गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित पद्म पुरस्कारों में आईआईटी (IIT) मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी का नाम शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है। जहाँ एक ओर शिक्षा जगत में खुशी की लहर है, वहीं केरल कांग्रेस के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने प्रोफेसर कामाकोटी की वैज्ञानिक उपलब्धियों के बजाय ‘गोमूत्र पर शोध’ को लेकर उन पर तंज कसा, जिसके बाद टेक जगत की मशहूर हस्ती और जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने कांग्रेस को आईना दिखाया है।
क्या है पूरा मामला? कांग्रेस का ‘बधाई’ वाला तंज
विवाद की शुरुआत तब हुई जब केरल कांग्रेस की आधिकारिक यूनिट ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की। इसमें प्रोफेसर कामाकोटी को पद्म श्री के लिए बधाई तो दी गई, लेकिन साथ ही उनके काम का उपहास उड़ाते हुए लिखा गया— “प्रोफेसर कामाकोटी को सम्मान मिलने पर बधाई। देश आईआईटी मद्रास में गाय के मूत्र पर आपके ‘शानदार‘ शोध को पहचानता है, जो इसे दुनिया के मंच पर ले जा रहा है।“ कांग्रेस का यह इशारा उस रिसर्च की ओर था जिसमें पारंपरिक भारतीय ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी पर परखने की कोशिश की जा रही है।
श्रीधर वेम्बु का पलटवार: ‘गुलाम मानसिकता’ का दिया हवाला
कांग्रेस के इस तंज पर जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु चुप नहीं रहे। उन्होंने प्रोफेसर कामाकोटी की शैक्षणिक योग्यता और देश के प्रति उनके योगदान का मजबूती से बचाव किया। वेम्बु ने लिखा, “प्रोफेसर कामाकोटी ‘डीप टेक‘ और माइक्रो–प्रोसेसर डिजाइन जैसे जटिल विषयों पर काम करते हैं। वह देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी–मद्रास के निदेशक हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह इस नागरिक सम्मान के पूरी तरह हकदार हैं।“
वेम्बु ने आगे बढ़ते हुए पारंपरिक चीजों पर शोध की वैज्ञानिक वैधता का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि गाय के गोबर और गोमूत्र में ऐसे सूक्ष्मजीव (Microbiome) होते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत मूल्यवान हो सकते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यह एक औपनिवेशिक और गुलाम मानसिकता है जो हमारे अपने पारंपरिक वैज्ञानिक प्रस्तावों को जांचने के काबिल नहीं मानती। कल जब हार्वर्ड या एमआईटी (MIT) इसी विषय पर शोध प्रकाशित करेंगे, तो यही लोग उसे ‘परम सत्य‘ मानकर सिर झुका लेंगे।“
प्रोफेसर कामाकोटी का विजन: विकसित भारत @ 2047
विवादों के बीच, प्रोफेसर वी. कामाकोटी ने अपनी विनम्रता का परिचय दिया है। उन्होंने इस सम्मान को अपनी व्यक्तिगत जीत के बजाय एक सामूहिक उपलब्धि बताया। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “मेरे लिए पद्म श्री का अर्थ है कि मैं ‘विकसित भारत @ 2047′ के लक्ष्य को पाने के लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रयास करूंगा। यह पुरस्कार उन सभी लोगों के परिश्रम का परिणाम है जिन्होंने मेरे साथ काम किया है। मैं इसे उन्हीं को समर्पित करता हूँ।“
यह विवाद एक बार फिर स्पष्ट करता है कि भारत में विज्ञान और राजनीति के बीच की लकीर अक्सर धुंधली हो जाती है। जहाँ कांग्रेस इसे एक खास विचारधारा से जोड़कर देख रही है, वहीं श्रीधर वेम्बु जैसे उद्यमी इसे ‘स्वदेशी विज्ञान‘ और ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के नजरिए से देख रहे हैं। प्रोफेसर कामाकोटी का योगदान केवल एक शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को सेमीकंडक्टर और माइक्रो–प्रोसेसर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में उनकी भूमिका मील का पत्थर साबित हो रही है।





