भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए पिछला कुछ समय मौसम के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा है। कहीं बेमौसम बारिश तो कहीं ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरने की कोशिश की है। इसी बीच, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोर्चा संभाल लिया है। दिल्ली के कृषि भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने साफ़ कर दिया कि मोदी सरकार का लक्ष्य केवल रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज करना नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में किसान को आर्थिक सुरक्षा देना है। मंत्री महोदय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सहायता की फाइलें दफ्तरों में नहीं, बल्कि राहत खेतों तक पहुँचनी चाहिए।
वैज्ञानिक सर्वे और बीमा क्लेम: अब नहीं होगा इंतज़ार
अक्सर देखा जाता है कि फसल खराबे के बाद किसान महीनों तक मुआवजे का इंतज़ार करते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने इस परिपाटी को बदलने के निर्देश दिए हैं।
- वैज्ञानिक आकलन: उन्होंने निर्देश दिए कि राज्यों के साथ तालमेल बिठाकर ‘क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट’ को वैज्ञानिक ढंग से और समय पर पूरा किया जाए।
- त्वरित सहायता: मंत्री ने कहा कि ओलावृष्टि और भारी बारिश से प्रभावित इलाकों में फील्ड स्तर पर तुरंत कार्रवाई हो ताकि किसानों को फसल बीमा योजना (PMFBY) का लाभ बिना किसी देरी के मिल सके।
- भविष्य की चेतावनी: मौसम विभाग द्वारा आने वाले ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) की चेतावनी को देखते हुए उन्होंने किसानों के लिए समयबद्ध एडवाइजरी जारी करने को कहा है।
दलहन आत्मनिर्भरता: ‘जितनी उपज, उतनी खरीद’ का संकल्प
भारत को दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बैठक में ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ को लेकर बड़ी घोषणाएं की गईं:
- असीमित खरीदी: शिवराज सिंह ने वादा किया है कि तुअर, मसूर और उड़द की फसल किसान जितना बेचना चाहेंगे, सरकार उतनी ही खरीदेगी। इसके लिए नेफेड (NAFED) और सीसीएफ (CCF) जैसी एजेंसियों को मुस्तैद कर दिया गया है।
- MSP की गारंटी: दालों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाएगी ताकि बाज़ार में भाव गिरने की स्थिति में भी किसान का नुकसान न हो।
- आयात पर लगाम: लक्ष्य यह है कि दालों के लिए विदेशों पर निर्भरता खत्म हो और किसानों की आय में स्थिरता आए।
क्वांटिटी के साथ क्वालिटी: ‘सरबती गेहूं’ जैसा मिलेगा प्रीमियम
कृषि मंत्री ने एक नई सोच साझा की है—“क्वालिटी सुधार अभियान”। उन्होंने उदाहरण दिया कि मध्य प्रदेश का ‘सरबती’ गेहूं अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के कारण बाज़ार में MSP से ₹400-500 ऊपर बिकता है।
- सरकार अब किसानों को ऐसी उन्नत और बायोफोर्टिफाइड किस्में उगाने के लिए प्रेरित करेगी, जिनकी बाज़ार में प्रीमियम वैल्यू हो।
- इससे किसान को सरकारी खरीद पर निर्भर रहने के बजाय खुले बाज़ार में भी अपनी फसल के ऊंचे दाम मिल सकेंगे।
रीजनल कॉन्फ्रेंस: दिल्ली से निकलकर राज्यों तक पहुँचेगी योजना
खेती की योजना अब केवल दिल्ली के बंद कमरों में नहीं बनेगी। शिवराज सिंह ने खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए ‘रीजनल कॉन्फ्रेंसेज़’ का नया मॉडल पेश किया है:
- पाँच ज़ोन: पूरे देश को उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और हिमालयी राज्यों के पाँच ज़ोन में बांटा गया है।
- तय तिथियां: 7 अप्रैल को जयपुर, 17 अप्रैल को लखनऊ और 24 अप्रैल को ओडिशा में क्षेत्रीय बैठकें होंगी।
- कौन होगा शामिल? इन बैठकों में केवल अधिकारी ही नहीं, बल्कि कृषि वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, FPO (किसान उत्पादक संगठन) और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे, जिन्होंने प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में नाम कमाया है।
बीज से बाज़ार तक: हर फसल का अपना रोडमैप
सरकार अब हर राज्य और हर मुख्य फसल (जैसे सोयाबीन, मक्का, नारियल) के लिए एक अलग ‘रोडमैप’ तैयार कर रही है। इसमें बीज के चयन से लेकर, बुआई की तकनीक, रोगों से बचाव और अंत में बाज़ार उपलब्ध कराने तक की पूरी ‘वैल्यू चेन’ पर काम होगा। किसानों को ‘क्लीन प्लांटिंग मटीरियल’ उपलब्ध कराना इस योजना का अहम हिस्सा है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह रुख दर्शाता है कि सरकार कृषि को केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि देश की समृद्धि का आधार मानती है। बंपर रबी उत्पादन और आगामी खरीफ की पुख्ता तैयारियों के बीच, मंत्री का यह आश्वासन कि “सरकार किसान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है“, ग्रामीण भारत में एक नया आत्मविश्वास जगाएगा।




