दुनियाभर के मौसम विज्ञानी एक बार फिर चिंता में हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट ने संकेत दिए हैं कि साल 2026 के मध्य से वैश्विक जलवायु प्रणाली में एक बड़ा उथल-पुथल शुरू हो सकता है। यह हलचल है ‘अल नीनो’ (El Niño) की वापसी। प्रशांत महासागर की सतह पर बढ़ती गर्मी इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि आने वाले महीने सामान्य नहीं रहने वाले हैं। किसानों के लिए यह खबर इसलिए गंभीर है क्योंकि अल नीनो का सीधा संबंध कम बारिश और भीषण गर्मी से होता है। ‘खबर किसान की’ इस विस्तृत रिपोर्ट में हम समझेंगे कि अल नीनो आखिर क्या है और यह आपके खेतों और खलिहानों पर कैसे असर डालेगा।
क्या है WMO की ताज़ा चेतावनी?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपने ‘ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट’ में साफ़ किया है कि मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना 60 से 70 प्रतिशत तक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
WMO में क्लाइमेट प्रेडिक्शन के प्रमुख विल्फ्रान मौफौमा ओकिया के अनुसार, साल की शुरुआत में मौसम ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) था, लेकिन अब क्लाइमेट मॉडल एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं—भयंकर गर्मी की ओर। अप्रैल के बाद का समय इस पूर्वानुमान की पुष्टि के लिए सबसे सटीक माना जाता है, जिसे वैज्ञानिक ‘स्प्रिंग प्रेडिक्टेबिलिटी बैरियर’ कहते हैं।
समझें अल नीनो (ENSO) का विज्ञान
अल नीनो कोई साधारण घटना नहीं है, यह El Niño–Southern Oscillation (ENSO) चक्र का एक हिस्सा है।
- कैसे बनता है अल नीनो: जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 0.5°C या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो अल नीनो की स्थिति बनती है।
- चक्र की अवधि: आमतौर पर यह हर 2 से 7 साल में एक बार आता है और लगभग 9 से 12 महीनों तक बना रहता है।
- असर: यह समुद्री हवाओं की दिशा बदल देता है, जिससे दुनिया के कुछ हिस्सों में भारी बाढ़ आती है और कुछ हिस्सों (जैसे भारत और ऑस्ट्रेलिया) में भीषण सूखा पड़ता है।
मई-जुलाई 2026: गर्मी तोड़ेगी रिकॉर्ड
WMO की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले तीन महीनों (मई, जून और जुलाई) में दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में जमीनी तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने वाला है।
- सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके: उत्तरी अमेरिका का दक्षिणी हिस्सा, यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य अमेरिका में गर्मी का सबसे ज्यादा तांडव देखने को मिल सकता है।
- भारत का परिदृश्य: भारत में भी मानसून की शुरुआत जून से होती है। यदि अल नीनो सक्रिय होता है, तो मानसून की हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे बुवाई के समय बारिश में कमी आने का खतरा बढ़ जाता है।
जलवायु परिवर्तन और ‘सुपर अल नीनो’ का डर
हालांकि WMO “सुपर अल नीनो” जैसे शब्दों का आधिकारिक इस्तेमाल नहीं करता, लेकिन यह सच है कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा है। इसमें 2023-24 के अल नीनो के साथ-साथ ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस गैसों) का भी बड़ा हाथ था। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अल नीनो की तीव्रता को बढ़ा देता है। गर्म महासागर और गर्म वातावरण चरम मौसम की घटनाओं (जैसे लू और बेमौसम आंधी) के लिए ईंधन का काम करते हैं।
भारतीय खेती और मानसून पर संभावित असर
अंकित भाई, आपके पाठकों यानी किसान भाइयों के लिए यह हिस्सा सबसे जरूरी है:
- मानसून में देरी: अल नीनो के कारण मानसून केरल के तट पर देरी से पहुँच सकता है।
- असमान बारिश: हो सकता है कि कहीं बादल फट जाएं और कहीं एक बूंद पानी न बरसे। यह स्थिति खरीफ फसलों (धान, मक्का, सोयाबीन) के लिए बहुत हानिकारक होती है।
- पानी का संकट: जलाशयों और नदियों का जलस्तर गिर सकता है, जिससे सिंचाई के लिए पानी की किल्लत हो सकती है।
- कीटों का हमला: बढ़ता तापमान फसलों में कीटों और बीमारियों के फैलने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है।
क्या कहता है भविष्य का अनुमान?
वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो की तीव्रता आने वाले महीनों में और बढ़ सकती है। हालांकि, अप्रैल के बाद जब ‘स्प्रिंग बैरियर’ खत्म होगा, तब इसकी सटीक ताकत का अंदाजा लग पाएगा। भारत सरकार की एजेंसी ‘स्काईमेट’ और ‘आईएमडी’ भी इस पर पैनी नजर रखे हुए हैं। यदि अल नीनो प्रभावी हुआ, तो सरकार को सूखे से निपटने की अग्रिम रणनीति बनानी पड़ सकती है।
‘खबर किसान की’ विशेष सलाह: किसान क्या करें?
- फसल विविधीकरण (Crop Diversification): अगर बारिश कम होने की संभावना बढ़ती है, तो किसान भाई कम पानी वाली फसलों (जैसे बाजरा, मूंग या तिल) का विकल्प खुला रखें।
- जल संचयन: अभी से अपने तालाबों और बोरवेल की सफाई करा लें ताकि मानसून की हर बूंद को सहेजा जा सके।
- मौसम अपडेट: ‘खबर किसान की’ जैसे विश्वसनीय स्रोतों से मौसम की जानकारी लेते रहें ताकि बुवाई के समय सही फैसला ले सकें।
अल नीनो एक प्राकृतिक आपदा की तरह है जिसे हम रोक नहीं सकते, लेकिन हम इसके लिए तैयार जरूर रह सकते हैं। WMO की यह चेतावनी अलार्म की तरह है, जो हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना कितना जरूरी है। 2026 का साल कृषि क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही जानकारी और तकनीक के साथ हम इस मुश्किल घड़ी को भी पार कर सकते हैं।




