भारतीय कृषि हमेशा से ही ‘मानसून का जुआ’ और मौसम के मिजाज पर निर्भर रही है। कभी बेमौसम बरसात, कभी ओलावृष्टि तो कभी कड़ाके की पाला (शीतलहर) किसानों की महीनों की मेहनत को चंद घंटों में तबाह कर देती है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को इसी अनिश्चितता से उबारने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) को एक मजबूत ढाल के रूप में पेश किया है। रबी की प्रमुख फसलों जैसे गेहूं, जौ, सरसों, आलू और चने को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए बीमा कराने की समय सीमा अब समाप्त होने वाली है। किसानों के पास अपनी फसलों का पंजीकरण कराने के लिए केवल 31 दिसंबर, 2025 तक का समय है।
मात्र 1.5% प्रीमियम: न्यूनतम खर्च, अधिकतम सुरक्षा
इस योजना की सबसे बड़ी खूबी इसकी किफायती प्रीमियम दरें हैं। रबी सीजन की फसलों के लिए किसानों को कुल बीमा राशि का मात्र 1.5 प्रतिशत ही प्रीमियम के रूप में देना होता है। शेष भारी-भरकम प्रीमियम राशि का भुगतान केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर करती हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी फसल का बीमा कवर 1 लाख रुपये है, तो किसान को मात्र 1500 रुपये देने होंगे, जबकि बाकी का बोझ सरकार उठाएगी। यह योजना उन सीमांत किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनके पास आर्थिक बैकअप कम होता है।
कैसे करें आवेदन? डिजिटल माध्यम से हुई राह आसान
सरकार ने पंजीकरण की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया है। किसान निम्नलिखित तरीकों से अपनी फसलों का बीमा सुनिश्चित कर सकते हैं:
- ऑनलाइन पोर्टल: किसान स्वयं आधिकारिक वेबसाइट pmfby.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
- टोल फ्री सहायता: योजना से जुड़ी किसी भी समस्या या जानकारी के लिए सरकार ने टोल फ्री नंबर 14447 जारी किया है, जहाँ विशेषज्ञ किसानों की मदद के लिए उपलब्ध हैं।
- कॉमन सर्विस सेंटर (CSC): ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर भी मामूली प्रक्रिया के साथ बीमा करा सकते हैं।
- बैंक और सहकारी समितियाँ: जिन किसानों ने ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) के माध्यम से ऋण लिया है, उनका बीमा बैंक के माध्यम से स्वतः (Automatic) भी किया जा सकता है, बशर्ते उन्होंने इसे लिखित में मना न किया हो।
उत्तर प्रदेश में उत्साहजनक आंकड़े
प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के अनुसार, रबी सीजन 2025-26 के लिए किसानों में इस बार अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। अब तक लगभग 15.01 लाख से अधिक किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं और कुल 53.23 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि किसान अब सरकारी सुरक्षा चक्र के महत्व को समझ रहे हैं। वर्तमान में 8.90 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को बीमे के दायरे में लाया जा चुका है।
अगर हम पिछले वर्षों के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें, तो साल 2016-17 से 2024-25 के बीच प्रदेश में 351.75 लाख बीमित किसानों ने अपनी फसलों को सुरक्षित किया। इस दौरान आपदा प्रभावित लगभग 73.79 लाख किसानों को 5679.26 करोड़ रुपये की भारी-भरकम क्षतिपूर्ति राशि सीधे उनके बैंक खातों में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी गई है।
खरीफ सीजन की सफलता ने बढ़ाया भरोसा
हाल ही में संपन्न हुए खरीफ सीजन 2025-26 के आंकड़े भी योजना की सफलता की गवाही देते हैं। इस दौरान 20.72 लाख किसानों ने 13.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा कराया था। राहत की बात यह है कि अब तक 2.70 लाख प्रभावित किसानों को 215.40 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है। भुगतान की यह रफ्तार ही किसानों के बीच योजना के प्रति विश्वास पैदा कर रही है।
कृषि मंत्री की अपील: आपदा आने का इंतजार न करें
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रदेश के समस्त किसानों से विशेष अपील करते हुए कहा है कि प्राकृतिक आपदाएं बताकर नहीं आतीं। ओलावृष्टि या अतिवृष्टि कभी भी आपकी खड़ी फसल को नुकसान पहुँचा सकती है। ऐसे में बीमा का ‘सुरक्षा कवच’ होना अनिवार्य है। उन्होंने साफ किया कि बीमित किसानों को नुकसान की स्थिति में फसल का पूरा लाभ मिलता है, जिससे उनकी आजीविका पर आंच नहीं आती। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि 31 दिसंबर तक ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए जाएं ताकि कोई भी पात्र किसान इस सुविधा से वंचित न रहे।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केवल एक सरकारी स्कीम नहीं है, बल्कि यह किसानों के स्वाभिमान और आर्थिक स्थिरता का आधार है। 31 दिसंबर की समय सीमा समाप्त होने में अब बहुत कम वक्त बचा है। ऐसे में सभी किसान भाइयों को चाहिए कि वे बिना देरी किए अपनी रबी फसलों का पंजीकरण कराएं। याद रखिए, फसल का बीमा कराना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आपके परिवार के भविष्य की सुरक्षा है।





