पंतनगर: उत्तराखंड की अमूल्य धरोहर मानी जाने वाली पहाड़ी बदरी गाय को बचाने और उसकी नस्ल को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Pantnagar University) के वैज्ञानिकों ने इस गाय का एक नया क्लोन तैयार कर लिया है। परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण, यानी भ्रूण का स्थानांतरण, अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है। यह उपलब्धि पहाड़ी कृषि और डेयरी उद्योग के लिए एक नई क्रांति ला सकती है।
परियोजना का उद्देश्य और वैज्ञानिक प्रयास
यह महत्वाकांक्षी परियोजना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) करनाल के सहयोग से चल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बदरी गाय की आनुवंशिकी (genetics) में सुधार करना है, जिससे भविष्य में दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हो सके। अभी तक यह गाय औसतन 1.5 से 3 लीटर दूध देती है, लेकिन इस परियोजना की सफलता से उम्मीद है कि यह मात्रा बढ़कर 4 से 5 लीटर तक पहुंच जाएगी। इस बढ़ी हुई दूध की मात्रा से पहाड़ी किसानों की आय में सीधा और महत्वपूर्ण इजाफा होगा।
क्लोन के लिए आवश्यक सैंपल चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों से चुनी गई उत्कृष्ट बदरी गायों से लिए गए थे। इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक जैसे ओवम पिक-अप (OPU) और सामैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) का इस्तेमाल किया गया है। इन आधुनिक तरीकों से वैज्ञानिक गाय के सबसे अच्छे आनुवंशिक गुणों को चुनकर उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं।
बदरी गाय की खासियत और औषधीय गुण
बदरी गाय का दूध अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इसका दूध A2 बीटा-कैसीन प्रोटीन से भरपूर होता है, जो आसानी से पच जाता है और स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। हिमालय की जड़ी-बूटियां खाने और प्राकृतिक वातावरण में रहने के कारण इसके दूध में कई औषधीय गुण समाहित हो जाते हैं। इसे शिशुओं, बुजुर्गों और रोगियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है। यह मधुमेह, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी होता है।
इस परियोजना के सफल होने पर, न केवल बदरी गाय की नस्ल का संरक्षण होगा, बल्कि इससे उत्तराखंड के किसानों की आय में भी वृद्धि होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। यह कदम साबित करता है कि आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान का तालमेल, कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकता है।





