बिहार सरकार राज्य के किसानों को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाने जा रही है। एग्रीस्टैक (AgriStack) परियोजना के तहत बिहार में ‘फार्मर रजिस्ट्री’ के काम में तेजी लाने के लिए सरकार अब ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। गुरुवार को बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी 2 फरवरी से 6 फरवरी तक पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस ‘मिशन मोड’ अभियान का उद्देश्य हर योग्य किसान को डिजिटल प्रणाली से जोड़ना है।
पुरस्कारों की घोषणा: जिलों के बीच विकास की प्रतिस्पर्धा
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान स्पष्ट किया कि एग्रीस्टैक के कार्यों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिलों को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम की भी घोषणा की:
- ₹1.5 लाख का पुरस्कार: जो जिले अपने यहाँ पीएम किसान योजना के कुल लाभार्थियों में से 50 प्रतिशत का रजिस्ट्रेशन पूरा कर लेंगे, उन्हें यह बड़ी राशि इनाम में दी जाएगी।
- ₹50 हजार का प्रोत्साहन: 35 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करने वाले जिलों को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे।
बैठक में बेहतर प्रदर्शन करने वाले वैशाली, शिवहर, बेगूसराय, बक्सर, शेखपुरा और कटिहार जैसे जिलों की सराहना भी की गई।
मुफ्त सेवा: किसानों की जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब किसानों को फार्मर आईडी बनवाने के लिए अपनी जेब से एक पैसा भी खर्च नहीं करना होगा। मुख्य सचिव ने कड़े निर्देश दिए हैं कि वसुधा केंद्रों या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जो 15 रुपये का सेवा शुल्क लिया जाता था, उसे तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। इस शुल्क का भुगतान अब सरकार करेगी। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि शुल्क के अभाव में कोई भी छोटा किसान इस महत्वपूर्ण पंजीकरण से वंचित न रह जाए।
बिहार बना देश के लिए मॉडल
बिहार सरकार की इस सक्रियता की गूंज अब दिल्ली तक पहुँच चुकी है। कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्र सरकार ने बिहार के ‘फार्मर रजिस्ट्री’ मॉडल की जमकर तारीफ की है। अन्य राज्यों को भी बिहार की तर्ज पर मिशन मोड में काम करने की सलाह दी गई है। यह बिहार के प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
अब तक की प्रगति: आंकड़ों की जुबानी
बिहार में फार्मर रजिस्ट्री का काम पहले से ही गति पकड़ चुका है:
- फार्मर आईडी: अब तक राज्य के लगभग 29 लाख 55 हजार किसानों की आईडी बनाई जा चुकी है।
- ई-केवाईसी: करीब 67 लाख किसानों का ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा हो चुका है।
- पीएम किसान लाभार्थी: राज्य में कुल 75 लाख किसान पीएम किसान योजना का लाभ लेते हैं, जिन्हें जल्द से जल्द डिजिटल आईडी से जोड़ा जाना है।
क्या है फार्मर आईडी के फायदे?
कृषि विभाग के अनुसार, फार्मर आईडी तैयार होने के बाद किसानों को खाद, बीज, सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभों के लिए बार-बार कागजात जमा करने की जरूरत नहीं होगी। डेटाबेस पारदर्शी होने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सही किसान तक सही समय पर मदद पहुँच सकेगी। रैयत किसानों की पहचान सुनिश्चित होने से फसल बीमा और आपदा राहत की राशि भी सीधे खातों में भेजी जा सकेगी।
बिहार सरकार का यह 5 दिवसीय विशेष अभियान राज्य के कृषि भविष्य को बदलने वाला साबित हो सकता है। डिजिटल साक्षरता और सरकारी पारदर्शिता का यह मेल न केवल किसानों की समस्याओं को कम करेगा, बल्कि बिहार को कृषि क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगा।





