भारतीय कृषि और किसान समुदाय के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। भारत और रूस के बीच उर्वरक आपूर्ति को लेकर एक दीर्घकालिक और मजबूत डील की दिशा में तेजी से काम चल रहा है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर देश के किसानों पर पड़ेगा। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा ने इस रणनीतिक साझेदारी को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील मज़बूत होती है, तो भारत में उर्वरक सस्ते होंगे, उनकी उपलब्धता बढ़ेगी और इससे किसानों का खेती का खर्च काफी कम हो जाएगा।
यह साझेदारी भारत की खाद्य सुरक्षा (Food Security) और कृषि लागत नियंत्रण (Cost Control) के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता बन गई है।
1. क्यों अहम है रूस पर भारत की निर्भरता?
भारत अपने विशाल कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए विदेशी उर्वरकों पर बहुत अधिक निर्भर करता है। इस वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में, रूस एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय भागीदार बनकर उभरा है।
- रिकॉर्ड तोड़ हिस्सेदारी: 2025 की पहली छमाही में, भारत ने रूस से लगभग 25 लाख टन उर्वरक का आयात किया है। इस बड़ी मात्रा के कारण, भारत के कुल उर्वरक आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 33% तक पहुँच गई है।
- गणित समझिए: इसका सीधा मतलब है कि भारत द्वारा आयात किए जाने वाले हर तीन टन उर्वरकों में से एक टन रूस से आ रहा है। यह आकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय कृषि बाजार के लिए रूस एक रणनीतिक सप्लायर बन चुका है।
यह निर्भरता साल 2022 से बढ़ी है, जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अन्य देशों से चुनौतियाँ आई थीं। रूस से फॉस्फोरस युक्त उर्वरकों (जैसे DAP) और NPK उर्वरकों की आपूर्ति में विशेष रूप से वृद्धि हुई है, जो भारतीय किसानों के लिए अति आवश्यक हैं।
2. किसानों को सीधा फायदा: उपलब्धता, लागत और सब्सिडी
इस डील के मजबूत होने से भारतीय किसानों को कई सीधे आर्थिक लाभ मिलेंगे:
- लागत में कमी: रूस से बड़ी मात्रा में और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होने पर, अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भारत पर कम पड़ेगा। इससे सरकार को किसानों को दी जाने वाली उर्वरक सब्सिडी का बोझ कम करने या उर्वरकों की एमआरपी (MRP) को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
- स्थिर और निश्चित आपूर्ति: एक दीर्घकालिक डील से उर्वरक की कमी (Shortage) की समस्या खत्म होगी। किसानों को बुवाई के समय उर्वरक की कमी के कारण महंगे दामों पर उर्वरक खरीदने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
- कृषि खर्च में कटौती: DAP और NPK जैसे उर्वरक खेती की लागत का एक बड़ा हिस्सा होते हैं। इनकी कीमतें नियंत्रित रहने से किसानों का खेती का कुल खर्च कम होगा, जिससे उनका शुद्ध मुनाफा बढ़ेगा।
3. रूस के लिए भारत एक रणनीतिक बाज़ार
भारत न केवल आयात के लिए रूस पर निर्भर है, बल्कि रूस के लिए भी भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बाज़ार बन गया है।
- आपूर्ति में वृद्धि: वैश्विक बाज़ार में आई चुनौतियों के बीच, भारत ने रूस के उर्वरक निर्यात को एक स्थिर और बड़ा गंतव्य प्रदान किया है। इससे रूस को अपने कृषि निर्यात को बनाए रखने में मदद मिली है।
- पारस्परिक विश्वास: दोनों देशों के बीच यह बढ़ती साझेदारी आपसी विश्वास और रणनीतिक हितों के मिलान को दर्शाती है। यह साझेदारी केवल व्यापारिक नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक (Geo-political) रूप से भी महत्वपूर्ण है।
4. पुतिन की यात्रा: कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर
राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान, रक्षा और ऊर्जा के अलावा, कृषि क्षेत्र की साझेदारी पर विशेष ध्यान दिया गया।
- रणनीतिक अनिवार्यता: भारत के लिए, उर्वरकों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना एक रणनीतिक अनिवार्यता है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा सीधे तौर पर इन इनपुट्स पर निर्भर करती है।
- भविष्य की डील्स: उम्मीद है कि इस यात्रा से उर्वरकों की खरीद के लिए दीर्घकालिक अनुबंध (Long-term Contracts) पर हस्ताक्षर होंगे, जिससे भारत की आपूर्ति अगले 5 से 10 वर्षों के लिए सुरक्षित हो जाएगी। इससे किसानों को आने वाले वर्षों में भी सस्ते और पर्याप्त उर्वरक मिलने की गारंटी मिलेगी।
5. आत्मनिर्भरता की ओर पहला कदम
हालांकि भारत उर्वरकों के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन रूस जैसे विश्वसनीय साझेदार के साथ डील मजबूत करने से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी समर्थन मिलता है। स्थिर अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति सुनिश्चित करके, भारत को घरेलू उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए भी समय मिल जाएगा।
यह डील न केवल एक आर्थिक समझौता है, बल्कि यह भारत की खाद्य सुरक्षा की रणनीति का एक अभिन्न अंग है।





