भारतीय कृषि का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब किसान केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आधुनिक तकनीक, ऑर्गेनिक फार्मिंग और सटीक मौसम पूर्वानुमान (Weather Forecast) के आधार पर फैसले ले रहा है। इसी आधुनिकता को बैंकिंग सेक्टर से जोड़ने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के नियमों में आमूल-चूल बदलाव की तैयारी कर ली है। अपने ‘डेवलपमेंटल और रेगुलेटरी पॉलिसी स्टेटमेंट’ के जरिए RBI ने स्पष्ट कर दिया है कि KCC की पुरानी व्यवस्था को अब नई जरूरतों के हिसाब से ‘अपग्रेड’ किया जाएगा।
क्यों पड़ी नियमों को बदलने की ज़रूरत?
मौजूदा KCC नियमों में कई ऐसी खामियां थीं जिनकी वजह से किसानों को समय पर पर्याप्त कर्ज मिलने में दिक्कत आती थी। अक्सर बैंक पुराने मानकों (Estimates) के आधार पर लोन देते थे, जबकि खेती की लागत हर साल बदलती रहती है। इसके अलावा, फसल चक्र (Crop Cycle) और कर्ज चुकाने की अवधि में भी तालमेल की कमी थी। RBI का लक्ष्य इस पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और किसानों के लिए अधिक लचीला बनाना है।
बदलाव 1: फसल सीजन का नया वर्गीकरण (12 बनाम 18 महीने)
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव फसल की अवधि को लेकर किया गया है। अब तक लोन मंजूरी और पुनर्भुगतान (Repayment) के नियम अक्सर उलझाऊ होते थे। नए नियमों के तहत फसलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- अल्पकालिक फसलें (Short Duration): जो फसलें 12 महीने के भीतर पककर तैयार हो जाती हैं।
- दीर्घकालिक फसलें (Long Duration): गन्ना या फलों जैसे बागवानी वाली फसलें, जिन्हें पकने में अधिक समय लगता है, उन्हें 18 महीने की श्रेणी में रखा गया है।
इस वर्गीकरण से फायदा यह होगा कि बैंक अब किसान की फसल के हिसाब से किश्तें तय कर सकेंगे, जिससे किसान पर अनावश्यक मानसिक दबाव नहीं होगा।
बदलाव 2: कार्ड की वैधता अब 6 साल तक
किसानों की लंबे समय से मांग थी कि बार-बार दस्तावेजीकरण (Documentation) की प्रक्रिया को कम किया जाए। पहले KCC की समय सीमा अक्सर फसल चक्र से मेल नहीं खाती थी। अब ड्राफ्ट नियमों में KCC की कुल अवधि को बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि एक बार कार्ड बन जाने पर किसान को लंबे समय तक लोन के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह उन किसानों के लिए बड़ी राहत है जो फलदार वृक्ष या ऐसी खेती करते हैं जिसमें शुरुआती सालों में कमाई कम होती है।
बदलाव 3: ‘ड्रॉइंग लिमिट’ का नया गणित
अब तक की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि किसान को उतना ही पैसा मिलता था जितना बैंक की फाइलों में दर्ज था। लेकिन अब ‘ड्रॉइंग लिमिट’ (Drawing Limit) सीधे तौर पर खेती की वास्तविक लागत (Scale of Finance) पर निर्भर करेगी। यानी जिस सीजन में खाद, बीज या लेबर की लागत बढ़ेगी, किसान की कर्ज सीमा भी उसी अनुपात में एडजस्ट की जा सकेगी। यह नियम किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।
बदलाव 4: स्मार्ट खेती के लिए डिजिटल फाइनेंस
आज का किसान केवल हल नहीं चलाता, वह वैज्ञानिक तरीके अपना रहा है। RBI ने इसे पहचानते हुए KCC के दायरे को बढ़ा दिया है। अब किसान निम्नलिखित कार्यों के लिए भी KCC के फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे:
- मिट्टी की जांच (Soil Testing): ताकि पता चले कि खेत में कौन सी खाद की ज़रूरत है।
- सर्टिफिकेशन: ऑर्गेनिक खेती या एक्सपोर्ट क्वालिटी अनाज के लिए जरूरी प्रमाणपत्र लेने का खर्च।
- रियल टाइम वेदर अपडेट: मौसम की जानकारी देने वाली सेवाओं का सब्सक्रिप्शन।
इन खर्चों को ‘फार्म एसेट’ के रखरखाव के लिए मिलने वाले 20 प्रतिशत के अतिरिक्त कोटे में शामिल किया गया है। यानी अब किसान तकनीक में निवेश करके अपनी उपज बढ़ा सकेगा।
इन बैंकों पर लागू होगा नया कानून
RBI का यह ड्राफ्ट किसी एक बैंक के लिए नहीं है। इसमें शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) और ग्रामीण सहकारी बैंक—सभी को शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि गांव के छोटे सहकारी बैंक से लेकर शहर के बड़े कमर्शियल बैंक तक, सब पर एक जैसे पारदर्शी नियम लागू होंगे।
जनता से मांगे गए सुझाव: आप कैसे बन सकते हैं हिस्सा?
RBI ने लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखते हुए इन नियमों को तुरंत थोपने के बजाय जनता से फीडबैक मांगा है।
- अंतिम तिथि: 6 मार्च 2026 तक।
- कैसे दें सुझाव: RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘Connect 2 Regulate’ सेक्शन के माध्यम से।
- ईमेल: आप ईमेल के जरिए भी अपने विचार भेज सकते हैं। यह उन कृषि विशेषज्ञों और जागरूक किसानों के लिए एक बड़ा मौका है जो व्यवस्था में सुधार चाहते हैं।
यदि ये प्रस्तावित बदलाव 6 मार्च के बाद लागू हो जाते हैं, तो यह भारतीय कृषि लोन व्यवस्था में क्रांतिकारी साबित होंगे। यह केवल कर्ज देने का तरीका नहीं बदलेगा, बल्कि किसान को यह आज़ादी देगा कि वह अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे खर्च करे। मिट्टी जांच और डिजिटल सेवाओं को KCC में शामिल करना यह दर्शाता है कि सरकार अब खेती को ‘व्यवसाय’ (Business) की तरह देख रही है।
कुल मिलाकर, KCC के नए नियम किसानों के हाथ में अधिक ताकत और अधिक पैसा देने का वादा करते हैं, बशर्ते बैंक इसे जमीनी स्तर पर सही मंशा से लागू करें।




