महाराष्ट्र के नासिक से मुंबई की ओर पैदल मार्च कर रहे हजारों किसानों का जुनून देखकर आखिरकार राज्य सरकार हरकत में आ गई है। अपनी सात प्रमुख मांगों को लेकर कड़ाके की धूप में मिलों का सफर तय कर रहे किसानों के प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच मंगलवार देर रात अहम बैठक हुई। ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के नेतृत्व में हुए इस संवाद के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि आंदोलन जल्द ही खत्म हो सकता है, क्योंकि सरकार ने किसानों की लगभग सभी बुनियादी मांगों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा दिया है।
वन अधिकारों पर ऐतिहासिक फैसला
आंदोलनकारियों की सबसे बड़ी मांग वन भूमि पर उनके कानूनी अधिकार को लेकर थी। किसान सभा के नेता डॉ. अजीत नवलें के अनुसार, सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रशासनिक त्रुटियों और गलत रिपोर्टिंग की वजह से कई किसानों के दावे खारिज हुए थे।
- नई जांच समिति: अब हर जिले में उप-विभागीय अधिकारी (SDO) की अध्यक्षता में विशेष समितियां गठित की जाएंगी। ये समितियां अगले 3 महीनों के भीतर उन सभी दावों की दोबारा जांच करेंगी जिन्हें पहले खारिज कर दिया गया था।
- फसल निरीक्षण: वन भूमि पर खेती करने वाले किसानों की फसलों का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं और मुआवजे का लाभ मिल सके।
फसल खरीद और बोनस की सौगात
आदिवासी किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए सरकार ने विशेष सहमति जताई है। वन क्षेत्रों में उगाई जाने वाली पारंपरिक फसलें जैसे वरई, नागली, सावा, स्ट्रॉबेरी और बाल हिरडा को अब सरकार उचित न्यूनतम मूल्य पर खरीदेगी। इसके साथ ही धान की खेती करने वाले किसानों को अतिरिक्त बोनस देने की मांग पर भी फडणवीस सरकार ने मुहर लगा दी है।
पानी और मंदिर भूमि का पेचीदा मसला
किसानों की एक प्रमुख मांग मंदिर की जमीनों को उनके नाम करने की थी। सरकार इस दिशा में पहले से ही एक कानून का मसौदा तैयार कर रही है। AIKS ने इस मसौदे में कुछ बदलावों का सुझाव दिया है, जिस पर चर्चा के लिए अगले आठ दिनों में एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी।
इसके अलावा, आदिवासी क्षेत्रों की पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के पानी को रोककर स्थानीय सूखाग्रस्त गांवों तक पहुँचाने के लिए चेक डैम (Check Dam) बनाने की योजना को भी हरी झंडी मिल गई है।
बुनियादी सुविधाएं: बिजली, शिक्षा और रोजगार
खेती के लिए बिजली की समस्या पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सिंचाई के लिए रात की बजाय दिन में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
आंदोलन की अगली दिशा: आज होगा बड़ा फैसला
हालांकि सरकार के साथ बातचीत काफी सकारात्मक रही है, लेकिन किसान सभा ने साफ किया है कि आंदोलन वापस लेने का अंतिम निर्णय ठाणे जिले के खारदी में जुटे किसानों के बीच चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। बुधवार को कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन और नासिक के जिला कलेक्टर किसानों को संबोधित करेंगे और सरकार के फैसलों का लिखित ब्यौरा पेश करेंगे। इसके बाद ही तय होगा कि मार्च मुंबई तक जाएगा या यहीं खत्म होगा।





