भारत में दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है, लेकिन कुछ लालची लोग अधिक मुनाफे के चक्कर में इसे ‘सफेद जहर’ बनाने से भी नहीं कतरा रहे हैं। गुजरात के साबरकांठा जिले में एक ऐसी ही डरावनी हकीकत सामने आई है। यहाँ की ‘श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स’ नामक यूनिट पर छापेमारी के दौरान यह पता चला कि यहाँ असली दूध की जगह रसायनों का घोल बेचा जा रहा था। पुलिस और खाद्य विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है।
साजिश का खुलासा: 300 लीटर से 1800 लीटर का ‘जादू’
पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर सकते हैं। इस फैक्ट्री के संचालक केवल 300 लीटर असली दूध का आधार लेते थे। इसके बाद इसमें पानी, मिल्क पाउडर और खतरनाक रसायनों का ऐसा मिश्रण तैयार किया जाता था कि वह शाम तक 1,700 से 1,800 लीटर दूध और छाछ में तब्दील हो जाता था। यानी, ग्राहकों को जो दूध मिल रहा था, उसमें असली दूध का अंश मात्र 15-20% ही था, बाकी सब जानलेवा केमिकल थे।
जहरीली सामग्री की लंबी फेहरिस्त
छापेमारी के दौरान जो सामान जब्त किया गया, वह किसी डेयरी का नहीं बल्कि किसी केमिकल लैब जैसा नजर आता है। अधिकारियों ने यहाँ से 71 लाख रुपये का माल जब्त किया है, जिसमें शामिल हैं:
- यूरिया खाद और कास्टिक सोडा: इनका इस्तेमाल दूध में नाइट्रोजन की मात्रा (प्रोटीन दिखाने के लिए) और सफेदी बढ़ाने के लिए किया जाता था।
- डिटर्जेंट पाउडर: दूध में झाग पैदा करने के लिए साबुन के पाउडर का इस्तेमाल हो रहा था।
- पामोलिन और सोयाबीन तेल: दूध को गाढ़ा और फैट से भरपूर दिखाने के लिए रिफाइंड तेल घोला जा रहा था।
- व्हे और स्किम्ड मिल्क पाउडर: हज़ारों किलो पाउडर का इस्तेमाल दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए किया गया।
ग्रामीण इलाकों में फैला था जाल
हैरानी की बात यह है कि यह फैक्ट्री पिछले 5 वर्षों से बेखौफ चल रही थी। यहाँ तैयार किए गए जहरीले दूध और छाछ को आकर्षक पाउच में पैक किया जाता था और साबरकांठा के आसपास के कई गाँवों में सप्लाई किया जाता था। मासूम ग्रामीण इस दूध को अपनी सेहत के लिए अच्छा समझकर पी रहे थे, जबकि वे धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों को दावत दे रहे थे।
प्रशासनिक कार्रवाई: 5 गिरफ्तार, फैक्ट्री सील
लोकल क्राइम ब्रांच (LCB), फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और खाद्य एवं औषधि विभाग की एक संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। मौके से एक नाबालिग सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले पैकेजिंग उपकरण और मशीनों को भी अपने कब्जे में ले लिया है और पूरी यूनिट को सील कर दिया गया है।
सेहत पर क्या होगा असर?
चिकित्सकों के अनुसार, डिटर्जेंट और यूरिया युक्त दूध का सेवन शरीर के लिए अत्यंत घातक है। कास्टिक सोडा और डिटर्जेंट पेट की परतों को जला सकते हैं, जबकि यूरिया गुर्दों (Kidneys) को पूरी तरह फेल कर सकता है। लंबे समय तक ऐसे दूध का सेवन कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियों का कारण भी बन सकता है।
साबरकांठा का यह मामला हमें चेतावनी देता है कि अपनी और अपने परिवार की सेहत के प्रति आँख बंद करके भरोसा न करें। दूध खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच करना और विश्वसनीय स्रोतों से ही डेयरी उत्पाद लेना अनिवार्य है। प्रशासन की इस कार्रवाई ने एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ तो कर दिया है, लेकिन ऐसे और भी ‘मौत के सौदागर‘ समाज के बीच छिपे हो सकते हैं।




