नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में एक बार फिर पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। बीते वर्षों में कहर बरपाने वाले लंपी रोग के मामले एक बार फिर सामने आ रहे हैं। यह संक्रामक रोग मवेशियों, खासकर गायों को तेज़ी से प्रभावित करता है, जिससे उनकी दूध उत्पादन क्षमता घट जाती है और कई बार जान का खतरा भी बन जाता है। हालांकि, सही समय पर बचाव के तरीके अपनाकर और कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से इस रोग के प्रकोप को कम किया जा सकता है। यह खबर विशेष रूप से हमारे गौपालकों के लिए है।
एक बार फिर लंपी का खतरा: जानें लक्षण
लंपी रोग की पहचान करना बहुत ज़रूरी है ताकि शुरुआती स्टेज में ही बचाव के उपाय शुरू किए जा सकें। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:
- पशु के शरीर पर गोल, सख्त गांठे (nodules) उभर आना।
- बुखार और नाक-आँखों से पानी बहना।
- खाना-पीना कम करना और सुस्त रहना।
- दूध उत्पादन में अचानक कमी आना।
अगर आप अपनी गाय में ये लक्षण देखते हैं, तो तुरंत उसे बाकी पशुओं से अलग कर दें।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
यह कहावत बिल्कुल सही है कि इलाज से बेहतर बचाव है। लंपी वायरस मच्छरों, मक्खियों और टिक्स जैसे कीड़ों से तेज़ी से फैलता है। इसलिए, इन पर नियंत्रण सबसे ज़रूरी है।
- साफ-सफाई: अपने गौशाला और आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह से साफ रखें। नियमित रूप से फर्श पर नीम के पानी का छिड़काव करें और गोबर को दूर इकट्ठा करें।
- प्राकृतिक स्प्रे: नीम की सूखी पत्तियों को जलाकर धुंआ करें। इस धुएं से मच्छर-मक्खी दूर भागते हैं। इसके अलावा, करंज के तेल को पानी में मिलाकर गौशाला में छिड़कना भी फायदेमंद माना जाता है।
- पशुओं को अलग रखें: अगर आप कोई नया पशु खरीदते हैं, तो उसे कुछ दिनों के लिए बाकी पशुओं से अलग रखें ताकि कोई संक्रमण न फैले।
लंपी रोग के लिए देसी और घरेलू नुस्खे
अगर आपकी गाय में शुरुआती लक्षण दिखते हैं, तो पशु चिकित्सक से संपर्क करने के साथ-साथ इन देसी नुस्खों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है:
1. घावों पर लगाने के लिए लेप:
लंपी रोग में गांठे (lumps) सबसे बड़ी समस्या होती हैं। इन पर लगाने के लिए आप यह लेप बना सकते हैं:
- सामग्री: नीम की ताज़ी पत्तियाँ, तुलसी की पत्तियाँ, लहसुन की कलियाँ, हल्दी पाउडर और थोड़ा सा एलोवेरा।
- बनाने की विधि: सभी सामग्री को एक साथ पीसकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस लेप को दिन में दो से तीन बार गाय की गांठों और घावों पर धीरे-धीरे लगाएं। नीम और हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो घावों को ठीक करने में मदद करते हैं।
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खुराक:
पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए यह मिश्रण बहुत ही प्रभावी माना जाता है:
- सामग्री: गुड़, हल्दी, काली मिर्च पाउडर, लहसुन, और नीम के पत्ते।
- बनाने की विधि: एक कटोरी गुड़ में थोड़ा सा हल्दी, पिसी हुई काली मिर्च और लहसुन का पेस्ट मिला लें। इस मिश्रण को एक गोली की तरह बनाकर पशु को दिन में एक बार खिलाएं। यह नुस्खा अंदरूनी तौर पर इम्यूनिटी को मज़बूत करता है।
पशु चिकित्सा विभाग से संपर्क है ज़रूरी
यह ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि ये घरेलू नुस्खे केवल सहायक उपाय हैं। जैसे ही आप अपनी गाय में लंपी रोग के लक्षण देखें, तुरंत अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक या पशु चिकित्सा विभाग से संपर्क करें। सरकार द्वारा मुफ्त टीकाकरण अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जो इस रोग से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। घरेलू नुस्खे और सरकारी मदद, दोनों के तालमेल से ही हम इस बीमारी को हरा सकते हैं और अपने गौधन को सुरक्षित रख सकते हैं।





