प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओमान यात्रा ने भारत के व्यापारिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 18 दिसंबर 2025 को भारत और ओमान के बीच ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) पर आधिकारिक मुहर लग गई। हालांकि, इस समझौते की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर भारत के ग्रामीण इलाकों, डेयरी संचालकों और किसानों के लिए आई है। वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत ने अपनी ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति को बरकरार रखते हुए डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस मुक्त व्यापार समझौते के दायरे से बाहर रखा है।
डेयरी और कृषि क्षेत्र को क्यों रखा गया बाहर?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। यहाँ करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर डेयरी से जुड़ी है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ओमान या उसके रास्ते विदेशी डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में बिना किसी ड्यूटी (टैक्स) के आने दिया जाता, तो इससे स्थानीय दुग्ध उत्पादकों के सामने कीमतों का संकट खड़ा हो सकता था।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू जैसे उत्पादों को ‘संवेदनशील सूची’ में डाला है। इसका अर्थ यह है कि ओमान के साथ व्यापार तो बढ़ेगा, लेकिन इन विशिष्ट क्षेत्रों में भारत अपने टैरिफ (आयात शुल्क) को कम नहीं करेगा, ताकि स्वदेशी बाजार स्थिर बना रहे।
समझौते की बारीकियां और ‘टैरिफ-रेट कोटा’
मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारत ने अपनी पुरानी आर्थिक नीति का पालन करते हुए स्थानीय उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। जहाँ भारत ओमान से आने वाले लगभग 95% सामानों पर अपनी ड्यूटी घटाएगा, वहीं 78% टैरिफ लाइनों पर विशेष छूट दी जाएगी। लेकिन, कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों को इस छूट से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके बजाय, कुछ संवेदनशील उत्पादों को ‘टैरिफ-रेट कोटा’ के माध्यम से सीमित एंट्री दी जा सकती है, जिससे बाजार में अचानक विदेशी सामान की बाढ़ न आए।
भारतीय निर्यात के लिए खुलेंगे नए रास्ते
एक ओर जहाँ सरकार ने घरेलू किसानों को बचाया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय निर्यातकों के लिए ओमान के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं। इस डील के तहत भारत को ओमान की 98% टैरिफ लाइनों पर ‘जीरो ड्यूटी एक्सेस’ मिलेगा। इसका सबसे बड़ा लाभ उन क्षेत्रों को होगा जो वर्तमान में वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं:
- टेक्सटाइल और कपड़े: भारतीय कपड़ों पर अब ओमान में कोई टैक्स नहीं लगेगा, जिससे अरब देशों में हमारे कपड़ों की मांग बढ़ेगी।
- चमड़ा और जूते: लेबर-इंटेंसिव सेक्टर होने के कारण यहाँ बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।
- जेम्स और ज्वेलरी: सोने और चांदी के आभूषणों के निर्यात में भारत को बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है।
सोना-चांदी और बेस मेटल्स पर भी कड़ा रुख
सिर्फ कृषि ही नहीं, भारत ने सोने और चांदी के बुलियन, आभूषणों और कई बेस मेटल्स के स्क्रैप को भी ड्यूटी फ्री लिस्ट से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य देश के भीतर धातु बाजार में अस्थिरता को रोकना और अवैध व्यापार पर लगाम लगाना है। यह कदम दर्शाता है कि भारत अब किसी भी देश के साथ व्यापार करते समय अपने ‘कोर सेक्टर्स’ की बलि नहीं चढ़ाएगा।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की राह
भारत और ओमान के बीच इस समझौते की बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी और लगभग दो वर्षों के कड़े परिश्रम के बाद अगस्त 2025 में यह पूरी हुई। प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे ने खाड़ी देशों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। ओमान अब तक भारतीय सामानों पर औसतन 5% ड्यूटी लगाता था, जो अब खत्म या बहुत कम हो जाएगी। इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिका या यूरोप जैसे पारंपरिक बाजारों के अलावा एक नया और मजबूत विकल्प मिल गया है।





