मिठाइयों और भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला घी यदि रसायनों (Chemicals) के मिश्रण से तैयार होने लगे, तो वह अमृत नहीं बल्कि जहर बन जाता है। राजस्थान के चूरू जिले में पुलिस ने एक ऐसे ही संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो जनता की थाली में शुद्ध घी के नाम पर ‘धीमा जहर’ परोस रहा था। सालासर पुलिस और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा, जहाँ भारी मात्रा में मिलावटी घी और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायनों का भंडार मिला है।
ढाबे की आड़ में छिपा था काला साम्राज्य
चूरू जिला पुलिस अधीक्षक (SP) जय यादव के निर्देशानुसार जिले भर में खाद्य मिलावट के विरुद्ध एक विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में एजीटीएफ टीम को एक पुख्ता इनपुट मिला कि सालासर के पास शोभासर पुलिया (NH-58) पर स्थित एक होटल/ढाबे में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सहायक पुलिस अधीक्षक (राजगढ़) और एजीटीएफ प्रभारी अभिजीत पाटिल के नेतृत्व में जब पुलिस टीम ने अचानक ढाबा परिसर पर दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए।
बाहर से एक साधारण भोजनलय दिखने वाले इस ढाबे के भीतर बड़े पैमाने पर नकली घी बनाने का कारखाना स्थापित किया गया था। यहाँ न केवल घी बनाया जा रहा था, बल्कि उसकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए भी आधुनिक मशीनें और सामग्री मौजूद थी।
जब्ती का विशाल आंकड़ा: 7500 लीटर ‘जहर’ बरामद
पुलिस की इस छापेमारी में जो सामग्री बरामद हुई है, वह चौंकाने वाली है। मौके से:
- नकली घी: करीब 7500 लीटर संदिग्ध घी जब्त किया गया, जिसे बाजार में सप्लाई के लिए तैयार रखा गया था।
- केमिकल के ड्रम: घी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायनों से भरे 200-200 लीटर के लगभग 17-18 बड़े ड्रम मिले। इसके अतिरिक्त इतने ही ड्रम अन्य संदिग्ध लिक्विड के भी बरामद किए गए।
- पैकिंग सामग्री: घी को असली दिखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 414 टिनशेड डिब्बे और भारी मात्रा में नकली लेबल व ढक्कन भी पुलिस के हाथ लगे हैं।
शुरुआती जांच में पता चला है कि इस फैक्ट्री के पास न तो कोई वैध लाइसेंस था और न ही यह खाद्य सुरक्षा (Food Safety) के मानकों का पालन कर रही थी। यहाँ तैयार होने वाला नकली घी न केवल स्थानीय होटलों और ढाबों में खपाया जा रहा था, बल्कि इसे शादियों और त्योहारों के सीजन में मिठाइयों की दुकानों पर भी सप्लाई करने की योजना थी।
प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई
पुलिस की कार्रवाई के दौरान ही तुरंत खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने संदिग्ध घी और रसायनों के नमूने (Samples) लिए हैं, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए सरकारी प्रयोगशाला (Lab) भेजा गया है। पूरी फैक्ट्री को सील कर दिया गया है और बरामद माल को सुरक्षित कस्टडी में ले लिया गया है।
एसपी जय यादव ने स्पष्ट किया है कि लैब की रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जन-स्वास्थ्य को खतरे में डालने और खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस अब इस गिरोह के ‘सप्लाई नेटवर्क’ की भी तलाश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नकली घी अब तक किन-किन शहरों और दुकानों तक पहुँचाया जा चुका है।
सेहत के लिए कितना घातक है यह ‘केमिकल घी’?
विशेषज्ञों के अनुसार, रसायनों, घटिया पाम ऑयल और खुशबू के लिए मिलाए जाने वाले सिंथेटिक फ्लेवर से बना यह घी मानव शरीर के लिए अत्यंत विनाशकारी है। इसके सेवन से:
- कैंसर का खतरा: लंबे समय तक ऐसे रसायनों का सेवन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकता है।
- पाचन और लिवर की समस्या: यह नकली घी लिवर को डैमेज कर सकता है और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।
- हृदय रोग: मिलावटी तेल और केमिकल धमनियों में ब्लॉक पैदा करते हैं, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।
निष्कर्ष: जनता को रहना होगा सतर्क
सालासर में हुई यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि हमें बाजार से मिलने वाली खाद्य वस्तुओं, विशेषकर घी और तेल की खरीदारी करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। चूरू पुलिस की इस सफलता ने निश्चित रूप से मिलावटखोरों के हौसले पस्त किए हैं, लेकिन समाज को भी जागरूक होना होगा। यदि आपको भी कहीं कम कीमत पर ब्रांडेड घी मिलने का दावा किया जाए या किसी स्थान पर संदिग्ध गंध आए, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें। आपकी एक छोटी सी सूचना कई जिंदगियों को सुरक्षित कर सकती है।





