भारत में शायद ही कोई ऐसा घर हो जहाँ दाल में तड़का लगाने या रोटियों को चुपड़ने के लिए घी का इस्तेमाल न होता हो। हम अक्सर बाजार से अमूल, मदर डेयरी या पतंजलि जैसे बड़े ब्रांडों के घी के पैकेट इस भरोसे के साथ लाते हैं कि वे शुद्ध होंगे। लेकिन, हाल के दिनों में कई राज्यों में पकड़ी गई नकली घी की फैक्ट्रियों ने इस भरोसे को हिलाकर रख दिया है। जालसाज अब नामी कंपनियों के पुराने डिब्बे या हूबहू दिखने वाली पैकिंग का इस्तेमाल कर उसमें वनस्पति तेल, पशुओं की चर्बी और खतरनाक रसायनों (Chemicals) का मिश्रण भरकर बेच रहे हैं। यह ‘नकली घी’ स्वाद में तो शायद आपको धोखा न दे, लेकिन यह आपके परिवार की सेहत के लिए ‘साइलेंट किलर’ साबित हो सकता है।
सेहत पर नकली घी का घातक प्रहार
जब हम मिलावटी घी का सेवन करते हैं, तो हमारा शरीर उसे पचा नहीं पाता। लंबे समय तक इसके उपयोग से कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं:
- लिवर और किडनी पर दबाव: मिलावटी तेल और रसायन लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं और समय के साथ अंगों को डैमेज कर सकते हैं।
- कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग: नकली घी में अक्सर ‘ट्रांस फैट’ और पाम ऑयल की अधिकता होती है, जो धमनियों में ब्लॉकेज पैदा कर हृदय घात (Heart Attack) का जोखिम बढ़ा देती है।
- इम्युनिटी में कमी: यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे लोग बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं।
खरीदते समय ऐसे पहचानें ‘असली’ पैकेट
नकली घी की पहचान घर लाने से पहले दुकान पर भी की जा सकती है। इसके लिए आपको थोड़ा ‘स्मार्ट ग्राहक’ बनना होगा:
- पैकेजिंग और फिनिशिंग: नामी ब्रांड्स अपनी पैकेजिंग की क्वालिटी पर बहुत ध्यान देते हैं। यदि पैकेट की प्रिंटिंग धुंधली है, रंग फीका है या लोगो (Logo) में कोई मामूली बदलाव (जैसे ‘Amul’ की जगह ‘Amool’) दिखे, तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है।
- बारकोड और QR कोड: आजकल लगभग सभी बड़े ब्रांड्स अपने पैकेट पर QR कोड या यूनिक कोड देते हैं। अपने स्मार्टफोन से उसे स्कैन करें; यदि वह कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या प्रोडक्ट डिटेल्स पर ले जाता है, तो वह असली है।
- कीमत का लालच: यदि बाजार में घी की औसत कीमत 600 रुपये किलो है और कोई आपको 400 रुपये में ब्रांडेड घी दे रहा है, तो निश्चित तौर पर वह मिलावटी है। शुद्ध घी बनाने की लागत इतनी कम नहीं हो सकती।
- सीलिंग की जांच: असली घी का पैकेट पूरी तरह ‘एयर टाइट’ और मशीन से सील किया हुआ होता है। यदि सील हाथ से लगाई हुई या ढीली लगे, तो उसे कतई न खरीदें।
किचन में मौजूद 4 आसान घरेलू टेस्ट (Purity Test at Home)
यदि आप घी खरीद लाए हैं और अब उसकी शुद्धता को लेकर संशय में हैं, तो इन वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों को आजमाएं:
- 1. हथेली का जादू (The Palm Test):
थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर रखें। यदि घी असली है, तो वह आपके शरीर की सामान्य गर्मी से ही 10-15 सेकंड में धीरे-धीरे पिघलना शुरू कर देगा। यदि घी नकली है, तो वह हथेली पर घंटों रखा रहने के बाद भी नहीं पिघलेगा या चिपचिपा महसूस होगा। - 2. पानी का परीक्षण (The Water Test):
एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच घी डालें। शुद्ध घी पानी की सतह पर तैरने लगेगा और बहुत धीमी गति से घुलेगा। वहीं, मिलावटी घी या तो पानी के नीचे बैठ जाएगा या पानी का रंग दूधिया/मटमैला कर देगा। - 3. रंग और खौलने का टेस्ट (Heating Method):
एक कढ़ाही या कलछी में थोड़ा घी गर्म करें। शुद्ध घी तुरंत पिघल जाएगा और गहरा भूरा (Brownish) रंग ले लेगा और उसमें से सोंधी खुशबू आएगी। यदि घी नकली है, तो उसे पिघलने में समय लगेगा और उसका रंग पीला या सफेद बना रहेगा। - 4. आयोडीन टेस्ट (स्टार्च की पहचान):
अक्सर घी को गाढ़ा करने के लिए उसमें आलू या शकरकंद का स्टार्च मिलाया जाता है। इसे पकड़ने के लिए थोड़े से घी में दो बूंद ‘आयोडीन सॉल्यूशन’ डालें। यदि घी का रंग नीला (Blue) हो जाता है, तो समझ लीजिए कि उसमें आलू या चावल के आटे की मिलावट की गई है।
मिलावटखोरों का जाल बहुत गहरा है, लेकिन आपकी जागरूकता उन्हें हरा सकती है। हमेशा ‘अधिकृत डेयरी बूथ‘ या भरोसेमंद बड़े स्टोर से ही खरीदारी करें। घी केवल एक भोजन नहीं है, वह आयुर्वेद में औषधि माना गया है, इसलिए इसके चयन में कोई लापरवाही न बरतें। यदि आपको किसी दुकान पर नकली घी का संदेह हो, तो तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) को इसकी सूचना दें। आपकी एक सतर्कता आपके और आपके समाज के स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकती है।





