गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित ऊंझा मंडी, जिसे पूरे एशिया का सबसे बड़ा जीरा व्यापार केंद्र माना जाता है, पिछले कुछ दिनों से एक बड़ी आपराधिक साजिश का गवाह बनी हुई थी। यहाँ के दो सुरक्षित गोदामों से रहस्यमयी तरीके से ₹3 करोड़ मूल्य का जीरा गायब हो गया। इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा करते हुए मेहसाणा पुलिस ने रविवार को बताया कि इस पूरी साजिश का ताना-बाना एक वकील और उसके गिरोह ने बुना था।
घटनाक्रम: चालाकी और तकनीक का खेल
मेहसाणा के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) दिनेशसिंह चौहान के अनुसार, यह चोरी किसी एक दिन की वारदात नहीं थी। आरोपियों ने 12 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 के बीच ऊनावा हाईवे पर स्थित दो बड़े गोदामों को अपना निशाना बनाया।
- डुप्लीकेट चाबियों का सहारा: गिरोह ने पहले गोदाम के असली तालों की बारीकी से जांच की। इसके बाद दिल्ली से बुलाए गए एक एक्सपर्ट की मदद से उनकी डुप्लीकेट चाबियां तैयार करवाई गईं।
- रातों-रात सफाई: शातिर चोरों ने रात के सन्नाटे का फायदा उठाया। बताया जा रहा है कि लगभग 10 बार ट्रकों के फेरे लगाए गए और चुपचाप सैकड़ों बोरी जीरा गोदामों से बाहर निकाल लिया गया।
कैसे हुआ पर्दाफाश?
चोरी का खुलासा तब हुआ जब व्यापारियों ने अपने स्टॉक की जांच की और पाया कि गोदाम लगभग खाली हो चुके हैं। 4 जनवरी को ऊनावा थाने में दो एफआईआर दर्ज की गईं। पुलिस की ‘लोकल क्राइम ब्रांच’ (LCB) को इनपुट मिला कि कुछ लोग ऊंझा के बाजार में बेहद कम और असामान्य कीमतों पर जीरा बेचने की कोशिश कर रहे हैं। यहीं से पुलिस के हाथ सुराग लगा। सीसीटीवी फुटेज की जांच और मुखबिरों की सूचना पर एक ट्रक ड्राइवर को पकड़ा गया, जिसने इस पूरे गिरोह के ‘कच्चे चिट्ठे’ खोल दिए।
गिरोह का ‘कॉरपोरेट’ ढांचा: कौन क्या करता था?
जांच में पता चला कि इस चोरी को किसी पेशेवर कंपनी की तरह मैनेज किया गया था:
- इकराम मेमन (वकील): पाटन जिला अदालत में प्रैक्टिस करने वाला यह वकील इस गिरोह का स्थानीय चेहरा और रणनीतिकार था। उसने गिरोह बनाने और कानूनी पेच से बचने की योजना बनाई।
- इमरान जमील (दिल्ली): यह मुख्य योजनाकार और ‘चाबी एक्सपर्ट’ है। उसने ही डुप्लीकेट चाबियां बनाईं (फिलहाल फरार)।
- जुम्मा खान: इसका काम चोरी के लिए ट्रक और मजदूरों का इंतजाम करना था।
- गौरव पटेल: इसकी जिम्मेदारी पुलिस की गश्त और गतिविधियों पर नजर रखना था (रेकी करना)।
- वजाहत खान और सादिक मेमन: ये चोरी किए गए माल को ‘किसान’ बनकर मंडी में खपाने का काम करते थे।
सुरक्षा गार्ड की लापरवाही पड़ी भारी
जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी आया कि व्यापारियों ने गोदाम की सुरक्षा के लिए एक गार्ड नियुक्त किया था। लेकिन गार्ड रात भर रुकने के बजाय सिर्फ तालों को चेक करके घर चला जाता था। चोरों ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया और गार्ड के जाने के बाद अपनी नकली चाबियों से ताले खोलकर चोरी को अंजाम दिया।
बरामदगी और फरार आरोपी
पुलिस ने अब तक इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से ₹45 लाख नकद और जीरे की 121 बोरी बरामद की गई है। हालांकि, मास्टरमाइंड इमरान जमील और उसका एक अन्य साथी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
बाजार पर असर और सतर्कता
ऊंझा मंडी में हुई इस वारदात ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। आरोपियों ने चोरी का माल डीसा और खुद ऊंझा मंडी में ही यह कहकर बेचा कि वे किसान हैं और अपनी उपज लेकर आए हैं। पुलिस ने व्यापारियों को सलाह दी है कि वे बिना पूरी जांच-परख के असामान्य रूप से सस्ते माल की खरीदारी न करें और अपने सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करें।
ऊंझा की यह चोरी दिखाती है कि अब अपराधी तकनीक (चाबी बनाना) और पेशेवर ज्ञान (वकील का शामिल होना) का इस्तेमाल कर रहे हैं। मेहसाणा पुलिस की मुस्तैदी ने समय रहते इस नेटवर्क को तोड़ दिया, अन्यथा यह गिरोह मंडी की अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुँचा सकता था।





