर किसान खाद, बीज या कीटनाशकों की जानकारी के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं, जिससे उन्हें कभी-कभी गलत सलाह मिल जाती है। ‘भारत विस्तार’ एक डिजिटल सलाहकार की तरह काम करेगा, जहाँ किसान अपने मोबाइल से सवाल पूछकर बीज चयन, मिट्टी की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे।
AI बनेगा भविष्य का ‘स्मार्ट ग्वाला’ और ‘रक्षक’
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर जोर देते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि अब स्मार्ट फार्मिंग का समय है। AI की मदद से किसान जान पाएंगे कि उनकी फसल को कब और कितना पानी चाहिए या किस हिस्से में बीमारी लगने की संभावना है। इससे खाद और दवाओं का बेजा इस्तेमाल कम होगा, जिससे खेती की लागत में बड़ी गिरावट आएगी।
फसल बीमा: डिजिटल आईडी से बढ़ी पारदर्शिता
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना अब पहले से कहीं अधिक भरोसेमंद हो गई है। लगभग 2.90 करोड़ किसान आईडी को राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के साथ एकीकृत कर दिया गया है। डिजिटल लिंकेज होने से अब क्लेम की प्रक्रिया तेज होगी और पैसा सीधे पात्र किसान के खाते में बिना किसी देरी के पहुँचेगा।
युवा स्टार्टअप्स: खेती का नया चेहरा
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत सरकार हजारों युवा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर रही है। शिवराज सिंह ने कहा कि आज की नई पीढ़ी ‘प्रिसीजन फार्मिंग’ और ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्यवर्धन) जैसे क्षेत्रों में शानदार काम कर रही है। ये युवा उद्यमी न केवल खुद आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर दाम दिलाने में भी मदद कर रहे हैं।
अपने संबोधन के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों को दोहराया— “किसान भारत की आत्मा है और तकनीक उसकी ताकत।“ उन्होंने विश्वास जताया कि इन डिजिटल पहलों से भारत का गांव समृद्ध होगा, किसान स्वाभिमानी बनेगा और भारतीय कृषि वैश्विक मंच पर एक नई पहचान स्थापित करेगी।





