देशभर में देसी गायों के संरक्षण, जैविक कृषि के प्रचार और ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण का संकल्प लेकर चल रही ‘गौ राष्ट्र यात्रा’ आज राजस्थान के सूरतगढ़ पहुँची। AWRI अध्यक्ष श्री भारत सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में यात्रा दल ने यहाँ के विभिन्न गाँवों में जाकर उन समर्पित पशुपालकों और किसानों से मुलाक़ात की, जो वर्षों से देसी नस्लों की गायों पर अथक कार्य कर रहे हैं। इस दौरान देसी गायों के महत्व और उनके सामने आ रही चुनौतियों पर सार्थक संवाद हुआ।
राठी, साहीवाल और गिर: देसी नस्लों पर विशेष चर्चा
यात्रा के दौरान, टीम ने क्षेत्र की प्रमुख देसी नस्लों जैसे राठी, साहीवाल और गिर पर विशेष चर्चा की। ग्रामीण पशुपालकों ने अपने अनुभवों से बताया कि राठी गाय किस तरह गर्मी में भी सहनशील है और संतुलित दूध उत्पादन देती है। वहीं, साहीवाल अपनी बेहतरीन रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है, जबकि गुजरात की पारंपरिक नस्ल गिर गाय अब वैश्विक स्तर पर भी लोकप्रियता हासिल कर रही है। यह संवाद देसी नस्लों की अनूठी विशेषताओं को सामने लाया।

चुनौतियाँ और समाधान: ‘देसी गाय ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता की कुंजी’
किसानों और पशुपालकों ने यात्रा दल के सामने अपनी कुछ प्रमुख चुनौतियाँ साझा कीं। इनमें पशुचिकित्सा की सीमित सुविधाएँ, उचित प्रशिक्षण की कमी, नस्ल सुधार की धीमी गति और अपने उत्पादों को सीधे बाज़ार तक पहुँचाने में आने वाली कठिनाइयाँ शामिल थीं।
इस मौके पर AWRI अध्यक्ष श्री भारत सिंह राजपुरोहित ने इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए ग्रामीणों को देसी गायों पर हो रहे नवीन वैज्ञानिक शोधों की जानकारी दी। उन्होंने जीनोमिक चिप आधारित प्रजनन तकनीक, पंचगव्य उत्पादों के वैश्विक विस्तार और जैविक दुग्ध उत्पादों की लगातार बढ़ती माँग जैसे विषयों पर प्रकाश डाला। राजपुरोहित ने ज़ोर देकर कहा, “देसी गायें केवल परंपरा का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता की कुंजी हैं।” उनका यह संदेश ग्रामीणों में नई आशा जगा गया।

गौभक्तों का साथ: एक साझा संकल्प
सूरतगढ़ में ‘गौ राष्ट्र यात्रा’ को अनेक गौभक्तों, पशुपालकों और जागरूक ग्रामीणों का भरपूर समर्थन मिला। इस अवसर पर बाबूलाल गोदारा (प्रगतिशील पशुपालक), मोनू बाजिया, संजय सोडा, विनोद जी नाथ, भँवरलाल जी, ब्रजमोहन, भागीरथ बिश्नोई, विनोद बिश्नोई, ऋषि बाँगा और ‘खबर किसान की’ चैनल के संस्थापक अंकित शर्मा जैसे प्रमुख लोग उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने यात्रा के उद्देश्यों को और बल दिया।
‘गौ राष्ट्र यात्रा’ का उद्देश्य गौवंश आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देना, युवाओं को देसी नस्लों के वैज्ञानिक उपयोग की ओर प्रेरित करना और ग्राम्य भारत को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनाना है। सूरतगढ़ में मिली यह सकारात्मक प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि देश का ग्रामीण समाज आज भी गौ-संवेदना और आधुनिक विकास के बीच एक मज़बूत सेतु बनने के लिए पूरी तरह तत्पर है।





