मध्य प्रदेश की ‘मोहन सरकार’ ने राज्य के अन्नदाताओं के हितों की रक्षा करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। 28 दिसंबर, रविवार को राज्य के 3.77 लाख सोयाबीन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रतलाम जिले के जावरा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान रिमोट का बटन दबाकर एक साथ ₹810 करोड़ की राशि सीधे किसानों के डीबीटी (DBT) खातों में ट्रांसफर कर दी। यह राशि सोयाबीन की कीमतों में आई गिरावट की भरपाई के रूप में दी गई है, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाया जा सके।
भावांतर भुगतान योजना: क्या है यह पूरी प्रक्रिया?
मध्य प्रदेश सरकार ने सोयाबीन किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए ‘मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना’ को फिर से प्रभावी ढंग से लागू किया है। अक्सर देखा जाता है कि बंपर पैदावार के समय या वैश्विक कारणों से मंडियों में सोयाबीन के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को घाटा न हो, इसके लिए सरकार ‘भावों के अंतर’ (भावांतर) का भुगतान करती है।
यह इस सीजन की दूसरी बड़ी किस्त है। इससे पहले नवंबर माह में भी सरकार ने लगभग 1.32 लाख किसानों के खातों में 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी थी। ताजा भुगतान के साथ ही सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह खेती को लाभ का धंधा बनाने के अपने वादे पर कायम है।
किसे मिला पैसा और कैसे हुई गणना?
भावांतर योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें और मानक तय किए गए हैं, जिन्हें समझना हर किसान के लिए जरूरी है:
- पंजीकरण अनिवार्य: इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को दिया गया है जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराया था और अपनी फसल मंडियों में बेची थी।
- MSP का आधार: यदि किसी किसान ने अपनी सोयाबीन फसल को सरकार द्वारा घोषित MSP या उससे अधिक दाम पर बेचा है, तो उन्हें इस योजना के तहत कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।
- मॉडल भाव का गणित: यदि मंडी में सोयाबीन का औसत विक्रय मूल्य MSP से कम है, तो सरकार ‘मॉडल भाव’ की गणना करती है।
- स्थिति A: यदि किसान की फसल का दाम MSP से कम है लेकिन मॉडल भाव से ज्यादा है, तो सरकार MSP और विक्रय मूल्य के बीच के अंतर का भुगतान करेगी।
- स्थिति B: यदि किसान को मिला दाम मॉडल भाव से भी कम है, तो सरकार केवल MSP और मॉडल भाव के बीच के अंतर की ही भरपाई करेगी।
यह जटिल गणना इसलिए की जाती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और केवल उन्हीं किसानों को लाभ मिले जिन्हें वास्तव में बाजार में कम दाम मिला है।
जावरा से मुख्यमंत्री का किसानों को संदेश
रतलाम के जावरा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यहाँ का किसान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोयाबीन उत्पादन में मध्य प्रदेश देश का अग्रणी राज्य है और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों और वर्तमान सरकार के बीच का अंतर बताते हुए कहा कि अब तकनीकी की मदद से बिना किसी बिचौलिये के पैसा सीधे किसान की जेब में पहुँच रहा है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह: अपना स्टेटस कैसे चेक करें?
यदि आप मध्य प्रदेश के पंजीकृत सोयाबीन किसान हैं, तो आप निम्नलिखित तरीकों से अपनी राशि की जानकारी ले सकते हैं:
- बैंक मैसेज: सबसे पहले अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर बैंक से प्राप्त मैसेज देखें।
- पासबुक अपडेट: अपने नजदीकी बैंक या कियोस्क सेंटर जाकर पासबुक अपडेट कराएं।
- आधिकारिक पोर्टल: भावांतर भुगतान योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने ‘किसान कोड’ या ‘आधार नंबर’ के जरिए अपने भुगतान की स्थिति की जांच करें।
₹810 करोड़ की यह बड़ी राशि जब ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में पहुंचेगी, तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। खाद, बीज और आगामी फसलों की तैयारी के लिए किसानों को साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह कदम न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह किसानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। 2026 की शुरुआत से पहले यह आर्थिक मदद मध्य प्रदेश के लाखों घरों में खुशियां लेकर आई है।





