Saturday, March 21, 2026
खबर किसान की
  • होम
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • लेटेस्ट न्यूज
No Result
View All Result
  • होम
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • लेटेस्ट न्यूज
No Result
View All Result
खबर किसान की
No Result
View All Result
Home खेती-किसानी

संकट में भारतीय बासमती! 25% टैरिफ की धमकी से निर्यातकों में खलबली, मंडियों में गिरे दाम

बासमती की खुशबू पर 'ट्रंप' का ग्रहण

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
January 19, 2026
in खेती-किसानी
Reading Time: 1 min
0 0
0
0
SHARES
20
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterwhatsappQR CodeWechatTelegram

भारत के बासमती चावल की खुशबू पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन वर्तमान में इस सुगंधित चावल के व्यापार पर अनिश्चितता के काले बादल छा गए हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक हालिया चेतावनी ने भारतीय चावल निर्यातकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क (Tariff) लगाने की धमकी दी है। चूंकि ईरान भारतीय बासमती का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है, इसलिए इस घोषणा का सीधा असर अब हरियाणा और पंजाब की अनाज मंडियों में कीमतों की गिरावट के रूप में दिखने लगा है।

ईरान: बासमती निर्यात की रीढ़

अगर आंकड़ों के चश्मे से देखें, तो भारतीय बासमती के लिए ईरान का बाजार ‘ऑक्सीजन’ की तरह है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने कुल 5,944.49 मिलियन डॉलर मूल्य का बासमती निर्यात किया, जिसमें से अकेले ईरान की हिस्सेदारी 753.20 मिलियन डॉलर रही। मात्रा के लिहाज से भारत ने कुल 60.65 लाख टन चावल बाहर भेजा, जिसमें से 8.55 लाख टन ईरान ने खरीदा। सऊदी अरब और इराक के बाद ईरान ही वह मुल्क है जो भारतीय बासमती के निर्यात को स्थिरता प्रदान करता रहा है।

चालू वित्त वर्ष में बढ़ा ईरान का भरोसा

हैरानी की बात यह है कि चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-नवंबर 2025) में जहां सऊदी अरब और इराक जैसे बड़े बाजारों से मांग में कमी देखी गई, वहीं ईरान को होने वाले निर्यात में 20.9 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई। इस दौरान भारत ने करीब 5.99 लाख टन चावल ईरान को भेजा। इससे यह स्पष्ट होता है कि हाल के महीनों में ईरान भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे भरोसेमंद गंतव्य बनकर उभरा था, लेकिन अब ट्रंप की एक धमकी ने इस बढ़त पर ब्रेक लगा दिया है।

दुबई के रास्ते ‘सुरक्षित’ व्यापार पर भी संकट

भारतीय बासमती का एक बड़ा हिस्सा सीधे ईरान न जाकर दुबई (UAE) के रास्ते वहां पहुँचता है। निर्यातक दुबई के मजबूत और सुरक्षित बैंकिंग सिस्टम का उपयोग करते हुए माल भेजते हैं, जहाँ से इसे आगे ईरान रवाना किया जाता है। इस रूट को सरकारी टेंडरों और भुगतान की सुरक्षा के लिहाज से सबसे उत्तम माना जाता रहा है। हालांकि, अब अमेरिका के कड़े रुख के बाद इस ‘वैकल्पिक रास्ते’ पर भी सख्ती बढ़ने की संभावना है, जिससे निर्यातकों ने नए सौदे करना बंद कर दिया है।

मंडियों में ‘पूसा’ किस्मों के भाव धराशायी

इस वैश्विक हलचल का सबसे दर्दनाक असर हरियाणा की मंडियों में देखने को मिल रहा है। कीमतों का ग्राफ कुछ इस तरह गिरा है:

  • पूसा बासमती-1509: जो अक्टूबर में 54 रुपये से बढ़कर दिसंबर में 68 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गया था, अब लुढ़ककर 63–64 रुपये पर आ गया है।
  • पूसा बासमती-1718: इसके थोक दाम भी 70 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर से फिसलकर अब 65–66 रुपये के दायरे में सिमट गए हैं।
    निर्यातकों का कहना है कि भुगतान फंसने की आशंका के चलते वे अभी खरीदारी से बच रहे हैं, जिसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

ईरान की आंतरिक आर्थिक बदहाली ने बढ़ाई आग

मुसीबत केवल अमेरिका की तरफ से नहीं है, बल्कि ईरान की अपनी आर्थिक स्थिति भी व्यापार के अनुकूल नहीं रही। ईरान सरकार ने 1 जनवरी से जरूरी वस्तुओं के आयात पर मिलने वाली मुद्रा सब्सिडी खत्म कर दी है। पहले आयातकों को डॉलर 28,000 तोमान की दर पर मिलता था, जो अब खुले बाजार में 1,30,000 तोमान के पार पहुँच गया है। इससे ईरान के भीतर आयातित चावल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, जिससे वहां मांग कम हुई है और विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है।

इतिहास खुद को दोहराने की कगार पर?

भारतीय बासमती व्यापार ने ऐसा ही एक बड़ा झटका 2018-19 में झेला था। उस वक्त ईरान को निर्यात अपने चरम पर था (करीब 1.5 अरब डॉलर), लेकिन ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंधों के कारण करोड़ों रुपये का भुगतान अटक गया था। आज फिर से वही स्थिति बनती दिख रही है। एक तरफ ट्रंप की टैरिफ की धमकी है और दूसरी तरफ ईरान की अपनी वित्तीय अस्थिरता।

बासमती के व्यापार पर मंडराता यह संकट केवल निर्यातकों का नहीं, बल्कि उन हजारों किसानों का है जिन्होंने उम्मीद में अच्छी फसल उगाई थी। यदि भारत सरकार जल्द ही कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर कोई समाधान नहीं निकालती, तो बासमती की कीमतों में और अधिक गिरावट आ सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरा धक्का लगेगा।

Tags: agricultureBasmati RiceIndian Rice exportIranRice ExportTrumpUS Tarrif
Previous Post

VB-G RAM G योजना पर फैलाए जा रहे ‘झूठ’ का हुआ पर्दाफाश

Next Post

रूस की थाली में सजेगा यूपी का आलू! हाथरस और अलीगढ़ के आलू किसानों की खुली किस्मत

अंकित शर्मा

अंकित शर्मा

Related Posts

खेती-किसानी

ओलावृष्टि से नुकसान पर तुरंत मिलेगा बीमा क्लेम, कृषि मंत्री ने दिए सर्वे के निर्देश

March 20, 2026
खेती-किसानी

सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म ‘RHH-2101’ ने तोड़े उपज और तेल के रिकॉर्ड

March 20, 2026
खेती-किसानी

हरियाणा में प्राकृतिक खेती अपनाने वालों की हुई चांदी, 5 साल तक मिलेगी आर्थिक मदद।

March 20, 2026
खेती-किसानी

MP का 4 लाख टन बासमती समुद्र में फंसा, कीमतों में ₹1000 की भारी गिरावट

March 7, 2026
Next Post

रूस की थाली में सजेगा यूपी का आलू! हाथरस और अलीगढ़ के आलू किसानों की खुली किस्मत

खबर किसान की

© 2025 khabarkisanki.com

Navigate Site

  • About
  • Team
  • Privacy & Policy
  • Contact
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • वीडियो
  • सरकारी योजनाएं

Follow Us

No Result
View All Result
  • होम
  • खाद-बीज
  • खेती-किसानी
  • पशुपालन
  • मौसम
  • लेटेस्ट न्यूज
  • विज्ञान और तकनीक
  • वीडियो
  • सक्सेस स्टो‍री
  • सरकारी योजनाएं
  • सेहत

© 2025 khabarkisanki.com

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist