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कटिहार के ‘मैंगो मैन’ का कमाल: विकसित की आम की नई और बेजोड़ किस्म ‘चितरंजन’

अंकित शर्मा by अंकित शर्मा
December 27, 2025
in खेती-किसानी
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बिहार की मिट्टी अपनी उर्वरता और यहाँ के किसान अपनी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। इसी कड़ी में कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले रौतारा गाँव के निवासी कालीदास बनर्जी ने एक नया इतिहास रच दिया है। बागवानी के प्रति उनके जुनून ने उन्हें ‘मैंगो मैन’ का गौरवपूर्ण खिताब दिलाया है। उन्होंने अपनी बरसों की तपस्या और शोध से आम की एक ऐसी नई प्रजाति विकसित की है, जिसे उन्होंने ‘चितरंजन’ नाम दिया है। यह आम आज न केवल बिहार, बल्कि सीमा पार नेपाल और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के बाजारों में भी धूम मचा रहा है।

अनोखा आविष्कार: कैसे बना ‘चितरंजन’ आम?

कालीदास बनर्जी वर्ष 1985 से ही बागवानी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘चितरंजन’ आम के विकास के पीछे उनकी वैज्ञानिक सोच और प्रयोगधर्मी स्वभाव का बड़ा हाथ है। उन्होंने ‘भेनियर ग्राफटिंग’ (Veneer Grafting) तकनीक और मशहूर ‘मुंबई कलमी’ प्रजाति के बीच सफल क्रॉस कराकर इस नई किस्म को जन्म दिया है।

इस आम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे भारत सरकार द्वारा संरक्षित (Protected) प्रजाति का दर्जा प्राप्त है। यह आम जून और जुलाई के महीनों में पककर तैयार होता है, जब बाजार में अन्य लोकप्रिय किस्मों की आवक कम होने लगती है।

‘चितरंजन’ की खासियतें: क्यों है यह दूसरों से अलग?

एक आदर्श आम में लोग जिस स्वाद और बनावट की तलाश करते हैं, चितरंजन उन सभी पैमानों पर खरा उतरता है। कालीदास बनर्जी द्वारा विकसित इस फल की कुछ अद्वितीय विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  1. शारीरिक बनावट: यह आम लगभग 6 इंच लंबा और 3 इंच की गोलाई वाला होता है। इसका आकार काफी आकर्षक और सुडौल है।
  2. रेशा विहीन गूदा: अक्सर आम खाने वालों को रेशों (Fibers) से शिकायत रहती है, लेकिन चितरंजन का गूदा पूरी तरह रेशा रहित और मक्खन की तरह मुलायम होता है।
  3. पतली गुठली: इस प्रजाति में गुठली बहुत पतली होती है, जिसके कारण फल में गूदे की मात्रा अन्य आमों के मुकाबले काफी अधिक मिलती है।
  4. प्राकृतिक सुरक्षा: इस पेड़ के पत्ते कुछ रूखे होते हैं और फल की टहनियों पर पकड़ इतनी मजबूत होती है कि तेज आंधी-तूफान में भी फल झड़कर नीचे नहीं गिरते। यह किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा की तरह है।

नर्सरी नहीं, यह है ‘बागवानी का विश्वविद्यालय’

कालीदास बनर्जी ने अपनी एक हाईटेक पौधशाला (Nursery) तैयार की है, जो आज के समय में किसानों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र बन चुकी है। यहाँ वे केवल पौधे नहीं बेचते, बल्कि किसानों को आधुनिक बागवानी के गुर भी सिखाते हैं। वे यहाँ आने वाले नवागंतुक बागवानों को कलम बांधने की वैज्ञानिक विधियाँ, कीटों से बचाव के लिए रसायनों का सही संतुलन और खेती में काम आने वाले अत्याधुनिक उपकरणों के प्रयोग की ट्रेनिंग देते हैं।

उनकी इस निस्वार्थ सेवा और नवाचार के लिए देश के कई प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालयों ने उन्हें प्रमाण पत्रों और स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया है। उनके पास 20 से 25 पौधों का एक विशेष ‘जामत बागान’ है, जो उनकी पौधशाला की शोभा बढ़ाता है।

पेड़-पौधों में देखते हैं अपनी संतान

कालीदास बनर्जी और उनकी धर्मपत्नी की कोई अपनी संतान नहीं है। लेकिन इस दंपत्ति ने कभी इस कमी को अपने जीवन पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने अपने पूरे उद्यान और उसमें लगे हजारों पौधों को ही अपनी संतान मान लिया है। वे इन पेड़ों की देखभाल उसी ममता और दुलार से करते हैं, जैसे माता-पिता अपने बच्चों की करते हैं। उनके लिए हर एक नया अंकुर एक नई उम्मीद और हर एक फल एक बड़ी उपलब्धि की तरह है। यही भावनात्मक जुड़ाव है जिसने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है।

नेपाल और बंगाल तक फैली ख्याति

आज कटिहार के इस ‘चितरंजन’ आम की मांग केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। नेपाल से आने वाले व्यापारी और पश्चिम बंगाल के फल प्रेमी खास तौर पर इस किस्म के पौधों और फलों के लिए रौतारा पहुँचते हैं। कालीदास बनर्जी की इस पहल ने कटिहार को बागवानी के वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई है।

कालीदास बनर्जी उर्फ ‘मैंगो मैन’ की यह सफलता कहानी बताती है कि यदि इरादे नेक हों और मेहनत में ईमानदारी हो, तो बिना किसी बड़े तामझाम के भी दुनिया में बदलाव लाया जा सकता है। उनकी ‘चितरंजन’ आम की किस्म आने वाले समय में बिहार के किसानों के लिए वरदान साबित होगी और बागवानी को एक लाभप्रद व्यवसाय के रूप में स्थापित करेगी। कालीदास जी आज न केवल एक सफल बागवान हैं, बल्कि वे उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणापुंज हैं जो कृषि के क्षेत्र में कुछ नया करने का सपना देखते हैं।

Tags: BiharChitranjan VarietyKalidas BanerjeeMango farmingMango Mansuccess story
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