भारत को विश्व की ‘खाद्य टोकरी’ बनाने के संकल्प के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। देश की कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में दुनिया के प्रतिष्ठित बहुपक्षीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। विचार-विमर्श का मुख्य केंद्र यह था कि वैश्विक स्तर पर खेती के क्षेत्र में हो रहे सफल प्रयोगों और आधुनिक तकनीकों को भारतीय खेतों तक कैसे पहुँचाया जाए।
डिजिटल एग्रीकल्चर: खेती में AI और डेटा का दखल
बैठक के दौरान जिस विषय पर सबसे अधिक चर्चा हुई, वह था ‘डिजिटल कृषि’। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाला समय डेटा और तकनीक का है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से खेती की निगरानी को वास्तविक समय (Real-time) में संभव बनाया जा सकता है।
- फायदा: इससे न केवल फसलों में लगने वाले रोगों का समय पर पता चलेगा, बल्कि मौसम के जोखिमों को कम कर उत्पादन को कई गुना बढ़ाया जा सकेगा।
- पारदर्शिता: ‘ई-नाम’ और डिजिटल फसल आकलन जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलेगा।
हाई वैल्यू क्रॉप्स और ऑर्गेनिक खेती पर फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब किसानों को केवल पारंपरिक अनाजों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। सरकार अब ‘हाई वैल्यू क्रॉप्स’ (अधिक कीमत वाली फसलों), औषधीय पौधों, और बागवानी को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही ‘प्राकृतिक खेती’ (Natural Farming) और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत ढांचे में बदलाव किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय किसान गुणवत्तापूर्ण और रसायन मुक्त उत्पादन करता है, तो उसे वैश्विक बाजार में ऊंचे दाम मिल सकते हैं।
जल संरक्षण: “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” का मंत्र
कृषि मंत्रालय ने जल की एक-एक बूंद की कीमत समझते हुए ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (प्रति बूंद अधिक फसल) अभियान को अपनी प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रखा है। मंत्री जी ने बताया कि सिंचाई दक्षता बढ़ाने के लिए ‘माइक्रो-इरिगेशन’ (सूक्ष्म सिंचाई) और ‘ड्रिप इरिगेशन’ जैसी तकनीकों को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाया जा रहा है। इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा—पानी कम लगेगा, खाद का सही इस्तेमाल होगा और उपज की गुणवत्ता बेहतर होगी।
मांग आधारित खेती और क्षेत्रीय विविधीकरण
केंद्रीय मंत्री ने बैठक में एक बहुत महत्वपूर्ण बिंदु रखा— ‘मांग आधारित कृषि’। उन्होंने कहा कि किसानों को वही उगाना चाहिए जिसकी बाजार में मांग हो। इसके लिए सरकार क्षेत्रीय आवश्यकताओं और जलवायु की स्थिति के अनुसार ‘फसल विविधीकरण’ (Crop Diversification) की योजनाएं चला रही है। पोषण आधारित खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि देश की खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
बैठक के अंत में श्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वस्त किया कि बहुपक्षीय संस्थानों से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों पर मंत्रालय पहले से ही काम कर रहा है और भविष्य में भी ऐसे वैश्विक संवाद जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि खेती की लागत कम करके किसान की जेब में अधिक पैसा पहुँचाना है।
यह मंथन साबित करता है कि आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि क्षेत्र में बड़े ढांचागत बदलाव देखने को मिलेंगे, जहाँ तकनीक किसान की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।





