देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले रोजगार गारंटी प्रोग्राम को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच गई हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। मुद्दा है नई योजना ‘VB-G RAM G’ (विकसित भारत-रोजगार आजीविका मिशन), जिसे लेकर कांग्रेस ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान चला रही है। शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस नई व्यवस्था के बारे में भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रहा है।
रोजगार के दिन बढ़े: 100 की जगह अब 125 दिन का काम
विपक्ष के उस दावे को खारिज करते हुए, जिसमें कहा जा रहा था कि सरकार रोजगार छीन रही है, मंत्री ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत अब मजदूरों को साल में 100 दिन के बजाय 125 दिन के काम की गारंटी दी जाएगी।
- समय पर भुगतान: अब मजदूरी का भुगतान 7 से 14 दिनों के भीतर अनिवार्य होगा। देरी होने पर प्रशासन पर जुर्माना लगेगा।
- बेरोजगारी भत्ता: यदि काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता, तो मजदूर को कानूनी रूप से बेरोजगारी भत्ता पाने का हक होगा।
बजट और निवेश: “हमने मनरेगा से ज्यादा खर्च किया”
शिवराज सिंह ने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि यूपीए के शासनकाल में मनरेगा पर महज दो लाख करोड़ खर्च हुए थे, जबकि वर्तमान सरकार अब तक नौ लाख करोड़ रुपये लगा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई योजना छह महीने में पूरी तरह लागू हो जाएगी और तब तक मनरेगा की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहेगी। राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ के दावों को उन्होंने यह कहकर नकारा कि केंद्र पहले से अधिक फंड दे रहा है और यह ‘बोझ’ नहीं बल्कि गांवों के इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया ‘निवेश’ है।
खेती के सीजन और मजदूरों की उपलब्धता का सच
विपक्ष के इस आरोप पर कि ‘फसल कटाई के समय काम बंद कर दिया जाएगा’, मंत्री ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को केवल अधिकतम 60 दिनों के लिए काम को ‘स्थगित’ करने की छूट दी गई है, ताकि खेती के पीक सीजन में किसानों को मजदूरों की कमी न हो। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि रोजगार के दिन कम होंगे; 125 दिनों की गारंटी साल भर में कभी भी पूरी की जा सकती है। यह केवल समय का प्रबंधन है, अधिकारों की कटौती नहीं।
पंचायतों का वर्चस्व और ठेकेदारों पर पाबंदी
नई योजना में ठेकेदारों की एंट्री के डर को शिवराज सिंह ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- ग्राम पंचायतें ही रहेंगी बॉस: गांवों में क्या काम होगा, इसका फैसला ग्राम सभा और पंचायत ही करेगी।
- ठेकेदार वर्जित: कानून के मुताबिक किसी भी स्तर पर ठेकेदारों को काम देने की अनुमति नहीं होगी।
- रोजगार सहायक सुरक्षित: मेट, रोजगार सहायक और सोशल ऑडिट टीमों की भूमिका खत्म नहीं होगी, बल्कि प्रशासनिक खर्च का बजट 6% से बढ़ाकर 9% कर दिया गया है ताकि मॉनिटरिंग और मजबूत हो।
सामाजिक न्याय और महिलाओं को प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि यह नया कानून महिलाओं, एससी-एसटी समुदायों और दिव्यांगों को प्राथमिकता देता है। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों से होने वाले पलायन को रोकना और ग्रामीणों को अपने ही घर के पास सम्मानजनक आजीविका प्रदान करना है। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वे इस ‘ऐतिहासिक सुधार’ में रोड़ा न अटकाएं और जनता के बीच गलत जानकारी न फैलाएं।
‘VB-G RAM G’ कानून को सरकार ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था का नया इंजन मान रही है। जहाँ विपक्ष इसे मनरेगा को खत्म करने की साजिश बता रहा है, वहीं सरकार इसे मनरेगा का एक ‘अपग्रेडेड’ और अधिक जवाबदेह संस्करण कह रही है। आने वाले छह महीने यह तय करेंगे कि यह योजना जमीन पर कितनी सफल होती है, लेकिन फिलहाल इस पर छिड़ी सियासी रार थमती नजर नहीं आ रही है।





