भारतीय पोल्ट्री उद्योग इस समय अपनी सबसे तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (First Half) में भारत का पोल्ट्री निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में दोगुना से अधिक हो गया है, जो लगभग 149 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। पिछले साल यह आंकड़ा $71.16 मिलियन था।
मध्य पूर्व की बढ़ती मांग और रुपये में वृद्धि
इस शानदार वृद्धि का मुख्य कारण मध्य पूर्व के देशों से आई ज़बरदस्त मांग है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान प्रमुख हैं।
- UAE ने ओमान को पछाड़ा: अब तक ओमान भारत से अंडों का सबसे बड़ा आयातक था, लेकिन इस अवधि में UAE ने उसे पीछे छोड़ दिया है। UAE ने पिछले साल ही भारतीय अंडों के आयात की अनुमति दी थी और अब वहाँ से बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं।
- क्वालिटी का कमाल: ऑल इंडिया पोल्ट्री एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव वल्सन परमेस्वरन के अनुसार, भारतीय अंडों की गुणवत्ता को UAE ने बहुत सराहा है। अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर लगातार मेहनत का नतीजा अब निर्यात के आंकड़ों में साफ़ दिख रहा है।
- रुपये में उछाल: चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारत ने ₹1,288 करोड़ मूल्य के पोल्ट्री उत्पाद विदेश भेजे हैं, जिसमें अंडे और उनसे बने उत्पाद सबसे ज़्यादा बिकने वाले आइटम रहे।
नामक्कल: भारत की एग कैपिटल
तमिलनाडु का नामक्कल शहर इस समय भारत से अंडों का सबसे बड़ा निर्यातक केंद्र बना हुआ है और यह ‘एग कैपिटल ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर है।
वैश्विक बाज़ार का फायदा:
भारतीय अंडों की मांग बढ़ने का एक कारण तुर्की और ईरान जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ता देशों में उत्पादन संबंधी दिक्कतें आना भी है। इन देशों में कमी आने से मध्य पूर्व के बाज़ारों ने भारत को एक बड़े विकल्प के रूप में देखा।
एशियाई बाज़ारों में नई उम्मीदें
भारतीय अंडों की मांग अब मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। जापान और इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों से भी भारतीय अंडों की मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह मज़बूत मांग जनवरी 2026 तक बनी रहेगी, जिससे इस वित्त वर्ष में पोल्ट्री निर्यात का प्रदर्शन बेहद शानदार रहेगा।
देश में उत्पादन की स्थिति
आँकड़ों के अनुसार, देश में अंडा उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, साल 2023-24 में देश में 142.77 अरब अंडों का उत्पादन हुआ, जो पिछले 10 सालों में 6.8% की वृद्धि है।
शीर्ष अंडा उत्पादक राज्य (हिस्सेदारी):
- आंध्र प्रदेश (17.85%)
- तमिलनाडु (15.64%)
- तेलंगाना (12.88%)
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी वर्तमान गुणवत्ता और आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखता है, तो पोल्ट्री निर्यात का आंकड़ा जल्द ही 200 मिलियन डॉलर से ऊपर जा सकता है।





