राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के राठीखेड़ा गांव में प्रस्तावित एथेनॉल उत्पादन इकाई के विरोध में किसानों का आंदोलन बुधवार को हिंसक रूप ले लिया। एक तरफ किसानों की पर्यावरणीय चिंताएं थीं, तो दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा लागू की गई कानूनी व्यवस्था। महापंचायत के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने निर्माणाधीन फैक्ट्री परिसर पर धावा बोल दिया, जहां तोड़फोड़ और आगजनी की घटना हुई। इस अप्रिय घटना में कई वाहन जलकर राख हो गए और कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया है और प्रशासन को सख्ती बरतने पर मजबूर होना पड़ा है।
घटना का विस्तृत विवरण:
यह तनावपूर्ण घटना बुधवार शाम को टिब्बी क्षेत्र में उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय के पास एक महापंचायत के आयोजन के बाद हुई। स्थानीय किसान पिछले लगभग 15 महीनों से अधिक समय से ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा स्थापित की जा रही 450 करोड़ रुपये की लागत वाली अनाज-आधारित एथेनॉल फैक्ट्री का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। किसानों का मुख्य विरोध इस बात पर केंद्रित है कि फैक्ट्री के संचालन से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा, भूजल स्तर प्रदूषित होगा और उनकी कृषि फसलें बुरी तरह प्रभावित होंगी।
महापंचायत का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से हुआ, लेकिन इसके समापन के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। सैकड़ों किसान फैक्ट्री स्थल की ओर कूच कर गए। प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टरों का उपयोग करके परिसर की बाउंड्री वॉल तोड़ दी और अंदर घुसकर जमकर उत्पात मचाया।
आगजनी और क्षति:
हिंसक भीड़ ने फैक्ट्री परिसर में खड़े वाहनों को निशाना बनाया और आग लगा दी। इस आगजनी में कुल 16 वाहन जलकर राख हो गए, जिनमें लगभग 10 निजी कारें, कई मोटरसाइकिलें, एक पुलिस जीप और एक जेसीबी मशीन शामिल हैं। वाहनों के जलने से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
पुलिस कार्रवाई और घायलों का विवरण:
जब प्रदर्शनकारियों ने कानून को अपने हाथ में लिया और तोड़फोड़ शुरू की, तो पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। दोनों पक्षों के बीच हुई इस झड़प में पाँच पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियों का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया सहित कई प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की सूचना है।
प्रशासन की कड़ी चेतावनी:
घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव और पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने स्थिति को नियंत्रित किया। देर रात, जिला कलेक्टर डॉ. यादव का आधिकारिक बयान सामने आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि महापंचायत की अनुमति लोकतांत्रिक मांगों को देखते हुए दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने धारा 144 लागू होने के बावजूद निर्धारित क्षेत्र को छोड़कर फैक्ट्री साइट पर पहुंचकर तोड़फोड़ की।
जिला कलेक्टर ने चेतावनी देते हुए कहा कि “कुछ असामाजिक तत्वों ने फैक्ट्री परिसर को निशाना बनाया और कानून हाथ में लिया। जिन्होंने कानून तोड़ा है उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।” उन्होंने बताया कि कई बार समाधान के प्रयास किए गए, जिसमें किसानों को पंजाब में स्थापित ऐसी ही फैक्ट्री का दौरा करने का न्योता देना और 3 दिसंबर को विस्तृत कार्यशाला का आयोजन करना शामिल है, जहां प्रदूषण से जुड़ी आशंकाओं को दूर करने और फैक्ट्री से होने वाले आर्थिक फायदों (जैसे 9 करोड़ की पराली और 6 करोड़ का मक्का/चावल खरीदने) के बारे में बताया गया था।
एसपी हरीशंकर ने भी बवाल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही।
वर्तमान स्थिति और आगे की राह:
हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं:
- गिरफ्तारियां: बवाल के संबंध में सात किसानों को हिरासत (डिटेन) में लिया गया है।
- प्रतिबंध: इलाके में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है।
- सुरक्षा: पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
- जनजीवन: सुरक्षा कारणों से स्कूल, कॉलेज और बाजार पूरी तरह बंद रहे।
हालांकि, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और आगे की बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की अपील की है, लेकिन वर्तमान में क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।





