लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पशुओं में फैलने वाली खतरनाक बीमारी लंपी स्कीन डिसीज (एलएसडी) के बढ़ते मामलों को देखते हुए योगी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस रोग की स्थिति और उसकी रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा के लिए पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमित कुमार घोष के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की।
इन जिलों में फैला लंपी रोग
प्रमुख सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में लंपी रोग का असर देखा गया है। इनमें चंदौली, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, मऊ, संतकबीरनगर और महराजगंज शामिल हैं। इन प्रभावित जनपदों में कुल 14,54,088 गोवंश हैं, जिनमें से 5,091 पशु इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं। राहत की बात यह है कि 4,325 पशु उपचार के बाद पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं, जबकि 1,006 गोवंश का इलाज जारी है।
सरकार की कार्रवाई और सख्त निर्देश
सरकार ने इस बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:
- टीकाकरण अभियान: प्रभावित गांवों में युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। वर्तमान में, प्रदेश में 49 लाख गोटपॉक्स वैक्सीन उपलब्ध हैं।
- विशेष टीमें: देवरिया और कुशीनगर जैसे जिलों में बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए मुख्यालय से अतिरिक्त पशु चिकित्सकों की टीमें भेजी गई हैं।
- सामुदायिक जागरूकता: सभी जिलों के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों का उद्देश्य गाँव स्तर पर स्वच्छता, जागरूकता और फागिंग अभियान चलाकर मक्खी-मच्छरों के फैलाव को रोकना है।
- मृत्यु का ऑडिट: मृत गोवंश की सही जानकारी सुनिश्चित करने के लिए ‘डेथ ऑडिट’ कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
- जनप्रतिनिधियों से संवाद: अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में रहने और उन्हें वास्तविक स्थिति से अवगत कराने के लिए कहा गया है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि राज्य का कोई भी जनपद पूरी तरह से प्रभावित नहीं है, बल्कि कुछ छिटपुट मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हें तुरंत नियंत्रित किया जा रहा है।
कैसे फैलता है लंपी रोग?
लंपी एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीड़ों के काटने से फैलती है। यह एक बीमार पशु की लार या दूषित चारा–पानी के माध्यम से भी फैल सकती है। इस बीमारी की शुरुआत में पशु को तेज बुखार आता है, जिसके बाद शरीर पर गांठे बनने लगती हैं।





