27 जनवरी 2026 का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया है। इस समझौते का सीधा असर बाजार में दिखने वाला है, जहाँ यूरोपीय देशों से आने वाले प्रीमियम खाद्य पदार्थ, वाइन और लग्जरी सामान अब काफी कम कीमतों पर उपलब्ध होंगे। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊंचे टैरिफ के कारण व्यापारिक बाधाएं बढ़ रही हैं।
किन उत्पादों पर मिलेगी सबसे बड़ी राहत?
यूरोपीय संघ की फैक्टशीट के अनुसार, भारत उन उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Duty) घटाने जा रहा है जिन पर अब तक औसतन 36% से ज्यादा टैक्स लगता था।
- शराब और वाइन (Wine & Spirits): यूरोपीय वाइन पर वर्तमान में 150% का भारी-भरकम टैक्स लगता है। डील लागू होते ही यह तत्काल गिरकर 75% रह जाएगा और अगले कुछ वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर केवल 20% के स्तर पर लाया जाएगा।
- जैतून का तेल (Olive Oil): स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए अच्छी खबर है। जैतून के तेल पर लगने वाला 45% टैरिफ अगले 5 वर्षों के भीतर पूरी तरह यानी शून्य (0%) कर दिया जाएगा।
- प्रोसेस्ड फूड और चॉकलेट: बच्चों और युवाओं की पसंदीदा यूरोपीय चॉकलेट, बिस्कुट, पास्ता और अन्य प्रोसेस्ड फूड पर लगने वाला 50% तक का टैक्स हटाया जा रहा है।
- फलों के जूस और कीवी: फलों के जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर पर 55% तक का शुल्क खत्म होगा, जबकि कीवी और नाशपाती जैसे विदेशी फलों की कीमतें भी कोटे के तहत कम की जाएंगी।
संवेदनशील कृषि सेक्टर को मिली सुरक्षा
जहाँ एक ओर बाजार को खोला गया है, वहीं भारत सरकार ने देश के करोड़ों किसानों के हितों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है। ‘खबर किसान की’ के पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि चावल, चीनी, बीफ और चिकन मीट जैसे संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इन क्षेत्रों में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है ताकि घरेलू किसानों और छोटे उत्पादकों की आजीविका पर कोई आंच न आए।
व्यापारिक गणित: $136 बिलियन का बड़ा बाजार
साल 2024-25 के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत और यूरोपीय संघ के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 136.53 बिलियन डॉलर रहा है। भारत का लगभग 17% निर्यात यूरोपीय देशों को होता है। इस डील के बाद भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए टेक्सटाइल, स्मार्टफोन, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो पार्ट्स के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
फूड सेफ्टी और GI टैग पर जोर
इस समझौते में केवल कीमतों की बात नहीं है, बल्कि गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। यूरोपीय संघ के कड़े हेल्थ और फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स भारत में आने वाले सभी इंपोर्ट्स पर लागू रहेंगे। साथ ही, दोनों पक्ष ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ (GI) पर अलग से चर्चा कर रहे हैं ताकि असली और नकली उत्पादों के बीच अंतर स्पष्ट रहे और पारंपरिक उत्पादों को कानूनी सुरक्षा मिले।
यह 19वां व्यापारिक समझौता भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ और वैश्विक अनिश्चितता के बीच, यूरोपीय देशों के साथ यह साझेदारी भारतीय निर्यातकों को विविधता प्रदान करेगी और घरेलू उपभोक्ताओं को कम कीमत पर विश्वस्तरीय उत्पाद उपलब्ध कराएगी।





