मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों ‘खाद’ (Fertilizer) सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। एक तरफ विपक्ष और सोशल मीडिया पर किसानों की लंबी लाइनों और लाठीचार्ज के वीडियो वायरल हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ सूबे के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने इन सब को एक ‘सुनियोजित साजिश’ करार दिया है। विभाग की दो साल की उपलब्धियां गिनाने के दौरान मंत्री ने न केवल खाद संकट को नकारा, बल्कि भविष्य की एक ऐसी योजना पेश की जो प्रदेश में खाद वितरण की पूरी तस्वीर बदल सकती है।
‘प्री-प्लान्ड’ है खाद की किल्लत का शोर: कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने खाद की कमी के आरोपों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई वास्तविक कमी नहीं है। उन्होंने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि खाद वितरण केंद्रों पर लगने वाली भीड़ और वहां होने वाला हंगामा अक्सर ‘प्री-प्लान’ यानी पहले से तय होता है। मंत्री के अनुसार, कुछ विशेष लोग जानबूझकर भीड़ में अपने समर्थकों को घुसाकर वीडियो बनाते हैं और फिर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर थप्पड़बाजी या हंगामे की झूठी तस्वीरें पेश करते हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल किसानों को अधिक मात्रा में खाद उपलब्ध कराई गई है।
जनवरी 2026 से बदलेगी व्यवस्था: खाद की ‘होम डिलीवरी’ मंत्री ने किसानों को आश्वासन दिया कि बहुत जल्द उन्हें खाद के लिए टोकन लेने या लाइनों में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मध्यप्रदेश सरकार आगामी जनवरी 2026 से ‘ई-विकास’ (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) सिस्टम को पूरे प्रदेश में लागू करने जा रही है। इस डिजिटल पोर्टल के माध्यम से खाद की होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाएगी।
कैसे काम करेगा ई-विकास पोर्टल? कृषि आयुक्त निशांत वरवड़े ने इस नई तकनीकी व्यवस्था की बारीकियों को समझाया। उन्होंने बताया कि:
- आधार आधारित पंजीकरण: किसान को पोर्टल पर अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा।
- भूमि का ऑटो-डिटेल: आधार लिंक होते ही किसान की कितनी जमीन है और वह किस तहसील में है, इसकी पूरी जानकारी सिस्टम में स्वतः आ जाएगी।
- फसल और कोटा का निर्धारण: किसान को बस यह जानकारी देनी होगी कि वह कितने क्षेत्र में कौन सी फसल बो रहा है। सॉफ्टवेयर फसल की जरूरत के हिसाब से खाद का कोटा तय कर देगा।
- डिलीवरी का समय: पंजीकरण के बाद एक निश्चित समय सीमा के भीतर किसान के घर या नजदीकी केंद्र पर खाद पहुँचा दी जाएगी।
इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में बेहद सफल रहा है, जहाँ लगभग 1.70 लाख किसानों ने घर बैठे अपनी खाद प्राप्त की है।
भावांतर भुगतान योजना और नीति आयोग की नजर: मध्यप्रदेश की एक और महत्वाकांक्षी योजना ‘भावांतर’ को लेकर भी सरकार उत्साहित है। मंत्री ने बताया कि सोयाबीन की फसल के लिए अब तक 9.36 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है और लगभग 13.89 लाख मेट्रिक टन सोयाबीन मंडियों में बेचा जा चुका है। प्रदेश की इस पारदर्शी मॉनिटरिंग व्यवस्था का अध्ययन अब केंद्र सरकार और नीति आयोग भी कर रहे हैं। 26 दिसंबर को प्रदेश के मुख्य सचिव दिल्ली में नीति आयोग के सामने इस योजना का एक विस्तृत प्रेजेंटेशन देंगे, ताकि इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी मॉडल के रूप में देखा जा सके।
कालाबाजारी पर कड़ा शिकंजा: सरकारी दावों के बीच खाद की कालाबाजारी करने वालों पर भी प्रशासन सख्त है। हाल ही में सागर जिले में चार बड़े व्यापारियों के स्टॉक में अंतर पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। वहीं रतलाम में अवैध रूप से यूरिया ले जा रहे ट्रक को जब्त कर प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि किसानों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।





