नई दिल्ली में 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बजट का स्वागत करते हुए इसे “विकसित भारत के सपने को साकार करने वाला महाकाव्य” करार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह बजट वर्ष 2047 तक भारत को एक सशक्त और स्वावलंबी राष्ट्र बनाने की दिशा में सबसे मजबूत कदम है।
वित्त मंत्री का ऐतिहासिक कीर्तिमान
शिवराज सिंह ने रेखांकित किया कि श्रीमती निर्मला सीतारमण ने लगातार 9वीं बार बजट पेश कर एक नया इतिहास रचा है। उन्होंने इसे नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, यह 12वीं बार है जब मोदी सरकार ने देश की ‘चार जातियों’—गरीब, युवा, महिला और किसान—को केंद्र में रखकर अपनी भविष्यगामी दृष्टि पेश की है।
कृषि क्षेत्र: लागत में कमी और नवाचार पर जोर
कृषि मंत्रालय के लिए इस बार सरकार ने अपनी तिजोरी खोल दी है। बजट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- ऐतिहासिक आवंटन: कृषि विभाग का बजट बढ़ाकर 1,32,561 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
- खाद सब्सिडी की राहत: किसानों पर खेती की लागत का बोझ कम करने के लिए सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक की उर्वरक सब्सिडी का प्रावधान किया है। इससे किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध होती रहेगी।
- अनुसंधान और तकनीक: कृषि शिक्षा और अनुसंधान (ICAR) के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य खेती में आधुनिक तकनीक और नई किस्मों के बीजों का समावेश करना है।
ग्रामीण विकास: 21% की उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी
शिवराज सिंह चौहान, जो ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, ने बताया कि इस विभाग के बजट में 21 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि की गई है। यदि कृषि और ग्रामीण विकास दोनों को मिला दिया जाए, तो यह सम्मिलित बजट 4,35,779 करोड़ रुपये तक पहुँच जाता है।
- मनरेगा की शक्ति: मनरेगा के लिए केंद्र का हिस्सा बढ़ाकर 95,692 करोड़ रुपये कर दिया गया है। राज्यों के अंशदान को मिलाकर यह राशि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।
पंचायतों का सशक्तिकरण: सीधे पहुँचेगा पैसा
लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई यानी पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 55,900 करोड़ रुपये सीधे आवंटित किए जाएंगे। पहले 5 सालों के मुकाबले अब पंचायतों को मिलने वाली कुल राशि लगभग दोगुनी होकर 4.35 लाख करोड़ रुपये हो गई है। शिवराज सिंह का मानना है कि इससे गांव अपनी जरूरतों के हिसाब से विकास की योजनाएं खुद बना पाएंगे।
नारी शक्ति: ‘लखपति दीदी’ से ‘SHE-मार्ट’ तक
महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उद्यमी बनाने की दिशा में यह बजट क्रांतिकारी है।
- SHE-मार्ट: हर जिले में ‘सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर’ (SHE-मार्ट) की स्थापना की जाएगी। यह एक कम्युनिटी-ओन्ड रिटेल आउटलेट होगा जहाँ स्वयं सहायता समूहों की बहनें अपने उत्पादों को सीधे बेच सकेंगी।
- लखपति दीदी: इस योजना को नया विस्तार देते हुए पशुपालन और लघु उद्योगों से जुड़ी महिलाओं को नया प्लेटफॉर्म प्रदान किया जाएगा।
खेती में विविधीकरण (Diversification) का नया अध्याय
बजट में पारंपरिक फसलों के अलावा ‘हाई-वैल्यू’ फसलों पर विशेष ध्यान दिया गया है:
- नारियल और काजू: इनके पुराने बागों के पुनरुद्धार और नए क्षेत्र विस्तार के लिए विशेष बजट दिया गया है।
- चंदन और कोको: चंदन की लकड़ी और कोको जैसी महंगी फसलों के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं ताकि किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकें।
- औषधीय खेती: आयुष मंत्रालय के माध्यम से मेडिसिनल प्लांट्स के सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया कि यह बजट गरीबी को जड़ से मिटाने और किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे सशक्त साधन बनेगा। यह केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक ऐसे ‘डेवलप्ड इंडिया’ का विजन है जहाँ गांव आत्मनिर्भर होंगे, युवा रोजगारयुक्त होंगे और महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी।




