भारत के मौसम विभाग (IMD) ने देश के एक बड़े हिस्से के लिए आने वाले दिनों को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक, अप्रैल की तपती गर्मी के बजाय दिसंबर जैसी ठंडक और तूफानी बारिश का मंजर देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक साथ सक्रिय हुए दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने पूरे देश के वायुमंडल को अस्थिर कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों की खड़ी फसलों पर पड़ने की आशंका है। 7 से 10 अप्रैल के बीच देश के 10 से ज्यादा राज्यों में आसमानी बिजली, ओलावृष्टि और धूल भरी आंधी का दौर जारी रहने वाला है।
उत्तर-पश्चिम भारत: पहाड़ों पर बर्फ और मैदानों में पानी
आने वाले 48 घंटे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए बेहद संवेदनशील हैं।
- बर्फबारी की चेतावनी: कश्मीर घाटी में 7 अप्रैल को भारी हिमपात और मूसलाधार बारिश का अनुमान है। इस दौरान पहाड़ों पर 30 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलेंगी।
- मैदानी इलाकों का हाल: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में मौसम विभाग ने धूल भरी आंधी का अंदेशा जताया है। विशेषकर राजस्थान में 6 और 7 अप्रैल को 50 से 70 किमी प्रति घंटे की गति से चलने वाली ‘रेतीली आंधी’ जनजीवन को प्रभावित कर सकती है।
दिल्ली-NCR: धूल भरी आंधी और गरज-चमक
राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी मौसम का मिजाज तल्ख रहने वाला है।
- तूफानी हवाएं: दिल्ली में 7 और 8 अप्रैल को 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।
- तापमान में गिरावट: बेमौसम बारिश के चलते अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को अप्रैल में भी गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर होना पड़ा है।
बिहार और झारखंड: ‘ऑरेंज अलर्ट’ के साथ ओलावृष्टि का खतरा
पूर्वी भारत के राज्यों के लिए मौसम विभाग ने ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।
- तूफानी रफ्तार: बिहार और झारखंड में 6 से 8 अप्रैल के दौरान 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी चलने का अनुमान है।
- ओलावृष्टि: कई जिलों में ओले गिरने की संभावना है, जिससे आम और लीची की फसल को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
- पश्चिम बंगाल और सिक्किम: यहाँ 8 और 9 अप्रैल को भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जिससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है।
मध्य और दक्षिण भारत: बौछारों का दौर
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण के तटीय इलाकों में भी आसमान से राहत नहीं मिलने वाली है।
- मध्य भारत: मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 5 से 8 अप्रैल के बीच ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
- दक्षिण भारत: तमिलनाडु, केरल और तटीय आंध्र प्रदेश में मानसून से पहले की बारिश (Pre-monsoon rain) सक्रिय है, जिससे छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है।
‘खबर किसान की’ विशेष सलाह: फसल कैसे बचाएं?
अंकित भाई, यह समय किसानों के लिए सबसे कठिन है क्योंकि गेहूं और सरसों की कटाई का काम चल रहा है।
- कटाई रोकें: यदि आपके क्षेत्र में बारिश या आंधी का अलर्ट है, तो फसल की कटाई 10 अप्रैल तक टाल दें।
- भंडारण: काटी गई फसल को खेत में खुला न छोड़ें। उसे ऊँचे स्थान पर तिरपाल से ढंककर सुरक्षित रखें।
- सिंचाई न करें: तेज़ हवाओं के दौरान सिंचाई करने से फसल गिरने (Lodging) का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए अभी पानी न लगाएं।
- कीटनाशक का प्रयोग: बारिश के दौरान किसी भी प्रकार के स्प्रे या उर्वरक का छिड़काव न करें, क्योंकि वह धुल जाएगा और पैसा बर्बाद होगा।
10 अप्रैल के बाद का अनुमान: फिर लौटेगी भीषण गर्मी
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 8 अप्रैल के बाद यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ना शुरू होगा।
- गर्मी की वापसी: 10 अप्रैल के बाद बादलों की आवाजाही कम होगी और सूरज की तपिश फिर से बढ़ेगी।
- अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा: अनुमान है कि 15 अप्रैल के बाद उत्तर और मध्य भारत में ‘लू’ (Heatwave) का प्रकोप शुरू हो जाएगा। यानी, यह बारिश केवल एक संक्षिप्त राहत है, जिसके बाद झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
बेमौसम की यह मार प्रकृति का बदला हुआ स्वभाव दर्शाती है। ‘खबर किसान की‘ अपने सभी पाठकों से अपील करता है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें और बिजली कड़कने के समय सुरक्षित पक्के मकानों में शरण लें। किसान भाई अपने पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर बांधें। मौसम की हर पल की जानकारी के लिए हमारे पोर्टल से जुड़े रहें।





