भारतीय राजनीति और समाज में गाय का मुद्दा हमेशा से ही एक भावनात्मक और विवादास्पद विषय रहा है। आमतौर पर यह विषय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उससे जुड़े संगठनों द्वारा प्रमुखता से उठाया जाता रहा है, लेकिन संसद के हालिया शीतकालीन सत्र में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला। गुरुवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से कांग्रेस सांसद उज्जवल रमण सिंह ने केंद्र सरकार से यह मांग करके राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया कि देश भर में देसी गायों की नस्लों को संरक्षित करने की सख्त आवश्यकता है, और इसी क्रम में गाय को ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राजमाता’ का संवैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए।
लोकसभा में ‘राष्ट्रमाता’ की मांग:
सांसद उज्जवल रमण सिंह ने शून्यकाल में अपनी बात रखते हुए देसी गायों की घटती संख्या और उनके महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाय भारतीय राष्ट्रीय पहचान और गौरव का प्रतीक रही है, लेकिन वर्तमान में देश में देसी गोवंश की आबादी में तेज़ी से गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा:
“गाय हमारी सभ्यता और संस्कृति का आधार है। इसकी गरिमा, सम्मान और संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है। हमें देसी गायों की नस्लों को विलुप्त होने से बचाना होगा।”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दो प्रमुख माँगें रखीं:
- गोवंश वध पर पूर्ण प्रतिबंध: उन्होंने गोवंश के सभी पशुओं के वध (Killing) पर राष्ट्रव्यापी और पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।
- संवैधानिक दर्जा: उन्होंने देसी गाय को ‘राष्ट्रमाता’ अथवा ‘राजमाता’ का उच्च संवैधानिक दर्जा दिए जाने की पुरजोर वकालत की।
सांसद सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि इस मांग को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगातार प्रयासरत हैं।
राजनीतिक गलियारों में नई बहस:
कांग्रेस सांसद द्वारा इस मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर उठाना राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए हैरानी का विषय बन गया है। परंपरागत रूप से, गाय को संवैधानिक दर्जा देने या गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने जैसे मुद्दे बीजेपी के कोर एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। कांग्रेस के एक सांसद द्वारा इस विषय को उठाना कई राजनीतिक निहितार्थों की ओर इशारा करता है:
- संदेश देने का प्रयास: यह पहल यह संदेश देने का एक स्पष्ट प्रयास हो सकता है कि कांग्रेस पार्टी भी ऐसे भावनात्मक और सांस्कृतिक मुद्दों पर चिंतन कर रही है और देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति संवेदनशील है।
- बीजेपी के एजेंडे को चुनौती: यह कदम बीजेपी के ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के एजेंडे के कुछ हिस्सों को अपनाने या उस पर बहस करने का प्रयास भी हो सकता है।
- व्यक्तिगत राय या पार्टी का रुख: इस मांग के बाद राजनीतिक विश्लेषक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह उज्जवल रमण सिंह का व्यक्तिगत विचार है, या यह कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ किसी विचार-विमर्श का परिणाम है। इस संबंध में, कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए, फिलहाल इसे सांसद सिंह का व्यक्तिगत प्रश्न ही माना जा रहा है, जिसने अनजाने में एक बड़े राजनीतिक विमर्श को जन्म दे दिया है।
संरक्षण की आवश्यकता:
राजनीतिक बहस से परे, सांसद सिंह द्वारा देसी गायों की आबादी में गिरावट का मुद्दा उठाना एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और कृषि संबंधी चिंता है। देसी गायें अपनी विशिष्ट रोग प्रतिरोधक क्षमता, कम लागत वाले पालन-पोषण और पारंपरिक कृषि प्रणालियों में महत्व के लिए जानी जाती हैं। उनके संरक्षण की आवश्यकता पर देश भर के कृषि और पशुपालन विशेषज्ञ लंबे समय से बल दे रहे हैं।





